-परिवार पूछ रहा शिकायतों पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई
सामना संवाददाता / मुंबई
पुलिस अधिकारी द्वारा बार-बार बलात्कार से परेशान होकर आत्महत्या करनेवाली महिला डॉक्टर ने पुलिस और गृह मंत्रालय को कई बार पत्र लिखकर उस पर हो रहे अत्याचार और प्रताड़ना की शिकायत की थी, लेकिन तोड़फोड़ की राजनीति में व्यस्त मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जिनके अधीन गृह मंत्रालय है, के पास राज्य की कानून व्यवस्था के लिए समय ही नहीं है। ऐसे में फडणवीस के पास गृह मंत्रालय के कामकाज की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहा है।
सातारा की मृतक महिला डॉक्टर की बहन ने बताया कि उस पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बदलाव करने का दबाव डाला जा रहा था। फिटनेस सर्टिफिकेट देने से इनकार करने के बाद उस पर मानसिक प्रताड़ना बढ़ती गई। उसने इस मामले में अधिकारियों को पांच पन्नों का पत्र लिखा था और सूचना के अधिकार के तहत भी आवेदन दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक आवेदन में उपजिला अस्पताल के डॉक्टर धुमाल का भी उल्लेख है, लेकिन उनके खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे सवाल उठ रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर महिला डॉक्टरों में भारी आक्रोश है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अपील की है कि इस मामले में पूरी जांच की जाए। सभी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
परिवार ने कहा है कि मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी सिर्फ हाथ पर लिखे सुसाइड नोट देखकर निष्कर्ष न निकालें, बल्कि उसके द्वारा भेजे गए पत्र पर ध्यान दें। परिवार ने बताया कि वह घर की जिम्मेदार बेटी थी और उसके शिक्षा ऋण का भुगतान अभी बाकी था।
रोजाना करती थी ८० पोस्टमार्टम, कमजोर नहीं थी वह
मृतक की बहन ने कहा कि वो रोज ८० से ९० पोस्टमार्टम को लीड करनेवाली मजबूत लड़की थी, वो आत्महत्या नहीं कर सकती। सोशल मीडिया पर वायरल हुए तीन शिकायत पत्र दर्शाते हैं कि उसने पहले ही कहा था कि अगर मेरे साथ कुछ हुआ तो इसके लिए पुलिस जिम्मेदार होगी। इसके बावजूद न पुलिस विभाग और न ही गृह मंत्रालय ने कोई कदम उठाया। उसकी मौत के लिए सीएम देवेंद्र फडणवीस के अधीन गृह मंत्रालय भी दागी है।
