मध्य प्रदेश से सामने आई हृदयविदारक घटना
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भैरुंदा से एक दुखद घटना सामने आई है। एक पिता को अपनी नवजात बेटी का अंतिम संस्कार सड़क किनारे करना पड़ा। अस्पताल से घर तक शव ले जाने में किसी ने मदद नहीं की। इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को उजागर किया। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए दुखद है, बल्कि सरकारी दावों की सच्चाई भी सामने आई है।
बता दें कि भैरुंदा के संतोष जाट ने अपनी पत्नी ममता को अस्पताल में भर्ती कराया। ३० दिसंबर को भैरुंदा से रेफर किए जाने के बाद, २ जनवरी को ममता ने एक बेटी को जन्म दिया। घर में खुशियां छाईं, लेकिन नियति ने एक दुखद मोड़ लिया। संतोष जाट ने अस्पताल स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि इलाज में ढिलाई के कारण बच्ची की मौत हो गई। यदि समय पर इलाज मिलता तो उनकी बेटी बच सकती थी। मौत के बाद शव ले जाने के लिए कोई साधन नहीं मिला। संसाधनों के अभाव में उन्होंने सड़क किनारे शव का अंतिम संस्कार किया। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हुई है। हालांकि, इस पूरे मामले मे जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. यू.के. श्रीवास्तव ने पीड़ित के सभी आरोपों को नकारा है। उनका कहना है कि शिशु प्री-मैच्योर था और उसका वजन ९०० ग्राम था। डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची को गहन चिकित्सा दी गई थी, लेकिन स्थिति गंभीर थी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि एंबुलेंस की व्यवस्था की गई थी। परिजन ने खुद ही एंबुलेंस का उपयोग नहीं किया। परिजनों के हंगामे और स्टाफ के दुर्व्यवहार पर नोटिस जारी किया गया है।
अस्पताल स्टाफ पर कारण बताओ नोटिस जारी
परिजनों के द्वारा प्रसव के समय चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने एवं एस.एन.सी.यू. चिकित्सक एवं स्टाफ द्वारा उचित व्यवहार नहीं करने के लगाए गए आरोपों के संबंध में चिकित्सक एवं स्टाफ को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया था।
