विरमगाम / शंखेश्वर
जैन धर्म के सबसे बड़े तीर्थ पालीताणा में बारहों मास धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं। यहां से प्रतिदिन हजारों तीर्थयात्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ के दर्शन हेतु विभिन्न साधनों से रवाना होते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु रेल मार्ग से सोनगढ़ होते हुए विरमगाम उतरकर टैक्सी द्वारा शंखेश्वर पहुंचते हैं, किंतु यह यात्रा सुविधा के बजाय जोखिम, अव्यवस्था और शोषण का पर्याय बनती जा रही है।
पटरी पार करने को मजबूर यात्री, जान पर संकट
7 जनवरी, बुधवार की शाम भावनगर सुपरफास्ट एक्सप्रेस से सोनगढ़ से विरमगाम पहुंचे यात्रियों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ा। ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर आई, जबकि सभी टैक्सियां प्लेटफॉर्म नंबर 1 की ओर पटरी क्रॉसिंग फाटक के पास खड़ी थीं। प्लेटफॉर्म 2 से 1 पर जाने के लिए न तो लिफ्ट, न एलिवेटर और न ही सुरक्षित फुट ओवरब्रिज की समुचित सुविधा उपलब्ध है। परिणामस्वरूप सैकड़ों यात्रियों को अंधेरे में, लगातार ट्रेनों के आवागमन के बीच, रेल पटरियां पार करनी पड़ी। यह स्थिति किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
टैक्सी चालकों की मनमानी और भय का माहौल
विरमगाम से शंखेश्वर के लिए टैक्सी चालक 150 रुपये प्रति सवारी का नारा लगाते हुए एक-एक इको गाड़ी में 8-8 यात्रियों को भरकर विभिन्न धर्मशालाओं तक छोड़ते हैं, किंतु वापसी में यही चालक धर्मशालाओं से दूर, बस डिपो के पास टैक्सी स्टैंड पर खड़े होकर यात्रियों को मजबूर करते हैं।
गुरुवार शाम को ऐसी ही स्थिति में तीन बुजुर्ग महिलाएं एक घंटे से अधिक समय तक टैक्सी चालकों की दबंगई और धमकी भरे व्यवहार से भयभीत होकर खड़ी रही। उन्हें साझा टैक्सी में ले जाने से इनकार कर निजी वाहन का दबाव बनाया गया, जिससे उनके मन में असुरक्षा और अनहोनी का डर गहराता गया।
मिलीभगत और मनमाना किराया
टैक्सी चालकों की आपसी मिलीभगत इस कदर स्पष्ट थी कि तय किराया होने के बावजूद 200 रुपये प्रति सवारी की मांग की गई। चुनिंदा यात्रियों को ही ले जाने और अन्य को छोड़ देने जैसी शर्तें रखी गईं। अंततः काफी समझाइश के बाद आठ यात्रियों को लेकर टैक्सी रवाना हुई, परंतु रास्ते में वाहन खराब होने से स्थिति और गंभीर हो गई।
ट्रेन छूटी, मानवता ने निभाई जिम्मेदारी
वाहन खराबी और देरी के कारण तीन बुजुर्ग महिलाओं की सौराष्ट्र जनता एक्सप्रेस छूट गई। निराशा और भय की इस घड़ी में उन्हें भरोसा दिलाया गया कि अगली ट्रेन सौराष्ट्र मेल से उन्हें सुरक्षित मुंबई पहुँचाया जाएगा। रेलवे के टिकट निरीक्षक ने पूरे घटनाक्रम को सुनकर मानवीय आधार पर पूर्ण सहयोग दिया और महिलाएँ सकुशल मुंबई पहुंचीं। बोरीवली स्टेशन पर उन्होंने आशीर्वाद देते हुए विदाई ली।
प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग
यह घटना केवल एक व्यक्ति का अनुभव नहीं, बल्कि प्रतिदिन हजारों तीर्थयात्रियों की पीड़ा की झलक है। रेलवे प्रशासन से मांग है कि विरमगाम जैसे बड़े जंक्शन स्टेशन पर तत्काल लिफ्ट/एलिवेटर और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की जाए, ताकि यात्रियों को जान जोखिम में डालकर पटरियाँ पार न करनी पड़ें।
गुजरात यातायात पुलिस एवं परिवहन विभाग को विरमगाम टैक्सी स्टैंड पर टैक्सी चालकों की मनमानी, दादागिरी और किराया वसूली पर कठोर नियंत्रण करना चाहिए। शंखेश्वर तीर्थ प्रबंधन समिति से अपेक्षा है कि वह प्रशासन के साथ समन्वय कर यात्रियों के लिए सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करे तथा आवश्यक हो तो औपचारिक शिकायत दर्ज कराए।
यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो किसी दिन यह अव्यवस्था किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। तीर्थयात्रा श्रद्धा का विषय है, भय और शोषण का नहीं।
— भरतकुमार सोलंकी
