शीतल अवस्थी
हिन्दू धर्म पंचांग का सावन महीना भगवान शिव को समर्पित है। इसलिए इस माह की हर तिथि व दिन मंगलकारी माने गए हैं। खास तौर पर इस विशेष काल में सुबह हो या शाम शिव भक्ति धन, अन्न, संतान सुख व सौभाग्य बढ़ाने वाली मानी गई है। चूंकि शिव जगतगुरु माने जाते हैं, इसलिए सावन में शास्त्रोक्त विधान हो या कोई आसान उपाय, हर रूप में शिव भक्ति निरोगी बनाने के साथ ही सारे विघ्न भी दूर करने वाली सिद्ध होती है। शिव उपासना के महीनेभर की मंगलकारी घड़ी में कल्याणकारी देवता शिव के अद्भुत षड़ाक्षरी मंत्र स्तुति का स्मरण तमाम सफलताओं व सुखों को पाने के लिए असरदार माना गया है, जिसे शिव की पंचोपचार पूजा कर बोलना भी शुभ फलदायी माना गया है।
शाम को शिव की पंचोपचार पूजा दूध, गंध, अक्षत, धतूरा, बिल्वपत्र व नैवेद्य अर्पित कर करें। धूप व दीप लगाकर यहां बताए षड़ाक्षरी मंत्र यानी
ॐ नम: शिवाय
मंत्र की भी महिमा प्रकट करने वाले अद्भुत स्तोत्र का ध्यान कर शिव की आरती करें। यह शिव षड़ाक्षरी स्तोत्र के नाम से भी प्रसिद्ध है-
ॐकार बिन्दुसंयुक्तं नित्यं ध्यायंति योगिन:।
कामदं मोक्षदं चैव ॐकाराय नमो नम:।।
नमंति ऋषयो देवा नमन्त्यप्सरसां गणा:।
नरा नमंति देवेशं नकाराय नमो नम:।।
महादेव महात्मानं महाध्यानं परायणम्।
महापापहरं देव मकाराय नमो नम:।।
शिवं शातं जगन्ननाथं लोकानुग्रहकारकम्।
शिवमेकपदं नित्यं शिकाराय नमो नम:।।
वाहनं वृषभो यस्य वासुकि: कंठभूषणम्।
वामे शक्तिधरं वेदं वकाराय नमो नम:।।
यत्र तत्र स्थितो देव: सर्वव्यापी महेश्वर:।
यो गुरु: सर्वदेवानां यकाराय नमो नम:।।
षडक्षरमिदं स्तोत्रं य: पठेच्छिवसंन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते।।
