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गहरे संकट में राज्य का पर्यावरण!..कटाई-अतिक्रमण से हाल बदहाल…वन क्षेत्र में २ फीसदी की गिरावट…फॉरेस्ट मिनिस्टर ने किया स्वीकार

सामना संवाददाता / मुंबई

राज्य का पर्यावरण संकट में है। इसमें दिनोंदिन गिरावट आती जा रही है। केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार, किसी भी राज्य के भौगोलिक क्षेत्रफल का ३३ फीसदी हिस्सा वन क्षेत्र होना चाहिए, लेकिन महाराष्ट्र में यह आंकड़ा घटकर २१ फीसदी पर पहुंच चुका है। इसमें भी कटाई और अतिक्रमण की वजह से वन क्षेत्र लगातार घटता जा रहा है।
सरकार अब ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर रही है, जहां अतिक्रमण हुआ है और उन जमीनों को दोबारा वन क्षेत्र में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह वन क्षेत्र चरणबद्ध तरीके से २१ फीसदी से बढ़ाकर ३१ फीसदी तक ले जाया जाएगा। इस तरह का आश्वासन राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक ने दिया। वन मंत्री ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, महाराष्ट्र में वन क्षेत्र में दो फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) विधायक मिलिंद नार्वेकर ने प्रश्न पूछा था कि वन क्षेत्र घटने के क्या कारण हैं और इसे रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है? इसके जवाब में मंत्री ने यह जानकारी दी।
ताडोबा बाघ प्रकल्प क्षेत्र में बाघों की संख्या अधिक है। ये बाघ अब आस-पास के गांवों में रहने वाले लोगों पर हमला कर रहे हैं। इन हमलों में अब तक तीन महिलाओं की जान जा चुकी है और कई लोग घायल हुए हैं। इस पर कांग्रेस विधायक अभिजीत वंजारी ने विधानसभा में विशेष गश्त की मांग की। वन मंत्री ने जानकारी दी कि ताडोबा के गांवों में अब एआई आधारित वॉर्निंग सिस्टम लागू की गई है। जब भी बाघ किसी गांव के नजदीक आता है, तो लाउडस्पीकर के माध्यम से चेतावनी दी जाती है कि बाघ आसपास है। साथ ही सुबह सात बजे से पहले और शाम सात बजे के बाद जंगल में न जाने की सलाह ग्रामीणों को दी गई है। इसके अलावा जनप्रतिनिधि, पुलिस, वन विभाग और राजस्व विभाग के कर्मचारी मिलकर लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं।

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