भाजपा और शिंदे गुट के बीच नूरा कुश्ती चल रही है। चुनाव के बाद वे फिर से एक होंगे। आखिरकार सत्ता और दिल्ली का डर जो है। मेरे और राज के एक साथ आने के कारण, वे मुंबई–ठाणे में हमारे वोट बैंक को तोड़ने के लिए शिंदे का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी वजह से शिवसेना और हमारे चुनाव-चिह्न उसे दिए गए!
प्रदूषण की परेशानी सभी को हो रही है। इसमें महाराष्ट्र के लोग तो हैं ही, लेकिन जो यहां आकर बसे हैं और जो कई पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं, उनके भी स्वास्थ्य खराब हो चुके हैं। उन्हें भी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद अगर वे लोग सिर्फ हमारे विरोध में भाजपा को वोट देने के विचार में हैं तो उन्हें यह याद रखना चाहिए कि उन्हें बचाने भाजपा वाले नहीं आएंगे।- उद्धव ठाकरे
अब तेलंगाना और पंजाब में जिला परिषद के चुनाव हुए। वहां मतदान बैलेट पेपर से हुआ। तेलंगाना में भाजपा सातवें नंबर पर चली गई और पंजाब में चौथे नंबर पर। यह बैलेट पेपर से साबित हुआ ना, कर्नाटक में भी वही हुआ। बैलेट पेपर पर नतीजे भाजपा के पक्ष में नहीं आते।- राज ठाकरे
संजय राऊत – महेश मांजरेकर
ठाकरे बंधुओं के संयुक्त साक्षात्कार ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है। अब आगे ठाकरे बनाम ठाकरे नहीं, बल्कि ठाकरे + ठाकरे की जोड़ी देखने को मिलेगी। महाराष्ट्र का भविष्य तय करने वाले इस साक्षात्कार के दूसरे भाग में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने राज्य में बढ़ती राजनीतिक विकृतियों पर जोरदार हमला बोला। ठाकरे बंधुओं ने कहा कि मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की साजिश दिल्ली में चल रही है। इसलिए मुख्यमंत्री फडणवीस यहां क्या कहते हैं, इसका कोई महत्व नहीं है। ऊपर दो लोग बैठे हैं, जिनके मन में कुछ और ही चल रहा है। ठाकरे बंधुओं ने एक विनम्र लेकिन स्पष्ट अपील करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के होने के नाते हम सभी को अब एक साथ आना ही होगा। आपसी मतभेद और झगड़े खत्म करें। महाराष्ट्र से बड़ा कुछ भी नहीं है। उद्धव ठाकरे ने साफ शब्दों में कहा कि फडणवीस कहते हैं, ‘हम झोपड़पट्टी-मुक्त करेंगे।’ यानी मुंबई को अडानी-युक्त करेंगे। यही उनका मुंबई विकास मॉडल है। साथ ही ठाकरे बंधुओं ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि मुंबई का महापौर महाराष्ट्र का होगा और महाराष्ट्र का ही होगा। क्या महाराष्ट्र में हिंदू नहीं हैं?
फिल्म निर्देशक महेश मांजरेकर ने मुंबई के नागरिक मुद्दों पर ठाकरे बंधुओं से सवाल किए, जिससे मुंबई के विकास मॉडल की तस्वीर सामने आई। साक्षात्कार के दूसरे भाग की शुरुआत मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा दिए गए एक बयान से हुई।
संजय राऊत – हम लगातार कहते आ रहे हैं कि मुंबई को अलग कर दिया जाएगा, महाराष्ट्र टूटेगा, विदर्भ अलग होगा। लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने परसों दहाड़ते हुए कहा कि जब तक सूर्य-चंद्र रहेंगे, तब तक मैं मुंबई को महाराष्ट्र से अलग नहीं होने दूंगा। क्या आप इस पर विश्वास करते हैं?
राज ठाकरे – असल में उनके हाथ में कुछ भी नहीं है। इच्छा अच्छी हो सकती है, लेकिन उन्हें वही करना पड़ेगा जो ‘ऊपर’, यानी दिल्ली से कहा जाएगा। ऊपर से कहा गया कि यह जमीन अडानी को देनी है तो उनके सामने हस्ताक्षर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता। इसलिए ऊपर बैठे लोगों के मन में क्या है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। यहां के लोगों के मन में क्या है, इस पर कोई चर्चा ही नहीं होती। इसलिए उन्होंने चाहे सूर्य-चंद्र के कितने भी उदाहरण दिए हों, पहले हमें यह जानना जरूरी है कि ऊपर बैठे दो लोगों (मोदी-शाह) के मन में क्या है, और वह अब समझ में आ रहा है।
मुंबई को महाराष्ट्र से कोई
भी अलग नहीं कर सकता!

उद्धव ठाकरे – इसमें एक और मुद्दा है, मूल रूप से मुंबई को महाराष्ट्र से कोई भी अलग नहीं कर सकता, लेकिन जिस तरह से मुंबई की संस्कृति को खत्म किया जा रहा है, वह चिंताजनक है। कोई भी आकर कह देता है कि इस इलाके की भाषा गुजराती है। यानी हमारी पूरी अस्मिता और संस्कृति को खत्म करेंगे और केवल नाम के लिए मुंबई को महाराष्ट्र में रखेंगे। ऐसी बातों का कोई अर्थ नहीं है। जैसा राज ने कहा, ‘बैठो’ कहा तो बैठो और ‘उठो’ कहा तो उठो, ऐसे लोग हैं ये। ऐसे लोगों पर क्या भरोसा किया जाए?
संजय राऊत – मुंबई की जो लक्ष्मी हम कहते हैं।
उद्धव ठाकरे – वह कहां चली गई? किसके पास चली गई?
संजय राऊत – वह हमारे मराठी माणुस के हाथ में नहीं रही। मराठी आदमी कामगार, श्रमिक और संघर्षशील था। आज वह बाहर हो गया है और पूरी मुंबई की संपत्ति एक विशेष वर्ग के हाथों में चली गई है। उसे लगातार गुजरात ले जाने की कोशिश हो रही है। इसका मतलब यह है कि मुंबई में जमीन का टुकड़ा तो तुम्हारे पास रहेगा, लेकिन संपत्ति हमारे पास रहेगी।
उद्धव ठाकरे – मैं भी तो यही कह रहा हूं।
राज ठाकरे – इस पर मेरा थोड़ा अलग मत है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि अब हालात वैसे नहीं रहे। अब उन्हें मुंबई की जमीन भी चाहिए। यह मामला सिर्फ संपत्ति का नहीं है। अगर हम ठीक से देखें, तो संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के समय भी मुंबई के गैरमराठी धनाढ्य लोग यही मांग कर रहे थे कि मुंबई गुजरात को दी जाए। आज भी वही स्थिति है। तब अगर पांच लोग थे, तो आज पांच सौ हो गए हैं। और जिस तरह से केंद्र और राज्य सरकार के माध्यम से मुंबई में चीजें की जा रही हैं या करवाई जा रही हैं, वह खतरा मुझे सबसे ज्यादा लग रहा है। अब जो स्ट्रैटेजिकली मुंबई को तोड़ने की कोशिश चल रही है, उसे एमएमआर रीजन कहा जाता है। इस एमएमआर रीजन में किस तरह की गतिविधियां चल रही हैं, देखिए। वाढवन बंदरगाह के साथ हवाई अड्डा। आप हवाई अड्डा किसलिए ला रहे हैं?
संजय राऊत – किसलिए?
राज ठाकरे – उस दिन अपने एक भाषण में मैंने कहा था कि मुंबई के बाद नवी मुंबई में जो हवाई अड्डा बना है, मुंबई हवाई अड्डे का पूरा कार्गो वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा। अब इसकी शुरुआत हो चुकी है। आगे चलकर धीरे-धीरे मुंबई का डोमेस्टिक और इंटरनेशनल हवाई अड्डा भी नवी मुंबई में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। अभी का मुंबई का हवाई अड्डा अडानी के पास है।
वर्तमान हवाई अड्डे का क्षेत्रफल अगर आप देखें, तो उसमें कम से कम ५० शिवाजी पार्क मैदान समा सकते हैं। यानी कल को पूरा डोमेस्टिक और इंटरनेशनल हवाई अड्डा नई मुंबई में शिफ्ट करना और यहां के हवाई अड्डे की पूरी जमीन विकास के नाम पर बेच देना, यही उनका प्लान है।
संजय राऊत- क्या यह सब मोदी-शाह के सत्ता में होने की वजह से हो रहा है?
राज ठाकरे – उनके बाद ही तो हुआ है। मैं परसों किसी से इसी विषय पर बात कर रहा था। कारोबार में चोरी-चकारी तो सभी करते होंगे, लेकिन अडानी और अंबानी के बीच बड़ा फर्क यह है कि मोदी के बड़े बनने से पहले ही अंबानी बड़े उद्योगपति थे, जबकि अडानी, मोदी के सत्ता में आने के बाद ही बड़े बने हैं। अडानी का विस्तार मोदी के बड़े बनने के बाद ही हुआ है। जिस समय मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, उसी समय अडानी को मुंद्रा पोर्ट मिला और मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद तो अडानी को बहुत सी चीजें मिलीं।
मुझे हमेशा एक सवाल परेशान करता है। मैं भाजपा से यह सवाल पूछना चाहता हूं कि मान लीजिए वहां भाजपा की जगह कांग्रेस या किसी और पार्टी की सरकार होती, और केंद्र में बैठी उस सरकार ने अगर किसी एक ही उद्योगपति पर इतनी मेहरबानी की होती तो भाजपा किस तरह प्रतिक्रिया देती?
संजय राऊत – वे तो सड़कों पर उतरकर तांडव मचा देते।
राज ठाकरे – बिल्कुल सही। तो फिर आज जब यह सब हो रहा है, तब भाजपा के लोग मजबूर क्यों हैं? चुप क्यों हैं?
संजय राऊत – आपको क्या लगता है, वे मजबूर क्यों हैं?
राज ठाकरे – इसका कारण यह है कि उनके हाथ में कुछ भी नहीं है। ये सभी लोग मोदी द्वारा बैठाए गए हैं। समझे? जो लोग अपने स्वकर्तृत्व से ऊपर पहुंचे, उन्हें खत्म कर दिया गया। उदाहरण के लिए शिवराज सिंह चौहान हों, गडकरी हों, ऐसे एक-दो और लोग हैं। ये लोग इन्हें पसंद नहीं हैं।
पहले कांग्रेस के समय जो होता था, वही अब हो रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब इनका उद्देश्य हर हाल में पूरा होना चाहिए, बस। लेकिन एक बात मैं जरूर कहना चाहता हूं। कांग्रेस के समय जो प्रधानमंत्री होते थे, उन पर किसी राज्य का ठप्पा नहीं होता था। ये पहली बार ऐसे पीएम बैठे हैं, जिन पर किसी एक राज्य का लेबल लगा हुआ है।
संजय राऊत – प्रधानमंत्री गुजरात के हैं। गृह मंत्री भी गुजरात के हैं।
राज ठाकरे – जिस तरह से उनका ध्यान मुंबई और एमएमआर क्षेत्र पर है, उसे देखते हुए यह खतरा सबसे ज्यादा है। पिछले ५०–६० वर्षों में आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ, जो अब हो रहा है।
संजय राऊत – उद्धव साहेब, यह खतरा तो है ही और हम उस खतरे से लड़ भी रहे हैं!
उद्धव ठाकरे – एक बात ध्यान में रखिए कि संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के दौरान महाराष्ट्र के लोगों पर गाेलियां चलवाने वाला मोरारजी देसाई हिंदू था या नहीं? जब महाराष्ट्र सड़कों पर उतरा था, तब मोरारजी देसाई ने पुलिस से कहा था कि तुम्हें इन लोगों को मारने के लिए गोलियां दी गई हैं, उन्हें व्यर्थ मत जाने दो। उसी से १०७ शहीद हुए, जो रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
संजय राऊत – गोलियों का हिसाब मांगा गया था…
उद्धव ठाकरे – हां, गोलियों का हिसाब मांगा गया था। तो फिर मोरारजी देसाई, जो गुजरात में जन्मे, हिंदू थे या नहीं? और महाराष्ट्र का आदमी हिंदू है या नहीं, यह देवेंद्र फडणवीस को बताना चाहिए। जिस समय मोदी को अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिक रूप से किनारे कर रहे थे, तब उन्हें बचाने वाले ‘हिंदूहृदयसम्राट’ शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे एक खरे मराठी आदमी थे इसलिए भाजपा ने हिंदू और महाराष्ट्र के बीच जो भ्रम पैदा करने की कोशिश शुरू की है, उसे पहले बंद करना चाहिए।
और देवेंद्र फडणवीस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि महाराष्ट्र के आदमी और हिंदू का अर्थ क्या है, क्योंकि महाराष्ट्र का आदमी हिंदू ही है।
संजय राऊत – राज साहेब, यह विषय अत्यंत गंभीर है। कभी महाराष्ट्र देश का ग्रोथ तेजी से हुआ करता था। मोदी और शाह के आने के बाद महाराष्ट्र पिछड़ गया और उन्होंने गुजरात को ग्रोथ इंजन बनाने की कोशिश की।
उद्धव ठाकरे – पिछड़ा नहीं, बल्कि महाराष्ट्र को जानबूझकर पीछे धकेला गया।
संजय राऊत – क्या यह महाराष्ट्र से बदला लेने की कोशिश है?
उद्धव ठाकरे – इसके अलावा और क्या कहा जा सकता है?
राज ठाकरे – मैंने कहा ही था, यह एक पुराना घाव है। उस समय मुंबई हाथ नहीं लगी, इसलिए यह सब चल रहा है। मैं हमेशा कहता हूं कि भूगोल के बिना इतिहास नहीं होता है।
राज ठाकरे – अगर आप मुंबई के भूगोल को ठीक से देखें, तो समझ में आएगा कि बुलेट ट्रेन आखिर कहां से कहां जा रही है। मैंने उस समय भी इस बुलेट ट्रेन का विरोध किया था और आज भी मेरा विरोध कायम है।
उद्धव ठाकरे – सबने ही इसका विरोध किया था।
राज ठाकरे – यह बुलेट ट्रेन जहां से अमदाबाद की ओर जाने वाली है। ठाणे, पालघर का जो पूरा इलाका है। वह पूरा पट्टा सीधे गुजरात से सटा हुआ है।
संजय राऊत – गुजरात की सीमा है वह।
राज ठाकरे – बिलकुल, अगर आप एमएमआर (मुंबई महानगर क्षेत्र) को ठीक से देखें तो आपको समझ में आ जाएगा। जब मैंने पिछले एक साल में इन सब बातों को गहराई से देखना शुरू किया, तब मुझे सबसे बड़ा खतरा दिखाई देने लगा।
उद्धव ठाकरे – महाराष्ट्र में पालघर के दो गांवों पर भी अब वे अपना अधिकार जताने लगे हैं।
संजय राऊत – सूरत से अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी को पैसे भेजे जाते थे इसलिए छत्रपति शिवाजी महाराज ने उस समय सूरत को लूटा था। उस बात का गुस्सा आज भी उनके मन में है। क्या उसी का बदला लेने के लिए वे आज मुंबई को लूट रहे हैं? मुझे तो ऐसा पता चला है कि मौजूदा सरकार में जो राज्य के उप मुख्यमंत्री हैं, वे जब दिल्ली जाते हैं तो बड़ी-बड़ी थैलियां लेकर जाते हैं। जब तक दिल्ली वालों को वे थैलियां मिलती रहेंगी, तब तक वे ‘उप’ सत्ता में बने रहेंगे। यह थैलियों की राजनीति मुंबई से कई वर्षों से चल रही है। यानी क्या कांग्रेस के समय से ही मुंबई सिर्फ थैलियां देने के लिए ही बनाई गई थी? और अब तो उन थैलियों का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। क्या दिल्ली तक लगातार थैलियां पहुंचाना ही मुंबई का महत्व है?
उद्धव ठाकरे – उनके लिए वही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। हम मुंबई को अपना शहर मानते हैं। मुंबई का नाम मुंबादेवी से पड़ा है, यह सभी जानते हैं। लेकिन वे मुंबई को सोने का अंडा देने वाली मुर्गी के रूप में देखते हैं। और अब वे उसी मुर्गी को काटने पर उतर आए हैं।
संजय राऊत – अगर उन्होंने उस मुर्गी को काट दिया तो जैन समाज के लोग क्या करेंगे? उन्हें तो कबूतर मुर्गियां…
राज ठाकरे – वे पंख लगाकर घूमेंगे।
संजय राऊत – क्योंकि मुंबई के लिए यह अत्यंत गंभीर सवाल है।
राज ठाकरे – मुझे ऐसा लगता है कि महाराष्ट्र में हमारे जो विरोधी हैं, और महाराष्ट्र के हर राजनीतिक दल के नेता हैं, उन्हें इन बातों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। सत्ता के लिए आपसे कुछ काम करवाए जा रहे हैं। महाराष्ट्र के हर दल के नेताओं को इस पर सोचना चाहिए। ऊपर से लेकर नीचे तक कि हम आखिर कर क्या रहे हैं? अगर आज यह समझ में नहीं आया कि हम क्या कर रहे हैं और आगे क्या कर बैठेंगे तो बाद में हर किसी को सिर्फ पछतावे के अलावा कुछ हाथ नहीं लगेगा।
संजय राऊत – उस समय चिंतामणराव देशमुख खड़े हुए थे और उन्होंने केंद्र से चिंगारी भड़काई थी। आज चिंतामणराव कौन बनेगा?
उद्धव ठाकरे – भाजपा में जो मराठी लोग केंद्र में मंत्री या सांसद के रूप में बैठे हैं, उन्हें चिंतामणराव देशमुख के आदर्श को अपनाना चाहिए।
संजय राऊत – वे सब तो चाटम हैं, है न?
उद्धव ठाकरे – मैं भी वही कह रहा हूं। आज जो लोग घोटाले करने वालों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बैठे हैं, वे भला चिंतामणराव वैâसे बनेंगे?
संजय राऊत – एक आरोप हमेशा लगाया जाता है कि ठाकरे विकास पर बात नहीं करते…
उद्धव ठाकरे – तो फिर किस पर बात करते हैं?
…याद रखिए भाजपा
वाले बचाने नहीं आएंगे

संजय राऊत – कहा जाता है कि उद्धव ठाकरे ने जो काम नहीं किया, उसका भी श्रेय लेते हैं। ऐसे कौन-से काम हैं, जिनका आप बिना किए श्रेय लेते हैं?
उद्धव ठाकरे – बिना किए काम? जैसे नोटबंदी, परसों आदित्य ने कहा कि रुपए का मूल्य लगातार गिर रहा है। उसका श्रेय हम नहीं लेते, ड्रग्स के कारखाने चलाने वाले किसके पक्ष में हैं, यह देखिए, उसका श्रेय भी हम नहीं लेते। उनके जो भी कुकर्म हैं, उनका श्रेय हम नहीं लेते। जो काम हमने किए हैं, उन्हें हमने पूरे दमखम के साथ करके दिखाया है। कोस्टल रोड हो, स्कूल हों, अस्पताल हों, कोरोना काल में किया गया काम हो। मुंबई मॉडल, जिसकी पूरे विश्व में सराहना हुई।
संजय राऊत – लेकिन ‘मुंबई मॉडल’ की पुस्तिका पर तो चुनाव आयोग ने रोक लगा दी।
उद्धव ठाकरे – मुझे चुनाव आयोग की उस रोक की परवाह नहीं है, क्योंकि उस समय चुनाव आयोग के लोग जीवित रहे इसलिए आज वे ऐसा कुछ कर पा रहे हैं। अगर वे भी कोरोना में चले गए होते तो? मुझे एक बात बताइए, जब हम कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे थे, तब गंगा में क्या हाल था? गुजरात में क्या स्थिति थी? चीन ने पंद्रह दिनों में फील्ड अस्पताल बनाया। हमने मुंबई में अठारह दिनों में फील्ड अस्पताल बनाकर दिखाया। ऐसे कितने ही काम हैं। मैंने तो उन पर एक पूरी पुस्तिका ही बनाई है। आप कहेंगे कि उस पुस्तिका पर प्रतिबंध है तो मैं उस प्रतिबंध को नहीं मानता। चुनाव आयोग को जो करना है, करने दीजिए, क्योंकि लोकसभा चुनाव में हमारे गीतों से ‘जय भवानी’, ‘जय शिवाजी’ जैसे शब्द हटाने को कहा गया। उस पर आपत्ति जताई गई। और अब ये हमें हिंदुत्व सिखाएंगे?
संजय राऊत – और वे कहते हैं कि आपने हिंदुत्व छोड़ दिया है?
उद्धव ठाकरे – लेकिन मैंने वह नहीं माना। चुनाव आयोग क्या कर लेगा? कोरोना काल में जो कुछ हमने किया, वह हमने चुनाव आयोग की अनुमति से नहीं किया था।
संजय राऊत – आपके घोषणा-पत्र में कुछ बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। अब यह संयुक्त घोषणा-पत्र है। कल देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हम मुंबई को झोपड़पट्टी-मुक्त करेंगे।
उद्धव ठाकरे – यानी वास्तव में वे क्या करेंगे? अडानी-युक्त करेंगे? आज धारावी में जो चल रहा है, वह बेहद भयावह है। पात्र–अपात्र का खेल खेलकर धारावी के नाम पर आधी से ज्यादा मुंबई अडानी की झोली में डाल दी गई है, यह कहना गलत नहीं होगा। मुलुंड से शुरुआत होती है, कांजुर की सॉल्ट जमीनें दी गईं, दहिसर की सॉल्ट जमीनें दी गईं, कुर्ला की मदर डेयरी दी गई। मुंबई की सारी झोपड़पट्टियां उधर शिफ्ट करनी हैं और धारावी में बड़े-बड़े टॉवर खड़े करने हैं।
संजय राऊत – तो फिर हमारे पास क्या बचेगा?
उद्धव ठाकरे – एक बात हमारे ध्यान में नहीं आई कि धारावी के ठीक बगल में अमदाबाद जाने वाली बुलेट ट्रेन का स्टेशन वैâसे? यानी वहां कौन रहने वाला है?
राज ठाकरे – यही तो मैं कह रहा हूं।
उद्धव ठाकरे – इतनी दूरदृष्टि से वे यह सब कर रहे हैं। झोपड़पट्टी-मुक्त का मतलब है अडानी-युक्त करना। जैसे ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ करते-करते देश ‘कांग्रेस-युक्त भाजपा’ हो गया। वैसा ही यह भी है।
संजय राऊत – आपके घोषणा-पत्र में तीन बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। और भी कई हैं। पांच वर्षों में हम एक लाख सस्ते घर देंगे…
उद्धव ठाकरे – हां। साथ में घोषणा-पत्र भी लाया हूं, लेकिन उससे पहले जो लोग कहते हैं कि विकास पर बात कीजिए, उनसे मैं पूछता हूं कि क्या हमने कोस्टल रोड बनाकर नहीं दिखाया? शिवसेनाप्रमुख के नाम पर मुंबईकरों के लिए एक बांध बनाकर नहीं दिखाया? ५०० वर्ग फुट तक का प्रॉपर्टी टैक्स हमने माफ करके नहीं दिखाया? बेस्ट की सेवाएं और स्कूल हमने सुधारे या नहीं?
संजय राऊत – कई काम हैं। अटल सेतु का काम तो कांग्रेस के समय में शुरू हुआ था।
उद्धव ठाकरे – पहला गर्डर मैंने मुख्यमंत्री रहते हुए डाला था और उस काम को रुकने नहीं दिया।
संजय राऊत – विलासराव देशमुख के नाम पर जो पूरा प्रâीवे है, वह कांग्रेस के समय में बना। मेट्रो की आधारशिला भी मनमोहन सिंह ने रखी थी।
उद्धव ठाकरे – मनमोहन सिंह मुंबई को आर्थिक केंद्र बनाने वाले थे। उस योजना को भी मोदी–शाह गुजरात ले गए।
संजय राऊत – घोषणा-पत्र में एक लाख सस्ते घर देने की योजना है। आप घरेलू काम करने वाली महिलाओं को १,५०० रुपए देंगे। यानी यह आपकी ‘लाडकी बहन’ योजना ही है। सरकार १,५०० दे रही है, आप भी १,५०० दे रहे हैं…
उद्धव ठाकरे – हो सकता है, लेकिन अगर हम बहनों का ख्याल रखें तो आपको क्या समस्या है?
राज ठाकरे – मुझे एक बात समझ में नहीं आती है कि अगर योजनाएं अच्छी हैं तो हमारे पास केंद्र है। हमारे पास राज्य है। यह वैâसी अकड़ है? क्यों इतना अकड़ना?
संजय राऊत – यह अकड़ ही है…
राज ठाकरे – अगर योजनाएं अच्छी हैं तो उन्हें सबको मिलकर करना चाहिए।
संजय राऊत – इस बीच आपने एक जरूरी बात कही थी कि भाजपा को मोदी और पैसों की मस्ती चढ़ गई है।
राज ठाकरे – हां, उनके पास मोदी और ईवीएम हैं। जब हम बच्चे थे तो हम सब पत्तों के घर बनाते थे। अगर आप उन्हें भी देखें तो उनका भी पत्तों का घर है, लेकिन वो उल्टा है। नीचे का पत्ता नरेंद्र मोदी का है और जो भी बात कर रहे हैं वे सब नरेंद्र मोदी के बल पर ही बोल रहे हैं। आज भाजपा को जो भी वोट मिल रहे हैं, वे सिर्फ नरेंद्र मोदी के नाम पर ही मिल रहे हैं। किसी और के नाम पर नहीं।
महेश मांजरेकर – मेरे दो-तीन सवाल हैं। मान लीजिए अगर मुझे या मेरे परिवार वालों को कोई दिक्कत हुई तो मैं हिंदुजा हॉस्पिटल चला जाऊंगा। मैं कहीं और चला जाऊंगा। यहां इतने हॉस्पिटल हैं मनपा के…
राज ठाकरे – (बात काटते हुए) मैं इस टॉपिक पर आता हूं। थोड़ा और महत्वपूर्ण बात करता हूं। अगर आपको इन सब बातों का या इस प्रॉब्लम का जवाब चाहिए, जिसे हम ‘जर्म’ कहते हैं, वो है इस शहर में आने वाली फालतू भीड़। आपके प्लान कितने भी अच्छे क्यों न हों, जब ये भीड़ आती है तो आपके सारे प्लान खराब हो जाते हैं। अगर आप अच्छी सड़कें बनाते हैं तो उन पर एक्स्ट्रा कारें आएंगी, क्योंकि भीड़ ज्यादा आती है। बिल्डिंग्स बनती रहती हैं। एक सिंपल बात ध्यान में रखते हैं, जिस तरह से मुंबई में या हर जगह रीडेवलपमेंट हो रहे हैं, पहले एक बिल्डिंग में २० लोग रहते थे, अब वहां २००-४०० लोग रहने आ गए हैं। जगह उतनी ही है। जब किसी शहर में ज्यादा से ज्यादा लोग आते हैं तो वहां की व्यवस्था टूट जाती है इसलिए रोक भीड़ पर लगानी चाहिए।
महेश मांजरेकर – मेरा सवाल यही है कि भीड़ कैसे कम करें?
राज ठाकरे – अगर आप ऐसा बोलते हैं तो आपको मुंबई और महाराष्ट्र में कहा जाता है कि इस देश में कोई भी इंसान कहीं भी जा सकता है और कहीं भी रह सकता है। दूसरे राज्यों में ऐसा नहीं होता। दूसरे राज्यों में लोग अपने यहां आने वाले लोगों को कंट्रोल करते हैं। हमारे यहां अपने ही लोग कहते हैं कि कोई भी कहीं भी रह सकता है।
संजय राऊत – अब मुंबई और ऊंची होती जा रही है…
महेश मांजरेकर – एक कैलेमिटी या एपिडेमिक मुंबई को बचा सकती है?
राज ठाकरे – दुर्भाग्य है वो, लेकिन सवाल ऐसा है कि जब तक भीड़ आती रहेगी, तब तक आप कितनी भी योजनाएं बनाएं वे गड़बड़ाती रहेंगी। आपने अभी-अभी कहा था कि लोग फुटपाथ पर रहते हैं। आप कितनी भी बार फुटपाथ साफ कर लें, वह भरता रहेगा…
महेश मांजरेकर – मुंबई में पार्किंग एक बड़ी समस्या है, एक आम मुंबईकर के तौर पर, मैं आपको बता रहा हूं। अगर मैं अपनी कार सड़क पर पार्क करता हूं तो आपको मुझसे पार्किंग का चार्ज लेने का कोई अधिकार नहीं है। मुझे कोई जगह दिखाओ, मैं वहां पार्क कर दूंगा।
राज ठाकरे – लगभग चार-पांच महीने हो गए हैं, मैं एक योजना लेकर मुख्यमंत्री से मिला था। यह एक पार्किंग प्लान था। एक बहुत ही साधारण सरल योजना। उसमें, मैंने उनसे कुछ महत्वपूर्ण मैदान चिह्नित करने के लिए कहा। उस पर उन्होंने तुरंत मुझसे कहा कि एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हम मुंबई में एक और उपनगर में दो, मैदान के नीचे ५०० से १,००० कारें पार्क हों सके, ऐसी पार्किंग लॉट तैयार करेंगे। दूसरी योजना फुटपाथ को पीला और काला रंग करने का है, ताकि वहां पार्किंग की जा सके। और अगर फुटपाथ के पत्थरों को काला और लाल रंग से रंग दिया जाए तो पार्किंग नहीं होगी। अलग से बोर्ड लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ये आसान बातें हैं। फडणवीस ने मुझसे कहा था कि वो एक महीने के अंदर तुरंत कर देंगे। लेकिन कुछ नहीं हुआ।
महेश मांजरेकर – मैं भी यही कह रहा हूं, मैंने कैलकुलेशन किया है कि मुंबई में लगभग ५१ लाख कारें हैं। हर कार एवरेज ६ फुट जगह घेरती है। ट्रक हैं, टेंपो हैं। अगर उन्हें बंपर टू बंपर खड़ा किया जाए, तो यहां से लंदन और वापस, इन कारों की १,००० किलोमीटर लंबी लाइन लग जाएगी। उन गाड़ियों के ऊपर से प्लेन से सफर करने में नौ घंटे लगेंगे।
राज ठाकरे – मैं यही कह रहा हूं, एक शासक के तौर पर इन सब चीजों पर कोई कंट्रोल ही नहीं है। मैंने एक बार कहा था कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनने चाहिए। वे बने भी। लेकिन मुझे बुरा लगता है कि एक आदमी को इतना बहुमत देने के बाद भी कुछ नहीं हुआ। जब टाउन प्लानिंग या उससे जुड़े सभी सिस्टम हाथ में हैं तो किसी राज्य या देश में इन मुद्दों पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है? हर छह महीने में चुनाव होते हैं। फिर वे यहां बात करते हैं। छह महीने बाद, जब कहीं और चुनाव होते हैं तो वे वहां बात करते हैं। मुझे लगा कि वे जरूरी मुद्दों पर कुछ करेंगे, लेकिन उनका ध्यान असली मुद्दों पर है ही नहीं इसीलिए उनसे नीचे के लोगों का भी कोई ध्यान नहीं है। उन्हें तो बस चुनाव देखना है, लोगों को चुराना है और पैसे बांटने हैं। बस इतना ही चल रहा है। उनका ही वाक्य था, महाराष्ट्र को कहां ले जाकर रख दिया? क्या महाराष्ट्र ऐसा था? लोगों की छोटी-छोटी जरूरतें और छोटी-छोटी उम्मीदें हैं। लेकिन बढ़ती भीड़ के चलते योजनाएं और मुंबई का अस्तित्व ही खत्म…
महेश मांजरेकर – यहां रहने वाले लोग खत्म हो रहे हैं। योजनाएं तो छोड़ दें।
उद्धव ठाकरे – तुमने ये बात उठाई थी, उसकी तकलीफ मैं अभी झेल रहा हूं। ये सब बातें मुंबईकरों को सोचनी चाहिए। हम मराठी हैं, लेकिन जो पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं, वे भी तकलीफ में हैं। वे भी बीमारी से परेशान हैं और फिर भी अगर वे लोग हमारे खिलाफ भाजपा को वोट देने वाले हैं सिर्फ इसलिए कि हमें यहां के लोगों की फिक्र है तो उन्हें याद रखना चाहिए कि भाजपा वाले उन्हें बचाने नहीं आएंगे।
राज ठाकरे – इसका एक ही सॉल्यूशन है वो ये कि समाज को जगाना होगा। अगर वो गलत हैं, तो उन्हें माफ मत करो। अगर हम गलत हैं तो हमें माफ मत करो, क्या वोटिंग इस आधार पर होगी कि कौन सही काम कर रहा है या नहीं? और अगर आप ऐसे लोगों को वोट देते रहेंगे, जो गलत काम कर रहे हैं तो उनको उनकी गलतियों का कभी पता नहीं चलेगा।
उद्धव ठाकरे – कल को बचाने कोई नहीं आएगा।
राज ठाकरे – कौन आएगा?
महेश मांजरेकर – हम कहते हैं कि मुंबई को डेवलप करो, लेकिन मुंबई में उतनी वैâपेसिटी नहीं बची है। मुंबई को डेवलप करने के बजाय, एफएसआई बढ़ाने के बजाय, जो पैâसिलिटी हैं, उन्हें बेहतर बनाओ। ट्रेन कहो, मेट्रो कहो, जब हम बच्चे थे तो देखते थे कि अगर कोई झोपड़पट्टी बनती थी, तो म्युनिसिपैलिटी तुरंत आकर उसे तोड़ देती थी। आज उन्हें यह भी पता है कि अगर मैं झोपड़पट्टी बनाता हूं, तो यहां जो भी टावर बनेगा, उसमें मुझे जगह जरूर मिलेगी। यही प्रॉब्लम है।
राज ठाकरे – मैं भी यही बात कहता रहता हूं। मेट्रो, रेलवे, मोनोरेल जैसी सुविधाएं शुरू करने से पहले आपको सबसे पहले गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगानी चाहिए।
दिखाने का समय आ गया, महाराष्ट्र लाचार नहीं है!

महेश मांजरेकर – अगर गाड़ी लेनी है तो लीजिए, लेकिन हर घर में सिर्फ एक ही गाड़ी हो, ऐसा कीजिए!
राज ठाकरे – इसमें आप, हम सब शामिल हैं। गाड़ियों को लेकर एक कानून बनाइए। सब मान लेंगे। इसमें क्या समस्या है?
महेश मांजरेकर – जितनी रजिस्टर्ड रिक्शाएं हैं, उतनी ही अवैध भी हैं।
राज ठाकरे – दस साल पहले मैंने अवैध टैक्सी और रिक्शाओं के खिलाफ आंदोलन किया था। चार हजार अवैध रिक्शााएं हटवाई गई थीं। बेशक, सरकार ने ही उन्हें पकड़ा था। करीब दो हजार अवैध टैक्सियां भी डिसमेंटल करवाई गई थीं। यह सब मैंने सरकार से कहकर करवाया था। उस समय शायद कांग्रेस की सत्ता थी।
उद्धव ठाकरे – इसीलिए मैं कहता हूं। अब तक हमने जो काम किए हैं, वे लोगों के सामने हैं। आगे क्या करने वाले हैं, वह भी हमने लोगों के सामने रख दिया है। अब लोगों को तय करना चाहिए कि उन्हें कल क्या चाहिए। हम पूरे मन से बोल रहे हैं, मुद्दे रख रहे हैं, लेकिन सत्ताधारियों की तरफ से सिर्फ आरोप ही लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कौन-से काम किए हैं? न उन्होंने नेता तैयार किए, न काम किए। बस दूसरों के काम उठाकर अपने नाम का प्लेट लगा दिया। यही किया है। शिवसेनाप्रमुख की जो मूर्ति हमने बनवाई, उसका भी श्रेय ये ले रहे हैं। अरे, फिर आप पैदा ही क्यों हुए और सत्ता में बैठने का मतलब क्या है? क्या सिर्फ चुनाव आते ही जाति-जाति और धर्म-धर्म के नाम पर लड़ाइयां करवानी हैं और लोग तुम्हारे अंधेपन में वोट डालें, यही अपेक्षा है?
संजय राऊत – अंधभक्त हैं न? हिंदुत्व आखिर है क्या? अंधभक्त पैदा करना। क्या यही उनका हिंदुत्व है?
राज ठाकरे – अब मुझे ईमानदारी से लगता है कि जो यह बेलगाम अराजकता चल रही है, उसे अगर कुछ हद तक रोकना है, उस पर अंकुश लगाना है तो मुंबई, ठाणे और पूरे एमएमआर क्षेत्र की मनपाओं में हमारी सत्ता आनी जरूरी है। मैं सत्ता के लिए नहीं बोल रहा हूं, लेकिन अगर इन सब बातों पर रोक नहीं लगी और अगर कल ये तीनों चीजें हाथ से निकल गईं तो फिर आप किसी की ओर देख भी नहीं पाएंगे।
संजय राऊत – सात साल बाद चुनाव हो रहे हैं, लेकिन वे भी सीधे और निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रहे हैं। धमकियां, दहशत, पैसों से लोगों को खरीदना आखिर यह सब क्या है?
राज ठाकरे – अरे, मैं तो यही कह रहा हूं। वे कहते हैं कि हमने विकास किया है। फिर आपको धमकियां क्यों देनी पड़ रही हैं? पैसे क्यों इस्तेमाल करने पड़ रहे हैं? उम्मीदवारों से नामांकन वापस क्यों करवाए जा रहे हैं? जब आप कहते हैं कि विकास किया है तो विकास पर ही बात कीजिए।
संजय राऊत – उद्धव साहेब, राज साहेब, इस मुंबई में कई नेता मनपा से बड़े बने हैं। जॉर्ज फर्नांडिस से लेकर अहिल्या रंगनेकर, मृणालताई गोरे या फिर हमारी शिवसेना के मनोहर जोशी तक…
उद्धव ठाकरे – मनोहर जोशी तो लोकसभा अध्यक्ष भी बने थे।
संजय राऊत – इन अच्छे लोगों के समय कभी भी निर्विरोध चुनाव नहीं हुए। फिर आज ऐसा क्या हो गया है कि ७० लोग निर्विरोध चुने जा रहे हैं?
उद्धव ठाकरे – मनोहर जोशी लोकसभा अध्यक्ष बनने के बाद कभी भी शिवसेना उम्मीदवार के प्रचार में या नामांकन भरने नहीं गए थे। जैसे आज के विधानसभा अध्यक्ष करते हैं। इनमें बहुत बड़ा फर्क है।
संजय राऊत – ७० जगहों पर निर्विरोध, बैरिस्टर नाथ पै. भी कभी निर्विरोध नहीं चुने गए। उत्तर प्रदेश में राम मनोहर लोहिया या अटल बिहारी वाजपेयी भी कभी निर्विरोध नहीं आए। मोदी निर्विरोध नहीं आए, अमित शाह भी निर्विरोध नहीं आए। लेकिन महाराष्ट्र में ७० लोग निर्विरोध चुन लिए जाते हैं। इसका आप मुकाबला कैसे करेंगे?
राज ठाकरे – देखिए, बाकी सभी बातों से आप लड़ सकते हैं, उनका सामना कर सकते हैं, विरोध कर सकते हैं। लेकिन समाज के कुछ वर्गों में जो नैतिक और सामाजिक पतन हो गया है, उसका क्या किया जाए। यह सबसे बड़ा सवाल है।
संजय राऊत – क्या यह पतन महाराष्ट्र में हुआ है?
राज ठाकरे – यही तो दुर्भाग्य है। यह हो चुका है। और सच्चाई भी यही है।
संजय राऊत – अजीत पवार भाजपा के साथ हैं। उनका अधिकृत गठबंधन है, फिर भी वे पुणे और पिंपरी–चिंचवड़ में अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने भाजपा के भ्रष्टाचार पर जोरदार हमला किया है। उनका कहना है कि भाजपा में घमंड आ गया है, जैसा आप कह रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि भाजपा ने भारी भ्रष्टाचार किया है। वे यह भी कहते हैं कि भाजपा में नैतिकता नहीं है।
उद्धव ठाकरे – मुझे लगता है कि यह उनकी दिखावटी कुश्ती है। यानी एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहना और विपक्ष को कोई जगह ही न देना। चुनाव जीतने के बाद फिर से एक साथ ही आ जाना है। अभी हम दोनों साथ आए हैं, इसलिए मुंबई और ठाणे में महाराष्ट्र के वोटों को तोड़ने के लिए वे ‘शिंदे’ का इस्तेमाल कर रहे हैं। शिंदे का उपयोग इसी उद्देश्य से किया जा रहा है। इसलिए उसे शिवसेना और हमारा चुनाव-चिह्न दिया गया है। महाराष्ट्र में भ्रम पैदा करना, उनमें फूट डालना, लोगों को बांटना। यही शिंदे को सौंपा गया काम है और वही काम शिंदे कर रहा है।
संजय राऊत – लेकिन आप दोनों भाइयों के एक साथ आने से वह काम असफल हो गया है…
उद्धव ठाकरे – हां, वह असफल हो गया है। लेकिन लोगों को उसे और भी ज्यादा असफल करना चाहिए।
संजय राऊत – एक और बहुत गंभीर सवाल यह है कि इस चुनाव में बगावतें, झगड़े, मारपीट, हत्याएं, एबी फॉर्म छीनना और निगल जाना यहां तक की घटनाएं सामने आई हैं, जो पहले कभी न देखी गर्ईं।
राज ठाकरे – इसका कारण है कि अगर समय पर चुनाव हो गए होते तो यह तस्वीर इतनी भयावह नहीं होती। ये सात साल तक सब कुछ रुका रहा। अब होंगे, अब होंगे, अब होंगे और इसी उम्मीद में हर त्योहार पर इच्छुक उम्मीदवार जो पैसे बांटते रहे, उसी का यह विस्फोट है।
संजय राऊत – यानी बगावत का एक तरह से रिकॉर्ड ही बन गया। पहले के राजनीतिक दौर में चुनाव नेताओं को तैयार करने की एक प्रक्रिया हुआ करती थी।
उद्धव ठाकरे – अब नेताओं को बिगाड़ने की प्रक्रिया चल रही है।
संजय राऊत – अब भाजपा को नेताओं को तोड़कर लाना पड़ता है। दुनिया की सबसे बड़ी अंतर्राष्ट्रीय पार्टी होने का दावा करने वाली पार्टी!
उद्धव ठाकरे – मैंने लोकसभा चुनाव के समय कहा था कि भाजपा जैसा बांझ दल देश की राजनीति में नहीं है। इस पार्टी से राजनीति में बच्चे पैदा नहीं होते। उसका पाप ये हमारे ऊपर डालते हैं और हमारी राजनीति के बच्चों को ये चुरा ले जाते हैं।
संजय राऊत – तो अब इन बच्चों पर आप वैâसे नियंत्रण रखेंगे?
उद्धव ठाकरे – उसकी जरूरत नहीं है। हमारे यहां बच्चे मतलब तैयार हो रहे हैं।
संजय राऊत – प्रक्रिया तो जारी ही है यानी आपकी तरफ से कोई पाबंदी नहीं है।
उद्धव ठाकरे – मोहन भागवत ने कहा है न।
संजय राऊत – यानी आप हिंदुत्व का पालन कर रहे हैं?
उद्धव ठाकरे – हम उनकी बात सुन रहे हैं।
संजय राऊत – दूसरी बात यह है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी के भीतर ही बगावत हुई है। भाजपा से लोग बाहर गए हैं।
उद्धव ठाकरे – जैसा राज ने थोड़ी देर पहले कहा, वैसे ही उनके ताश का महल गिरने लगा है। एक दिन वह ताश का महल पूरी तरह ढह जाएगा।
राज ठाकरे – कहानी लेखक सलीम खान हैं न, उन्होंने मुझे एक बार बहुत अच्छी बात कही थी। उन्होंने कहा था कि हर एक पैकेट पर एक्सपायरी डेट लिखी होती है। भाजपा की भी एक्सपायरी डेट जरूर होगी।
संजय राऊत – हर चीज का अंत होता है। जैसा आपने कहा कि कोई भी सत्ता का अमरपट्टा लेकर नहीं आता
राज ठाकरे – लोकतंत्र के देश में।
संजय राऊत – क्या लोकतंत्र है?
राज ठाकरे – लोकतंत्र है। लोगों में है।
संजय राऊत – तो फिर वह मतपेटी में क्यों नहीं दिखता?
राज ठाकरे – उसी का तो कारण है। इसमें कई बातें हैं। ईवीएम से लेकर और भी बहुत कुछ।
संजय राऊत – क्या आप अब भी मानते हैं कि ईवीएम में घोटाला है?
राज ठाकरे – अभी तेलंगाना और पंजाब में जिला परिषद के चुनाव हुए। वहां मतदान बैलेट पेपर से हुआ। तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी सातवें नंबर पर गई और पंजाब में चौथे नंबर पर। यह बैलेट पेपर से साबित हो ही गया न?
संजय राऊत – कर्नाटक में भी उसी तरीके से हुआ था…
राज ठाकरे – हां, बैलेट पेपर से ही हुआ था।
संजय राऊत – राज्य में चुनाव बैलेट पेपर से कराना राज्य निर्वाचन आयोग का अधिकार है।
राज ठाकरे – राज्य निर्वाचन आयोग? वह किसके हाथ में है?
संजय राऊत – क्या महाराष्ट्र में ‘राज्य निर्वाचन आयोग’ नाम की कोई संस्था वास्तव में मौजूद है?
राज ठाकरे – भारत में कहीं है क्या? देश में कहीं है क्या? नहीं तो उन्होंने हमारी बात तो सुनी होती।
संजय राऊत – आप खुद उनके पास गए थे, प्रेजेंटेशन दिया था।
राज ठाकरे – सब कुछ बता दिया गया है।
संजय राऊत – निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों के खिलाफ मनसे के नेता ने याचिका दायर की है।
राज ठाकरे – देखते हैं क्या होता है।
संजय राऊत – शिंदे गुट से कितना चुनौती महसूस होती है? क्योंकि उनके पास आपका चुनाव-चिह्न है।
उद्धव ठाकरे – बालासाहेब ने एक शब्द इस्तेमाल किया था। वह शब्द अब मैं इस्तेमाल नहीं करना चाहता।
लेकिन ‘यूज एंड थ्रो’ से आपको वह शब्द और उसका मतलब समझ में आ गया होगा। लेकिन वह बात बालासाहेब को शोभा देती थी। मैं वह शब्द इस्तेमाल नहीं करूंगा, लेकिन मिंधे का इस्तेमाल भी बिल्कुल वैसा ही है।
संजय राऊत – मुंबई के साथ-साथ २९ मनपाएं हैं और वे भी महत्वपूर्ण शहर हैं। चंद्रपुर तक। हम मुंबई पर बात कर रहे हैं, लेकिन बाकी मनपाओं के लोगों से आप क्या कहेंगे? वहां भी जनता आपकी ओर देख रही है कि हमारे बारे में भी सोचिए, हम भी महाराष्ट्र के ही लोग हैं। आप उन्हें क्या संदेश देंगे?
राज ठाकरे – आप इस पूरी चुनाव प्रक्रिया को देख रहे हैं, महाराष्ट्र भी देख रहा है। जिस तरह इस चुनाव में पागलपन की हद तक पैसे बांटे जा रहे हैं, इस वक्त वे पूरे महाराष्ट्र में कितना बांट पाएंगे? जब नगरपालिका और अन्य चुनाव हुए थे, तब उन्होंने कैसी उथल-पुथल मचाई थी, यह हमने देखा है। हम बाकी शहरों में भी जरूर जाएंगे। इसमें कोई शक नहीं, क्योंकि वे भी महाराष्ट्र का ही हिस्सा हैं। लेकिन मौजूदा हालात देखते हुए मुझे लगता है कि संभल-संभलकर कदम रखना जरूरी है, और उन सावधान कदमों में पहला कदम मुंबई और ठाणे हैं।
उद्धव ठाकरे – यहां के मतदाताओं से हम दोनों मिलकर कह रहे हैं कि अब आपको सत्ताधारियों से कोई उम्मीद रखने की जरूरत नहीं है। आपको ही इन्हें दिशा दिखानी होगी। भले ही वे पैसे बांटें, शराब बांटें, ड्रग्स का पैसा भी आ रहा है। लेकिन अब यह दिखाने का समय है कि महाराष्ट्र लाचार नहीं है।
संजय राऊत – मुंबई समेत कई शहरों में मराठी लोग जरूर हैं, लेकिन अन्य समाज भी हैं। मुस्लिम भाई हैं, ईसाई भाई हैं, जैन हैं, पारसी हैं। क्या वे आपके साथ रहेंगे?
उद्धव ठाकरे – निश्चित रूप से वे हमारे साथ रहेंगे।
राज ठाकरे – क्यों नहीं रहेंगे?
संजय राऊत – आप पर हिंदुत्व-विरोधी होने की आलोचना हो सकती है?
राज ठाकरे – क्यों, किसलिए? मान लीजिए मैं कल मंदिर जाकर माथा टेकता हूं और आप मुझसे कहते हैं कि गंगा का पानी पियो तो मैं नहीं पिऊंगा। गंगा जहां से निकलती है, वहां का पानी शायद पी लूं। लेकिन गंगा में जहां शव बहते हुए देखे हैं न? वहां का पानी मैं वैâसे पिऊं?
संजय राऊत – उद्धवजी, यह प्रबोधनकार ठाकरे का हिंदुत्व है। वे कहते थे कि मुझे घंटा बजाने वाला हिंदुत्व नहीं चाहिए। वही बात आज राजजी और आप दोनों कह रहे हैं।
राज ठाकरे – बिल्कुल सही है। जो सही नहीं लगता, वह सही नहीं लगता।
मुंबईकरों में सभी राज्य और
जाति-धर्म के लोग शामिल हैं!

संजय राऊत – उद्धवजी, क्या आप हिंदू हैं? यह सवाल भारतीय जनता पार्टी उठा रही है।
उद्धव ठाकरे – हमारा हिंदुत्व वही है, जो प्रबोधनकार ठाकरे बताते थे, जो शिवसेनाप्रमुख कहा करते थे। उनका मुसलमानों से विरोध नहीं था। उन्होंने देशद्रोही और देशप्रेमी ऐसे सीधे दो वर्ग किए थे। यदि कोई मुसलमान है और अपने देश से प्रेम करता है तो वह हमारा है। और जैसे हाल ही में कुरुलकर पकड़ा गया है, मुझे नहीं पता वह कुरुलकर कौन है? जो अपने ही देश में रहकर पाकिस्तान के लिए काम करता है, वह देशद्रोही है। हमारा हिंदुत्व राष्ट्रवाद है, जैसा बालासाहेब ठाकरे ने कहा था।
राज ठाकरे – अब हम गोमाता की हत्या, बीफ एक्सपोर्ट जैसे विषयों को देखें। कांग्रेस सरकार के समय बीफ एक्सपोर्ट में भारत नौवें स्थान पर था। मोदी सरकार के समय भारत दूसरे स्थान पर आ गया। यानी सबसे ज्यादा गायों और मवेशियों का वध भारत में हो रहा है यह सच है। यह सरकारी आंकड़े हैं, मेरे नहीं।
संजय राऊत – और इन कंपनियों से भारतीय जनता पार्टी को बड़ी मात्रा में चंदा मिला है।
राज ठाकरे – इस पर मैंने उस समय नरेंद्र मोदी की एक क्लिप भी सार्वजनिक रूप से दिखाई थी, जिसमें वे कहते हैं ‘ये तो मेरे दोस्त हैं’। उन्होंने कहा था कि बीफ एक्सपोर्ट करने वाले मेरे दोस्त हैं। सहूलियत के अनुसार अपनाए गए हिंदुत्व का क्या अर्थ है? और चाहे आप कुछ भी कितना भी कहें, इस हिंदुस्थान में हिंदुत्व के नाम पर चुनाव लड़कर जीतकर दिखाने वाले पहले और एकमात्र नेता माननीय बालासाहेब ठाकरे थे। उसके बाद ही ये सारी बातें शुरू हुईं। जब शिवसेनाप्रमुख ने यह करके दिखाया, तब भाजपा गांधीवाद और समाजवाद में थी।
संजय राऊत – उन्होंने तो कई बार हिंदुत्व से पीछे हटने की कोशिश की है बाबरी मस्जिद हो या अन्य विषय।
उद्धव ठाकरे – मुझे लगता है कि महानगरपालिका चुनाव के बहाने उन विषयों में जाने के बजाय, नपा क्षेत्रों में रहने वाले सभी धर्मों के लोग जो भाजपा के भ्रष्टाचार और उनके प्रदूषण से परेशान हैं, यानी हिंदुओं को भी उतनी ही परेशानी हो रही है। हिंदुओं को भी गड्ढों से तकलीफ में गिरना पड़ता है, मुसलमानों को भी। फिर इसमें धर्म क्यों लाया जा रहा है?
संजय राऊत – धर्म भारतीय जनता पार्टी ला रही है, मैं यही कह रहा हूं…
राज ठाकरे – उन्हें क्या, प्रचार करने में उनका क्या बिगड़ता है?
उद्धव ठाकरे – और इसलिए अब सभी को मिलकर भाजपा को गड्ढे में डालना चाहिए। इसमें हिंदू भी आएं, मुसलमान भी आएं, ईसाई भी आएं। जो भी महाराष्ट्र से प्रेम करता है, जिसे अपने और अपने परिवार की चिंता है, उसे भाजपा को नकारना चाहिए।
संजय राऊत – आप महाराष्ट्र धर्म की बात कर रहे हैं?
उद्धव ठाकरे – हां!
संजय राऊत – आप दोनों के एक साथ आने से मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में एक ऊर्जा बनी है। लोगों को आशा की किरण दिखाई दे रही है कि उन्हें नेतृत्व मिला है कि वे कुछ कर सकते हैं। ‘एक साथ रहने के लिए एक साथ आए हैं’ यह बात भी लोगों को पसंद आई है। क्या आप एक साथ रहकर महाराष्ट्र की सत्ता लेंगे?
उद्धव ठाकरे – सिर्फ महाराष्ट्र ही क्यों? अगर एक साथ रहकर देश की सत्ता भी मिले तो आपको क्या आपत्ति है? एक बात याद रखिए हम एक साथ आए हैं मराठी लोगों के न्यायसंगत अधिकारों के लिए, न कि अन्य भाषाओं के लोगों पर अन्याय करने के लिए। हम हिंदुत्व के लिए आए हैं, इसका अर्थ यह नहीं है कि हम मुसलमानों या ईसाइयों पर अन्याय करने आए हैं। मैं फिर-फिर कहता हूं, मुंबईकरों ने २५ वर्षों तक मुंबई महानगरपालिका हमें सौंपी। उन मुंबईकरों में मराठी तो हैं ही, साथ में मुसलमान हैं, ईसाई हैं, कुछ हद तक गुजराती हैं, उत्तर भारतीय भी हैं और इन सभी को हमने समान सुविधाएं दी हैं। जैसे अभी स्कूलों की बात हुई, हमने आठ-नौ भाषाओं में स्कूल दिए हैं, उर्दू स्कूल भी हैं। और कोरोना काल में हमने सभी धर्मों के लोगों का समान रूप से इलाज किया है।
राज ठाकरे – मैं एक और बात बताता हूं। हर राज्य का हिंदू अलग होता है, क्योंकि हर राज्य का कल्चर अलग होता है। उसी तरह हर राज्य का मुसलमान भी अलग होता है। महाराष्ट्र में पीढ़ियों से, वर्षों से रहने वाला मुसलमान ‘मराठी मुसलमान’ है, मराठी भाषी है। उसी मुद्दे पर हज कमेटी के दफ्तर के सामने आंदोलन हुआ था, शायद २००९ या २०१० में। तब हज कमेटी पर यूपी-बिहार और वहां के लोगों का वर्चस्व था और महाराष्ट्र के मराठी मुसलमानों को हज पर जाने नहीं दिया जा रहा था। उस समय हमारी पार्टी ने आंदोलन किया था। महाराष्ट्र में असंख्य मुसलमान हैं हमारे सलीम मामा हैं, वे मराठी मुसलमान हैं।
उद्धव ठाकरे – कल मैं अपने एक मुस्लिम उम्मीदवार के कार्यालय गया था।
राज ठाकरे – क्रिकेटर जहीर खान हैं वे भी मराठी हैं संगमनेर के। जब हम आमने-सामने मिलते हैं तो मराठी में ही गप्पे मारते हैं।
उद्धव ठाकरे – साबीरभाई शेख थे ही बेहरामपाड़ा के हाजी। हमारे ही नगरसेवक हैं। हमारे विधायक हारून खान हैं।
संजय राऊत – उद्धवजी और राजजी, आप दोनों धुरंधर नेता हैं। जो नया अध्याय शुरू हुआ है, एक साथ आने का, आपकी युति का, मराठी लोगों की एकजुटता का, उसके माध्यम से आप महाराष्ट्र से क्या अपील करेंगे?
उद्धव ठाकरे – मैं महाराष्ट्र से अपील, बल्कि विनती करता हूं कि अब तक हम इनके पीछे लगे रहे और इन्होंने हमारा जीवन बर्बाद किया। अब महाराष्ट्र को इन्हें दिखा देना चाहिए। जो महाराष्ट्र देश को दिशा दिखाता रहा है, वही महाराष्ट्र अब फिर दिखाई देना चाहिए। इनका हिंदुत्व और इनका देशप्रेम, सच को सच और झूठ को झूठ समझना होगा। एक बात याद रखिए देशभक्ति और भाजपा भक्ति एक नहीं हैं। मैं देशभक्त हूं, इसका मतलब यह नहीं कि मैं भाजपा-भक्त हूं। और जो भाजपा या मोदी-भक्त हैं, इसका अर्थ यह नहीं कि वह देशभक्त ही हैं। देशभक्त अलग होता है जो देश से प्रेम करता है। आप जिसे कहें, मैं उसे देशभक्त नहीं मानूंगा। मैं मोदी-भक्त नहीं हो सकता, मैं भाजपा-भक्त नहीं हो सकता। मैं एक सच्चा मराठी बोलने वाला हिंदू हूं, देशप्रेमी हूं यह मुझे महाराष्ट्र को दिखाना है।
राज ठाकरे – मुझे लगता है कि इस दयनीय राजनीति को एक तरफ रखकर महाराष्ट्र को एक अलग ऊंचाई पर छलांग लगानी चाहिए। नहीं तो देश को दिशा दिखाने वाला महाराष्ट्र, यूपी और बिहार से भी नीचे चला जाएगा। महाराष्ट्र की जनता जागरूक रहे, यही मेरी एकमात्र इच्छा है।
महेश मांजरेकर – महाराष्ट्र में रहने वाला चाहे वह मुसलमान हो, जैन हो या मराठी इन सबको महाराष्ट्रीयन कहना बहुत जरूरी है। यह चुनाव उनके लिए होना चाहिए।
उद्धव ठाकरे – हम उन्हें यही कहते हैं।
राज ठाकरे – मुझे ऐसा लगता है कि ‘महाराष्ट्रीयन’ वगैरह कहने से ज्यादा मराठी ही असली भावना है, क्योंकि वे मराठी ही हैं।
महेश मांजरेकर – जो लोग मुंबई में रहते हैं, उन्हें पता है कि अब मुंबई की क्षमता खत्म हो चुकी है। यहां के जैन भी बताएंगे, दक्षिण भारतीय भी बताएंगे, और यहां के ईसाई भी बताएंगे।
राज ठाकरे – हां, लेकिन जैन जब यह बात कहेंगे तो अच्छा लगेगा।
उद्धव ठाकरे – मेरा बस इतना कहना है कि आज हम सब आपस में सौहार्द से रह रहे हैं। जब कोई संकट आता है तो क्या वह मराठी, हिंदी, जैन या गुजराती देखकर आता है? मैं बार-बार यही कहता हूं। कोरोना आया, मुंबई में पानी भर गया या कोई दुर्घटना हुई, आतंकी हमला हुआ। १९९२ के दंगे हुए, बाद के बम विस्फोट हुए, या अन्य हादसे। सभी में शिवसैनिक दौड़कर पहुंचते हैं, रक्तदान करते हैं। वे यह नहीं पूछते कि यह खून किसे दिया जाएगा। शिवसेना और मनसे की शाखाओं में अन्य भाषाओं के लोग भी आते हैं। मुसलमान भी आते हैं। किसी को बच्चे का दाखिला चाहिए, किसी को अस्पताल में भर्ती कराना है, किसी को खून की जरूरत है। जितने शिवसैनिक और मनसे कार्यकर्ता रक्तदान के लिए खड़े होते हैं, उतने क्या ये सत्ताधारियों के तथाकथित भक्त खड़े होते हैं? इसलिए हम इस एकता को बनाए रखना चाहते हैं। उसमें फूट डालने का काम भाजपा कर रही है। जो फूट डालता है, उसे कंकड़ की तरह किनारे कर दीजिए। यह अपील मैं एक बार फिर महाराष्ट्र से करता हूं।
राज ठाकरे – सबसे जरूरी बात यह है कि मुंबई पर कब्जा करने के बजाय आप अमदाबाद को मुंबई बना दीजिए, हमें खुशी होगी। बड़ौदा को मुंबई बना दीजिए, सूरत को मुंबई बना दीजिए। हमें खुशी ही होगी। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रहने दीजिए।
उद्धव ठाकरे – पहले अमदाबाद का नाम बदलिए।
राज ठाकरे – मुंबई और इस पूरे क्षेत्र को राजनीतिक रूप से गुजरात से जोड़ने की कोशिश करने के बजाय अपने राज्य का विकास कीजिए। हमारा यह बचकाना विचार नहीं है कि गौतम अडानी व्यवसाय न करें। उद्योगपति बड़े हों। इसी देश में बड़े हों, लेकिन फिर गौतम अडानी गुजरात को बड़ा करें, वहां जमीन दें, वहीं उन्हें बड़ा करें।
संजय राऊत – हमारा देश बहुत बड़ा है।
राज ठाकरे – देश बहुत बड़ा है। समस्या यह है कि आपकी नजर मुंबई और महाराष्ट्र की हर चीज पर है और जिस तरह का राजनीतिक खेल भारतीय जनता पार्टी खेल रही है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। सच तो यह है कि इसकी जरूरत ही नहीं थी, लेकिन जब यह हो रहा है तो हमें बोलना पड़ता है। फिर आप कहेंगे कि हम चुनाव के समय बोल रहे हैं, लेकिन हम चुनाव के समय नहीं बोलते पर यह एक प्लानिंग है और इस प्लानिंग को आपके सामने रखना जरूरी है। इसीलिए हम बोल रहे हैं।
संजय राऊत – उद्धव साहब और राज साहब, आप दोनों आए और मुंबई व महाराष्ट्र पर देश की राजनीति के संदर्भ में खुलकर बात की। मराठी लोगों की एकता पर चर्चा की। राज साहब ने अपने सशक्त शब्दों में अपनी भूमिका रखी। उद्धवजी की आवाज थोड़ी बैठ गई है।
उद्धव ठाकरे – मेरी आवाज बैठ गई है, लेकिन विचार आज भी मजबूत हैं।
संजय राऊत – महेश मांजरेकर एक मुंबईकर और एक आम आदमी के रूप में यहां बैठे और उन्होंने अपने मन के सवाल आपसे पूछे, उनका भी धन्यवाद।
जय हिंद! जय महाराष्ट्र!
(समाप्त)
