शहर का मौसम!

तेरे शहर का मौसम बड़ा सुहाना है।
हर गली, हर कूचे में प्यार का तराना है।
घूमने आना तो बस बहाना है,
तेरे दीदार की ही आखिरी तमन्ना है।
तेरे शहर का मौसम बड़ा सुहाना है।
तुझे मनाने नहीं आया हूं,
न कोई तुझे अफसाना सुनाने आया हूं।
तेरे सितम बहुत सहे अब तक,
अपना हौसला बढ़ाने आया हूं।
अपने आप को समझाने आया हूं।
सुनते थे तेरे शहर के मौसम के किस्से,
मौसम के मिजाज का एहसास करने आया हूं।
याद है मुझे तेरा लब दबाकर मुस्कराना,
मोहब्बत के चर्चे को हंसकर झुठलाना।
तुझे दिवानी और मुझे कहना दिवाना,
छुपकर मिलना और पुर्जा पकड़ाना।
आज तेरे शहर में यादें दफनाने आया हूं।
क्या कहूं इस सुहाने मौसम की बेईमानी,
यादें भूलने नहीं, शायद जिंदा करने आया हूं।
उन्हीं गली-कूचों से मुझे गुजरना पड़ा,
जहां से जान बचाकर निकलना पड़ा था मुझे।
क्या कहूं तेरे शहर के मौसम को,
यह आज भी सुहाना है, तब भी सुहाना था।

बेला विरदी

अन्य समाचार

लोकतंत्र

बेटियां