मुख्यपृष्ठनए समाचारफडणवीस का ‘कुंभ कंट्रोल’ दांव!

फडणवीस का ‘कुंभ कंट्रोल’ दांव!

-नासिक में सीएमओ की एंट्री से सियासी हलचल तेज

सुनील ओसवाल / मुंबई

नासिक सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के एक फैसले ने महाराष्ट्र के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने सिंहस्थ परियोजनाओं की निगरानी के लिए नासिक में अपना-अलग नियंत्रण कार्यालय स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस कदम को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, नासिक शहर में जिला परिषद की पुरानी इमारत में मुख्यमंत्री, कुंभ मंत्री और समन्वयक अधिकारियों के लिए अलग कार्यालय तैयार किया जा रहा है। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रस्तावित स्थान का निरीक्षण भी किया है और आवश्यक सुविधाओं का प्रारंभिक आकलन किया है। ध्वजारोहण के बाद यह कार्यालय कम से कम एक वर्ष तक सक्रिय रह सकता है। सिंहस्थ से जुड़े विकास कार्यों को लेकर पिछले कुछ महीनों से लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। अधूरे निर्माण, गुणवत्ता पर सवाल, कथित राजनीतिक हस्तक्षेप, कमीशनखोरी की चर्चाएं और हाल ही में हजारों करोड़ रुपए की सड़क परियोजनाओं में कथित ठेकेदार के आरोपों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अब पूरी प्रक्रिया पर सीधे नियंत्रण रखना चाहते हैं, ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही या विवाद से सरकार की छवि प्रभावित न हो। सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने नासिक की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों की जानकारी अपने विश्वस्त प्रतिनिधियों के माध्यम से ली है। बताया जाता है कि इन प्रतिनिधियों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और अधिकारियों से भी चर्चा की है। इसके बाद ही नासिक में सीएमओ का अलग कार्यालय स्थापित करने की प्रक्रिया तेज हुई है।
महाजन पर `अविश्वास’ की चर्चा तेज
इसी फैसले ने राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा को जन्म दिया है। क्योंकि सिंहस्थ कुंभ मेले की जिम्मेदारी पहले से ही कुंभ मंत्री गिरीश महाजन के पास है। ऐसे में मुख्यमंत्री कार्यालय की सीधी निगरानी को कुछ राजनीतिक जानकार महज प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि अतिरिक्त नियंत्रण की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। इसी कारण भाजपा के भीतर भी यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या यह पैâसला मंत्री स्तर की कार्यप्रणाली पर मुख्यमंत्री की बढ़ती निगरानी का संकेत है। हालांकि सरकार की ओर से इस संबंध में ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है कि यह कदम किसी मंत्री पर अविश्वास का संकेत है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस निर्णय को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं की जा रही हैं और कुंभ मंत्री गिरीश महाजन के समर्थकों के बीच भी इसे लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

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