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उद्धव ठाकरे का हमला… भाजपा सरकार का मतलब रावण… सिर पर चढ़ा है सत्ता का नशा… मोदी सरकार अहंकार में चूर!.. विरोध में उठ खड़ा हुआ है देश

सामना संवाददाता / मुंबई

पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे खुले रखने की बात करने वाली भाजपा सरकार के दरवाजे पर जब युवा अपनी मांगें लेकर पहुंचे, तो उन पर लाठियां बरसाई गर्इं। लड़कियों और महिलाओं के साथ अमानवीय बर्ताव किया गया और एक लड़की के कपड़े तक फाड़ दिए गए। आखिर यह कैसी हिंदू संस्कृति है? यह रावण संस्कृति है। ऐसा जोरदार हमला से शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र की मोदी सरकार पर बोला। मंगलवार देर रात दिल्ली में उद्धव ठाकरे ने जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने यहां आंदोलन कर रहे छात्रों का उत्साह बढ़ाया। इस दौरान उद्धव ठाकरे ने यह भी चेतावनी दी कि आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में मुंबई में आगे भी जोरदार आंदोलन जारी रहेगा।
प्रधानमंत्री ‘जन की बात’ नहीं सुनते तो यह लोकतंत्र नहीं, तानाशाही है
शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों से मुलाकात की और उनका उत्साह बढ़ाया। इसके बाद बुधवार को उन्होंने शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत के दिल्ली स्थित आवास पर पत्रकार परिषद को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सरकार के कथित आदेश पर पुलिस द्वारा आंदोलनकारी छात्रों के साथ की गई अमानवीय कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उद्धव ठाकरे ने कहा कि आंदोलन में शामिल नौ-दस साल की बच्चियों और महिलाओं के साथ पुलिस ने जिस तरह का व्यवहार किया, वह हिंदू संस्कृति को कतई स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए सवाल किया कि फिर रावण और भाजपा सरकार में क्या अंतर रह गया?
उन्होंने कहा कि यदि ये बच्चे अपने भविष्य के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, तो इसमें उनकी क्या गलती है? यह उनके भविष्य का सवाल है। अब सरकार को तय करना होगा कि उसे एक व्यक्ति को बचाना है या देश के भविष्य को।
उद्धव ठाकरे ने छात्रों के आंदोलन पर अब तक एक शब्द भी नहीं बोलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद बेहद जरूरी है। जो लोग अपनी ‘मन की बात’ जबरन सभी को सुनाते हैं, लेकिन ‘जन की बात’ नहीं सुनते हैं, यह लोकतंत्र नहीं बल्कि तानाशाही है। यह मुद्दा पहले ही सुलझ सकता था। लेकिन सरकार की तानाशाही ने इसे सुलझने नहीं दिया है।उद्धव ठाकरे ने सत्ताधारियों के इस रवैये पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह सरकार का अहंकार है और इस अहंकार के खिलाफ पूरा देश आक्रोशित है। यह कोई आंदोलन नहीं, बल्कि राष्ट्रभावना है।
तानाशाही थोपेंगे तो युवा चुप नहीं बैठेंगे
उद्धव ठाकरे ने कहा कि युवा देश का भविष्य और देश के भाग्यविधाता हैं। यदि सरकार देश के इन्हीं भाग्यविधाताओं का भविष्य कुचलने का प्रयास करेगी, तो ये युवा सरकार के सामने चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि आज युवाओं को सहारे और समर्थन की जरूरत है। यदि उन्हें सही समर्थन दिया जाए, तो यही युवा देश के मजबूत स्तंभ बनकर देश को बचाने की ताकत रखते हैं। लेकिन यह सरकार उन्हीं मजबूत स्तंभों को कुचलने का प्रयास कर रही है।
-वे बच्चे कल मेरे सामने थे। उन्हें देखने के बाद महसूस होता है कि हमारे देश में अन्याय के खिलाफ लड़ने का आक्रोश और साहस आज भी जिंदा है।
-जिस तरह से सत्ताधारी व्यवहार कर रहे हैं, उससे साफ है कि उनकी योजना देश में अराजकता पैदा करने की है। आंदोलन में पाकिस्तानी घुस आए हैं, ऐसा कहकर बदनाम करना उनका पुराना हथकंडा है। तो क्या सत्ताधारियों में भी कोई पाकिस्तानी है?
-मुंबई सहित पूरे देश में आंदोलन हो रहे हैं। अब लोग सड़कों पर उतरना चाहते हैं, अपनी आवाज उठाना चाहते हैं। यह अचानक भड़का हुआ असंतोष नहीं है। यह पिछले १२ वर्षों से जमा होता आ रहा असंतोष है, जो अब उफान पर आकर बाहर निकल रहा है।
नोटिस क्यों भेज रहे हैं? मुद्दा सुलझाइए?
मुंबई में ३०० से अधिक प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इनमें से कई लोगों को युवासेना ने रिहा करवाया। पुलिस ने इन प्रदर्शनकारियों के नाम और पते दर्ज किए और आधी रात को उन्हें डिजिटल नोटिस भेज दिए। उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर डिजिटल गिरफ्तारी गैरकानूनी है, तो ऐसे डिजिटल नोटिस भी गैरकानूनी माने जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को नोटिस भेजने के बजाय सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।

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