-१० दिनों में मुंबई के समुद्र तटों से उठाया गया २,४९८ मीट्रिक टन कचरा
-जुहू बीच से ही निकला १,८२५ मीट्रिक टन कचरा
द्रुप्ति झा / मुंबई
मुंबई को स्वच्छ और सुंदर बनाने के मनपा के दावे मानसून की पहली बड़ी लहरों के साथ ही सवालों के घेरे में आ गए हैं। समुद्र में आई तेज लहरों और हाई टाइड के बाद मुंबई के समुद्र तटों पर भारी मात्रा में कचरा जमा हो गया। हालात इतने गंभीर रहे कि मनपा को विशेष समुद्र तट सफाई अभियान चलाना पड़ा और महज कुछ दिनों में करीब २,४९८.६६ मीट्रिक टन कचरा उठाया गया।
मनपा के अनुसार, ९ से १८ जुलाई के बीच चलाए गए विशेष अभियान के दौरान समुद्र किनारों पर प्लास्टिक, थर्माकोल, लकड़ी, झाड़ियां और अन्य प्रकार का कचरा बड़ी मात्रा में जमा हुआ था। यह स्थिति सवाल खड़े करती है कि मानसून से पहले समुद्र तटों की सफाई और कचरा प्रबंधन को लेकर किए गए दावे आखिर कितने प्रभावी थे। सबसे चौंकाने वाली स्थिति जुहू बीच की रही, जहां से करीब १,८२५ मीट्रिक टन कचरा उठाया गया। इसके अलावा वर्सोवा बीच से २७७.६० मीट्रिक टन, दादर-माहिम बीच से १५२.१० मीट्रिक टन और चिंबई-वांद्रे क्षेत्र से १२७.२० मीट्रिक टन कचरा हटाया गया।
मानसून आते ही खुली सफाई व्यवस्था की पोल
मुंबई के समुद्र तटों पर हर साल मानसून के दौरान बड़ी मात्रा में कचरा बहकर आता है। इसके बावजूद मनपा की ओर से नियमित सफाई और प्रभावी कचरा प्रबंधन के दावे किए जाते हैं। लेकिन इस विशेष अभियान में सामने आए आंकड़े इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रहे हैं। अगर समुद्र तटों की नियमित सफाई व्यवस्था इतनी प्रभावी थी, तो कुछ ही दिनों में हजारों मीट्रिक टन कचरा जमा कैसे हो गया? क्या मानसून से पहले समुद्र तटों की सफाई केवल कागजों तक सीमित थी? क्या समुद्र में पहुंचने वाले कचरे को रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है?
