सामना संवाददाता / नई दिल्ली
शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के सामने अनशन समाप्त करने की स्पष्ट शर्त रखी है। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक रूप से यह भरोसा दिलाए कि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं का भविष्य खराब करने वाली कोई दंडात्मक या बदले की कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और मुकदमे वापस लिए जाएं तो वह आज ही अपना अनशन समाप्त करने को तैयार हैं। वांगचुक ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को लिखे पत्र में कहा कि २० जुलाई के संसद मार्च में शामिल छात्रों पर कानूनी कार्रवाई की आशंका उन्हें सबसे ज्यादा चिंतित कर रही है।
उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना युवाओं का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट और बिना शर्त आश्वासन मांगा कि किसी भी छात्र के करियर, पढ़ाई या नौकरी पर आंदोलन में शामिल होने का प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। वांगचुक की इस पेशकश के बाद अब गेंद सरकार के पाले में है। वह भरोसा देकर अनशन खत्म कराती है या टकराव को और लंबा खींचने देती है।
