मौसम जागा

मन दौड़ रहा है कुछ हो रहा महसूस सा
किसी की आहट आ रही है
आंख मिचौली खेल रही है
हलचल सी है खुशी या गम की
दृश्य है या अ‌दृश्य मन भांप रहा है
हवा ने गुनगुनाया जैसे कुछ फरमाया
मौसम ने ली अंगड़ाई
काली घटा ने भी बादलों का भरमार लाया
बूंदें ऐसे टपक रहीं
थमने का नाम नहीं ले रहीं
परिंदे के चहकने से कुछ अंदेशा आया
मल्हार गा के उसने भी कुछ संदेशा सुनाया
कुछ एहसास हुआ शायराना का
दिल में कुछ कसक उठी आशिकाना का
प्यार मोहब्बत करने का
वादे इरादे निभाने का
दिल की खनक से कसमें खाने का
ऊंचे पहाड़ों से गिरती झरनों की धारा
बहती नदियां तट को छू कर
छेड़ रहीं तराना
मौसम लगा आज कुछ सुहाना सा
लगता सब कुछ आज अपना सा।
-अन्नपूर्णा कौल, नोएडा

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