सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में मनोज जरांगे पाटील ने मराठा समुदाय को आरक्षण दिलाने के लिए आजाद मैदान में धरना शुरू किया है। इसके चलते मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में माहौल गरमा गया है। इस बीच दोनों उप मुख्यमंत्री मुंबई छोड़ चुके हैं। उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सातारा स्थित अपने गांव गए हैं और अजीत पवार पुणे गए हैं। इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा जोरों से शुरू है कि मराठा आरक्षण को लेकर महायुति में कुछ तो गड़बड़झाला चल रहा है यानी शिंदे-दादा मराठा आरक्षण के मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवणीस को पूरा सहयोग नहीं दे रहे हैं, ऐसी चर्चा है।
बताया जाता है कि मनोज जरांगे जिस दिन से मुंबई पहुंचे है और भूख हड़ताल शुरू की, फडणवीस उनसे सीधे संवाद करने से बच रहे हैं। सरकार का कोई भी मंत्री उनसे मिलने नहीं गया है। वरिष्ठ भाजपा नेता राधाकृष्ण विखे-पाटिल की अध्यक्षता वाली वैâबिनेट उप-समिति को निर्देश दिया गया है कि पहले एक बैठक करें और फिर मराठा आंदोलनकारियों के साथ चर्चा शुरू करें। इसलिए जरांगे-पाटील के भूख हड़ताल शुरू करने से लेकर शुक्रवार तक, फडणवीस और उनके दोनों उप मुख्यमंत्रियों ने इस मुद्दे पर न तो कोई चर्चा की है और न ही कोई बैठक की है।
एकनाथ शिंदे और अजीत पवार दोनों ने इस आंदोलन से खुद को अलग कर लिया है। शिंदे गुट के एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि विखे-पाटिल ने फडणवीस के परामर्श से चर्चा की अगुवाई की थी। मंत्री ने यह भी बताया कि जरांगे पाटील के आंदोलन के संबंध में शिंदे से कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने बताया कि शिंदे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मुंबई दौरे के दौरान उनके साथ थे और उन्होंने उनके साथ एक बैठक भी की थी। शाह के मुंबई से जाने के बाद शिंदे सातारा जिले में अपने पैतृक गांव के लिए रवाना हो गए। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अगले दो दिनों का उनका कार्यक्रम अभी स्पष्ट नहीं है।
