– ट्रेनों की कमी से यात्री बेहाल
– क्लीन ट्रेन स्कीम के नाम पर दिखावा
जेदवी / मुंबई
दिवाली और छठ के दौरान रेलवे प्रशासन की चौतरफा किरकिरी हुई है। त्योहारी सीजन में लंबी दूरी की ट्रेनों की कमी, टिकट खिड़कियों पर लंबी कतारें, कन्फर्म टिकट के लिए यात्रियों की माथापच्ची, अफरा-तफरी, सीट पाने के लिए झगड़े और मौत की दिल दहलाने वाली घटनाओं से यात्रियों का ध्यान भटकाने के लिए रेलवे का नया शिगूफा ‘एक मिनट में टॉयलेट की सफाई’ की जाएगी का झुनझुना जनता को दिया जा रहा है, जबकि स्थिति जस की तस है। ऐसे में यात्रियों का कहना है कि एक की जगह दो मिनट ले लो, पर टॉयलेट तो साफ कर दो।
बता दें कि रेलवे की क्लीन ट्रेन स्कीम को नए और अत्याधुनिक रूप में पेश किया जा रहा है, ताकि ट्रेनों को और स्वच्छ बनाया जा सके। रेलवे के बयानों में चमक बहुत है, लेकिन कोचों में जो बदबू पैâलती है, उसका इलाज घोषणा से नहीं, काम से होता है। टॉयलेट की हालत ऐसी होती है कि लोग खिड़की से चेहरा बाहर निकालकर सांस लेते हैं।
घोषणाओं में तेजी है, सुविधाओं की नहीं
कभी कहा गया था, ‘बायो-टॉयलेट से बदबू खत्म’ होगी, फिर आया ‘ऑनबोर्ड हाउसकीपिंग सेवा’, फिर ‘हेल्पलाइन नंबर’, पर यात्री आज भी वही पुराना संवाद बोलते हैं ‘भाई, पानी है क्या? रेलवे ने न सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई, न पुराने टूटे फिटिंग बदले, न वॉशरूम की मरम्मत में दिलचस्पी दिखाई। बस घोषणा करके खुश। पर जनता अब समझ चुकी है रेलवे में घोषणाएं तेज चलती हैं, ट्रेनें नहीं।
सीजन में बदतर हो जाते हैं हालात
त्योहारों के सीजन में हालात बद से बदतर हो जाते हैं। टॉयलेट में जाने के लिए जंग लड़नी पड़ती है। ऐसे में बताइए, १ मिनट में क्या होगा? पानी छिड़क कर फोटो खींचेंगे, पोंछा घुमाकर वीडियो बनाएंगे और फिर टीम अगले स्टेशन पर ‘मिशन पूरा’ बताकर आगे बढ़ जाएगी यानी काम कम, प्रचार ज्यादा।
