मुख्यपृष्ठस्तंभट्रंप का ‘ग्लोबल उद्धार' अभियान

ट्रंप का ‘ग्लोबल उद्धार’ अभियान

अब नजर क्यूबा पर

डोनाल्ड ट्रंप जब से दोबारा व्हाइट हाउस में आए हैं, ऐसा लगता है जैसे उन्होंने पूरी दुनिया के जीर्णोद्धार का ‘ग्लोबल-कौन्ट्रेक्ट’ साइन कर लिया है। ताजा निशाना बना है क्यूबा, जिसे उन्होंने ‘विफल देश’ घोषित करते हुए साफ कह दिया कि ईरान का ‘इलाज’ करने के बाद, लौटते वक्त वो क्यूबा का भी ‘उद्धार’ कर देंगे। वैसे, ट्रंप का यह ‘उद्धार प्रेम’ नया नहीं है। आइए देखते हैं कि उन्होंने अब तक किन-किन देशों का कितना ‘कल्याण’ किया है तथ्यों के आईने में:
ईरान और ‘परमाणु लगाम’ का दांव
ट्रंप का सबसे पसंदीदा प्रोजेक्ट ईरान रहा है। अपने पिछले कार्यकाल में उन्होंने २०१५ की ईरान परमाणु डील (व्ण्झ्ध्A) को एकतरफा तोड़ दिया और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। नतीजा? ईरान का ‘उद्धार’ तो नहीं हुआ, लेकिन वहां मुद्रास्फीति आसमान छूने लगी और तनाव इतना बढ़ा कि मिडिल-ईस्ट एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठ गया है। ट्रंप आज भी ईरान को घुटनों पर लाने का दावा करते हैं, पर जमीनी हकीकत यह है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को और तेज कर चुका है।
वेनेजुएला: ‘मदद’ के नाम पर तेल का खेल
वेनेजुएला पर ट्रंप की टेढ़ी नजर सालों से है। पहले कार्यकाल में उन्होंने निकोलस मादुरो की सरकार को उखाड़ने के लिए विपक्षी नेता हुआन गुआइडो को राष्ट्रपति मान लिया था और वेनेजुएला के तेल निर्यात पर कड़े प्रतिबंध थोप दिए थे। अब ट्रंप कह रहे हैं कि वेनेजुएला का पैसा ‘हमारी तरफ’ आ रहा है। असल में, इन प्रतिबंधों ने वेनेजुएला की जनता को भीषण आर्थिक संकट और भुखमरी में धकेल दिया, जिससे लाखों लोग देश छोड़ने पर मजबूर हुए।
‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ और टैरिफ का डंक
दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल व्यापार मार्ग, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, पर ट्रंप अपनी अमेरिकी दादागिरी चलाना चाहते हैं, ताकि ईरान के तेल टैंकरों को ब्लॉक किया जा सके। इसके साथ ही, ट्रंप का सबसे अचूक हथियार है ‘टैरिफ’। उन्होंने चीन से लेकर मेक्सिको, कनाडा और यहां तक कि भारत पर भी भारी व्यापार शुल्क (टैरिफ) लगाने की धमकियां दी हैं। उनका मानना है कि टैरिफ का डंक मारकर वो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को चमका देंगे, भले ही इससे वैश्विक व्यापार की कमर टूट जाए।
भारत को ‘आंखें दिखाना’
भारत के साथ दोस्ती के दावों के बीच, ट्रंप यह कहने से नहीं चूकते कि भारत उनके प्रतिबंधों का सम्मान करे और ईरान या रूस से सस्ता कच्चा तेल न खरीदे। वे भारत को ‘टैरिफ किंग’ भी बोल चुके हैं। यानी दोस्ती अपनी जगह, और अमेरिकी दादागिरी अपनी जगह!
लब्बोलुआब ये कि ट्रंप का ‘उद्धार’ असल में एक ऐसा कूटनीति है जहां वो प्रतिबंधों का हथौड़ा लेकर चलते हैं। क्यूबा को ‘संभालने’ की उनकी नई योजना फ्लोरिडा के ९५ प्रतिशत क्यूबाई वोटबैंक को साधने का राजनीतिक स्टंट ज्यादा और क्यूबा की भलाई कम लगती है। देखना दिलचस्प होगा कि ईरान और क्यूबा का ‘उद्धार’ करते-करते ट्रंप दुनिया को किस मोड़ पर ले जाते हैं!

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