सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) के लिए जर्जर इमारतों के पुनर्विकास के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देना हाई कोर्ट ने अनिवार्य कर दिया है। न्यायालय ने म्हाडा को बोरीवली स्थित एक जर्जर इमारत के पुनर्विकास के लिए भी अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करने का आदेश दिया। याचिकाकर्ता सोसाइटी के सदस्य जर्जर इमारत में रह रहे हैं, तो इमारत के पुनर्विकास के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र न देने में म्हाडा की भूमिका स्वीकार्य नहीं है।
न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की पीठ ने यह भी कहा कि जब कोई कानूनी बाधा न हो, पुनर्विकास के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करना म्हाडा का कानूनी कर्तव्य है। बोरीवली हिमकन्या कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी ने एक याचिका में म्हाडा के अनापत्ति प्रमाण-पत्र न देने के कारण इमारत के पुनर्विकास में देरी का मुद्दा उठाया था। मनपा ने इमारत को खतरनाक घोषित कर दिया था। साथ ही मनपा ने यह भी सिफारिश की थी कि इमारत संरचनात्मक रूप से असुरक्षित है और इसे गिरा दिया जाए। इसके बाद सोसायटी ने इमारत के पुनर्विकास के लिए एक डेवलपर को नियुक्त किया, लेकिन सोसायटी और डेवलपर के बीच कानूनी विवाद के कारण म्हाडा ने पुनर्विकास के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करने पर रोक लगा दी।
इस बीच, एक निजी कंपनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि एक निजी विवाद म्हाडा को पुनर्विकास के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करने से नहीं रोक सकता।
