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हर ५ दिनों में २ जवान कर रहे हैं आत्महत्या! …सशस्त्र बलों के सुसाइड आंकड़ों ने चौंकाया

सीएपीएफ, एनएसजी और असम राइफल्स का बुरा हाल
सामना संवाददाता / मुंबई
देश की सीमाओं पर, नक्सल प्रभावित इलाकों में, आतंकवाद विरोधी अभियानों में और आंतरिक सुरक्षा के लिए दिन-रात तैनात रहने वाले केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और एनएसजी के जवानों का ‘जोश’ हमेशा ‘हाई’ रहता है। हालांकि, अपने परिवारों से हजारों किलोमीटर दूर रहकर देश की सेवा करने वाले कुछ जवान गंभीर मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। इसी तनाव के कारण पिछले पांच वर्षों में ७०० से अधिक जवानों ने आत्महत्या कर ली, जबकि २४ मामलों में सहकर्मियों की ही हत्या (प्रâेट्रिसाइड) कर दी गई। इन आंकड़ों को देखकर अब यह बेहद जरूरी हो गया है कि इस बात का गहन अध्ययन किया जाए कि जवान आखिर किस तरह के तनाव से गुजर रहे हैं।

जवानों ने तनाव में किया
अपने साथियों का मर्डर!

कई जवानों ने तनाव में अपने साथियों की हत्या कर दी है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) और असम राइफल्स में कार्यरत ७४५ जवानों ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाया है। पारिवारिक समस्याओं के साथ-साथ अन्य असहनीय तनाव के चलते उन्होंने यह कदम उठाया। इसी अवधि के दौरान साथी जवानों के हमले में २४ जवानों की मौत हो गई।
यह आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं हैं, हर एक आंकड़े के पीछे एक पूरा परिवार तबाह हुआ है। जमीनी हकीकत यह है कि औसतन हर दो से तीन दिन में एक जवान आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठा रहा है। यदि सीमाओं की रक्षा करने वाला सैनिक अंदर से ही टूट रहा है तो यह केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे देश का नुकसान है। इससे यह बड़ा सवाल भी खड़ा होता है कि देश के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले जवानों का दर्द सुनने वाला क्या कोई नहीं है?
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफों की बाढ़
एक तरफ जहां सुरक्षा बलों में नौकरी पाने के लिए देश के लाखों युवा दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ साल २०२१ से २०२५ के बीच २ हजार ५३२ जवानों ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इतना ही नहीं, इसी अवधि में ४६ हजार ५२९ जवानों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली। इसके पीछे असल वजह क्या है, इसकी गहराई से जांच करने की तत्काल आवश्यकता है।

साल         मर्डर       सुसाइड
२०२१        १५८         ११
२०२२       १३८           ६
२०२३      १५७            २
२०२४      १४९            १
२०२५      १४३            ४

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