– २०२५ में एशिया में सबसे ज्यादा गिरा रुपया
-रुपए की गिरावट ने खोली मोदी सरकार की पोल
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
वर्ष २०२५ में भारतीय रुपया एशियाई देशों की प्रमुख मुद्राओं में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज करने वाली करेंसी बन गया है। रुपए की इस ऐतिहासिक कमजोरी को लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है और इसे देश की अर्थव्यवस्था के पटरी से उतरने का सबूत बताया है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक डॉलर की मजबूती, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और घरेलू आर्थिक दबावों के चलते रुपए पर भारी दबाव बना हुआ है। वर्ष २०२५ के दौरान कई एशियाई मुद्राएं स्थिर या मजबूत रहीं, जबकि रुपया लगातार कमजोर होता गया। रुपए की गिरावट से कच्चा तेल, खाद्य तेल और जरूरी आयात महंगे होने की आशंका बढ़ गई है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ सकता है। वित्तीय बाजारों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले महीनों में रुपए की गिरावट और गहरा सकती है, जिससे महंगाई और चालू खाता घाटा बढ़ने का खतरा है। विपक्ष का कहना है कि रुपए की कमजोरी का सीधा असर र्इंधन, खाद्य वस्तुओं और जरूरी आयात की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे आम जनता पर महंगाई का बोझ और बढ़ेगा। विपक्ष ने सरकार से मांग की है कि वह रुपए की गिरावट पर देश को जवाब दे और बताए कि अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
आर्थिक मोर्चे पर भारत फेल
विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में आर्थिक कुप्रबंधन, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और विदेशी निवेश में गिरावट ने रुपए को कमजोर कर दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब एशिया की अन्य मुद्राएं स्थिर या मजबूत बनी हुई हैं, तब सिर्फ भारतीय रुपया गिरना सरकार की नीतिगत विफलता को उजागर करता है।
