सूरज सिंह
हिंदुस्थान की आर्थिक राजधानी मुंबई का अपराध इतिहास कई नामों से जुड़ा है, जिनमें से एक प्रमुख नाम है करीम लाला। वास्तविक नाम अब्दुल करीम खान उर्फ शेर खान, यह वही डॉन था जिसने १९४०–५० के दशक में मुंबई के अपराध जगत पर अपना दबदबा स्थापित किया। पश्तून मूल के इस माफिया को मुंबई अंडरवर्ल्ड का पहला संगठित डॉन माना जाता है।
पृष्ठभूमि और प्रारंभिक जीवन
करीम लाला का जन्म लगभग १९११ के आसपास पेशावर क्षेत्र में हुआ माना जाता है। पश्तून समुदाय से ताल्लुक रखने वाले इस युवक ने युवावस्था में मुंबई (तब बॉम्बे) का रुख किया। शुरुआती दिनों में वह डॉक, मिलों और छोटे व्यापार में लगा रहा, लेकिन शीघ्र ही उनका प्रभाव पठान समुदाय में बढ़ने लगा और वह अपराध जगत की ओर मुड़ गया।
पठान गैंग की स्थापना
१९४० के दशक में करीम लाला ने ‘पठान गैंग’ की नींव रखी। उस दौर में मुंबई में संगठित अपराध का ढांचा स्पष्ट नहीं था, ऐसे में इस गिरोह ने अपराध को एक व्यवस्थित रूप प्रदान किया। गिरोह का मुख्य कार्यक्षेत्र था डोंगरी, भिंडी बाजार, नागपाड़ा, दक्षिण मुंबई का बंदरगाह क्षेत्र, होटल एवं बार इलाके की आपराधिक गतिविधियों से करीम लाला का नाम मुख्यत: जुड़ा रहा।
तस्करी व अवैध व्यापार
शराब, विदेशी सिगरेट, सोना, कपड़ा आदि की तस्करी
बंदरगाह मार्गों का उपयोग
जुआ-सट्टा कारोबार
कई जुए के अड्डों का संचालन
घुड़दौड़ सट्टा बाजार पर प्रभाव
उगाही और तथाकथित ‘सुरक्षा शुल्क’
बिल्डरों, होटल मालिकों, व्यापारियों से उगाही
पठानों की ताकत और खौफ के बल पर वसूली, हिंसक गैंगवॉर
प्रतिद्वंद्वी गिरोहों से संघर्ष
चाकूबाजी और गोलीबारी के कई मामले करीम लाला पर दर्ज हैं
मुंबई अंडरवर्ल्ड की त्रिमूर्ति
१९६०–७० के दशक में मुंबई का अंडरवर्ल्ड तीन प्रभावशाली व्यक्तियों में बांटा गया।
करीम लाला पठान गैंग, हाजी मस्तान तस्करी नेटवर्क, वरदराजन मुदलियार डॉक एवं मद्रासी नेटवर्क इन तीनों के बीच एक प्रकार का अंडरवर्ल्ड समझौता हुआ।
कारनामे और प्रभाव
करीम लाला के नाम पर कहा जाता है कि उसने उगाही तंत्र को संगठित किया तथा बार, होटल और जुआ क्षेत्रों पर नियंत्रण जमाया। बंदरगाह तस्करी नेटवर्क विकसित किया। पठान गैंग को ऑल इंडिया पहचान दिलवाई। अंडरवर्ल्ड की त्रिमूर्ति निर्माण में भूमिका निभाई।
अंतिम दौर और मृत्यु
जीवन के अंतिम चरण में बताया जाता है कि वह अपराध से दूरी और धार्मिक झुकाव की ओर बढ़ गया था। वर्ष २००२ में लगभग ९०–९१ वर्ष की आयु में मुंबई में उसका निधन हुआ।
करीम लाला मुंबई अंडरवर्ल्ड इतिहास में प्रारंभिक स्थापक की हैसियत रखता है। उसने ऐसे मॉडल विकसित किए जिन पर बाद में दाऊद इब्राहिम, छोटा राजन, अबू सालेम जैसे माफिया अपने साम्राज्य खड़े कर सके। उसकी मौत के साथ पुराने पठान गैंग और शुरुआती माफिया युग का समापन माना गया।
दाऊद इब्राहिम और करीम लाला
दाऊद इब्राहिम ने अपने आपराधिक जीवन की शुरुआती कड़ी में पठान गैंग से संपर्क रखा। बाद में दाऊद के भाई शब्बीर की हत्या के बाद संघर्ष बढ़ा और दाऊद ने डी-कंपनी को खड़ा कर दिया। समय के साथ दाऊद ने पुराने गिरोहों को पीछे छोड़ दिया। यही वजह है कि करीम लाला को ‘पुराने दौर का डॉन’ और दाऊद को ‘नए दौर का डॉन’ माना जाता है।
राजनीतिक और सामाजिक संपर्क
करीम लाला के पुलिस, स्थानीय नेताओं और व्यावसायिक वर्ग से संबंध चर्चा में रहते थे। फिल्मी जगत के कई लोग भी उससे संपर्क रखते थे। मीडिया में उन्हें ‘पठान डॉन’, ‘दादा’, या ‘मुंबई का बुजुर्ग माफिया’ कहा जाता था।
