अभी तक आपने एंबुलेंस को जीवन रक्षक वाहन के रूप में ही देखा और समझा होगा। जब भी किसी की तबीयत बिगड़ती है, सबसे पहले दिमाग में एंबुलेंस बुलाने का ख्याल आता है, ताकि समय रहते मरीज को अस्पताल पहुंचाया जा सके, लेकिन अगर वही एंबुलेंस रास्ते में जवाब दे दे, तो सोचिए मरीज और उसके परिजनों पर क्या गुजरेगी। ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला मामला यूपी के चित्रकूट जिले से सामने आया, जहां एंबुलेंस मरीज को अस्पताल पहुंचाने से पहले ही खुद बीमार पड़ गई और मरीज की जान चली गई।
पूरा मामला मानिकपुर तहसील के इंद्रा नगर इलाके का है, जहां के रहने वाले हनुमान प्रसाद की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। घबराए परिजनों ने बिना देर किए एंबुलेंस बुलाई। परिजनों का आरोप है कि कॉल करने के करीब ३० मिनट बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंची। जैसे-तैसे मरीज को एंबुलेंस में बैठाया गया और अस्पताल के लिए रवाना हुई, लेकिन कुछ ही दूरी तय करने के बाद एंबुलेंस सड़क पर ही खराब हो गई। इसके बाद जो दृश्य सामने आया, वह किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने वाला था। मरीज एंबुलेंस में तड़पता रहा और परिजन सड़क पर खड़े होकर एंबुलेंस को धक्का लगाने लगे। करीब १५ से २० मिनट तक मरीज एंबुलेंस में ही रहा, जबकि परिजन धक्का लगा कर वाहन को स्टार्ट कराने की कोशिश करते रहे। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो परिजनों ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। जब काफी कोशिशों के बाद भी एंबुलेंस स्टार्ट नहीं हुई, तो मजबूरी में परिजनों ने अपनी निजी गाड़ी मंगवाई और मरीज को मानिकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने हनुमान प्रसाद को मृत घोषित कर दिया।
`…तो बच जाती पापा की जान’
हनुमान प्रसाद के बेटे हेमराज सिंह का कहना है कि उनके पिता पहले से ही बीमार चल रहे थे। अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्होंने सरकारी मदद पर भरोसा किया, लेकिन एंबुलेंस की लापरवाही उनके पिता की जान ले गई। हेमराज का आरोप है कि अगर एंबुलेंस समय पर आती और रास्ते में खराब न होती, तो शायद उनके पिता की जान बचाई जा सकती थी।
