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वोट डालो, स्याही मिटाओ!

– मतदान के दिन एसीटोन-हाइड्रोजन, स्पिरिट का जमकर हुआ इस्तेमाल

-लोकतंत्र की ‘स्याही’ मिटानेवाले केमिकलों की बढ़ी मांग

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई

महाराष्ट्र में २९ मनपाओं के लिए हुए मतदान के दिन एसीटोन, हाइड्रोजन पेरॉक्साइड और अल्कोहल स्पिरिट की अचानक असामान्य मांग दर्ज होने की जानकारी सामने आने के बाद लोगों में प्रयुक्त अमिट स्याही की प्रभावशीलता पर बहस तेज हो गई है। एक तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि स्याही हटाने का प्रयास दंडनीय अपराध है और मतदाता रिकॉर्ड के कारण दोबारा मतदान नामुमकिन है, वहीं विपक्ष ने दावा किया है कि अमिट स्याही एक झूठ है, जो हटाई जा सकती है। साथ ही इसे लेकर चुनावी प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
मतदान के दिन मतदाताओं की उंगली पर लगाई जानेवाली अमिट स्याही को हटाने से जुड़े दावों के बीच महाराष्ट्र में एसीटोन सॉल्यूशन, हाइड्रोजन पेरॉक्साइड सॉल्यूशन और अल्कोहल स्पिरिट की मांग बढ़ने की जानकारी सामने आई है। यह मुद्दा ऑल इंडिया फूड एंड ड्रग लाइसेंस होल्डर्स फाउंडेशन के अध्यक्ष अभय पांडेय की ओर से उठाया गया है। उन्होंने एफडीए को लिखे पत्र में जिक्र किया है कि विनियमित रासायनिक पदार्थों विशेष रूप से एसीटोन और समान सॉल्वेंट्स के दुरुपयोग और उनसे जुड़ी भ्रामक रिपोर्टिंग को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है।
विपक्ष का आरोप
कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने आरोप लगाया है कि मुंबई मनपा चुनाव में इस्तेमाल की गई अमिट स्याही को नेल पॉलिश रिमूवर से आसानी से हटाया जा सकता है। उन्होंने मतदान के बाद एक वीडियो रिकॉर्ड कर यह दावा किया कि मार्कर पेन से लगी स्याही हटाई जा सकती है। वीडियो में सावंत कहते हैं कि मैंने व्यक्तिगत रूप से यह प्रदर्शित किया है कि नेल पॉलिश रिमूवर का उपयोग करके स्याही हटाई जा सकती है।
मार्कर से लगाया जा रहा निशान
महाराष्ट्र राज्य की २९ महानगर पालिकाओं के लिए कल मतदान हुआ। हालांकि, मतदान के शुरुआती कुछ घंटों से ही कई मतदान केंद्रों से एक अजीब और चिंताजनक शिकायत सामने आई। आरोप है कि मतदाताओं की उंगली पर लगाई जानेवाली नीली स्याही पारंपरिक अमिट स्याही नहीं, बल्कि ‘मार्कर पेन’ है। खास बात यह कि यह मार्कर लगाने के कुछ समय बाद ही मिट जाता है, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

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