मुख्यपृष्ठनए समाचारघातियों को मतदाताओं का ‘आघात’!..शिवसेना के ‘गद्दारों’ को मिली भारी हार

घातियों को मतदाताओं का ‘आघात’!..शिवसेना के ‘गद्दारों’ को मिली भारी हार

सामना संवाददाता / मुंबई

शिवसेना का साथ छोड़कर शिंदे गुट में जाने वाले घाती नेताओं को जनता ने इस मनपा चुनाव में बड़ा आघात दिया है। उनके बच्चों की हार इसका प्रमाण है। इसमें रवींद्र वायकर की बेटी और सदा सरवणकर के बेटे व बेटी की हार प्रमुख है। शिवसेना में रहते इनकी तूती बोलती थी। पार्टी छोड़ते ही जनता ने उन्हें उनकी औकात दिखा दी।
बता दें कि इस चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर वार्ड नंबर ७३ में हुआ, जहां शिंदे गुट के सांसद रवींद्र वायकर की बेटी दीप्ति वायकर पोतनीस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। दीप्ति को शिवसेना के उम्मीदवार लोना राजेंद्रसिंह रावत ने पटखनी दी।
जनता ने सिखाया ‘गद्दारों’ को सबक!
शिवसेना से गद्दारी करनेवाले नेताओं को बड़ा झटका लगा है। इनमें से कई ने अपने बच्चों को मनपा चुनाव का टिकट दिया था, पर जनता ने उन्हें नकार दिया है। इनमें सदा सरवणकर और राहुल शेवाले और रवींद्र वायकर के नाम शामिल हैं। वायकर परिवार के लिए यह राजनीतिक रूप से एक बड़ा झटका है, क्योंकि लोकसभा चुनाव में रवींद्र वायकर की मामूली जीत के बाद, पहले उनकी पत्नी विधानसभा चुनाव हार गर्इं और अब उनकी बेटी दीप्ति वायकर पोतनिस मनपा चुनाव हार गई हैं।
बता दें कि रवींद्र वायकर वही हैं, जिन्होंने शिवसेना का साथ छोड़कर शिंदे गुट ज्वाइन किया। वरिष्ठ नेता होने के बावजूद अपनी ही बेटी को वायकर जीत नहीं दिलवा पाए। इससे साबित होता है वायकर को स्पष्ट रूप से जनता ने नकार दिया है। इसी तरह सदा सरवणकर जब तक शिवसेना में थे, तब तक उनका दबदबा था। शिवसेना का साथ छोड़ते ही उनकी छवि धूमिल हो गई और इसका परिणाम यह हुआ कि उनके पुत्र व पुत्री बुरी तरह परास्त हो गए। पूर्व विधायक और सिद्धिविनायक ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर के बेटे समाधान सरवणकर को शिकस्त मिली है। सदा भी अपने बेटे समाधान को जीत नहीं दिलवा पाए। प्रभादेवी जी/ साउथ वार्ड क्रमांक १९४ से शिवसेना के उम्मीदवार निशिकांत शिंदे ने समाधान सरवणकर को परास्त कर दिया। यही नहीं, उनकी बेटी प्रिया गुरव सरवणकर भी वार्ड क्रमांक १९१ से चुनाव हार गर्इं। शिवसेना की विशाखा राऊत ने प्रिया को हरा दिया। शिवसेना छोड़ने वाले राहुल शेवाले भी पस्त हो गए। उनकी भाभी वैशाली शिवाले वार्ड क्रमांक १८३ से चुनाव हार गर्इं। भाभी को जीत दिलवाने के लिए राहुल शिवाले ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया था, लेकिन उनका प्रभाव कहीं नजर नहीं आया।

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