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वाडिया अस्पताल ने रचा इतिहास…17 वर्षीय तन्मय को मिला नया दिल

-मुलुंड से 23.9 किमी का सफर 25 मिनट में तय कर ग्रीन कॉरिडोर से पहुंचा डोनर हार्ट

सगीर अंसारी / मुंबई

बाई जेरबाई वाडिया अस्पताल फॉर चिल्ड्रन ने बाल चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया है। गंभीर हार्ट फेल्योर से जूझ रहे 17 वर्षीय तन्मय शिंदे को नया जीवन मिला। बाल हृदय रोग विशेषज्ञ सर्जन डॉ. बिस्वा पांडा के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की।
नवी मुंबई के घनसोली निवासी तन्मय को दिसंबर में दिल की गंभीर बीमारी का पता चला था। जांच में डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी सामने आई, जिसके कारण उनके दिल की पंपिंग क्षमता यानी ईएफ घटकर केवल 10 से 15 प्रतिशत रह गई थी, जबकि सामान्य ईएफ 55 से 65 प्रतिशत माना जाता है। हालत बिगड़ने पर 15 दिसंबर को उन्हें वाडिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। करीब छह महीने पहले डॉक्टरों ने परिवार को हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत समझाई और तन्मय का नाम झोनल ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन सेंटर (जेडटीसीसी) की प्रतीक्षा सूची में दर्ज किया गया।
6 अक्टूबर को मुलुंड के फोर्टिस अस्पताल में 22 वर्षीय ब्रेन-डेड डोनर का दिल उपलब्ध होने की सूचना मिली। परिवार की सहमति और जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंग तन्मय के लिए निर्धारित किया गया। ग्रीन कॉरिडोर बनाकर फोर्टिस अस्पताल, मुलुंड से वाडिया अस्पताल तक 23.9 किलोमीटर की दूरी करीब 25 मिनट में पूरी की गई। डोनर का दिल मिलने के साथ ही दूसरी टीम तन्मय को ऑपरेशन के लिए तैयार कर रही थी। लगभग तीन घंटे की प्रक्रिया के बाद नया दिल धड़कने लगा।
सर्जरी के बाद तन्मय को सात दिन आईसीयू में रखा गया। अब उन्हें सामान्य वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया है। डॉक्टर बायोप्सी के जरिए नए दिल को शरीर द्वारा स्वीकार किए जाने की निगरानी कर रहे हैं। तन्मय को आगे जीवनभर विशेष दवाएं और नियमित जांच की जरूरत होगी।
तन्मय के पिता अशोक शिंदे बस कंडक्टर और मां सुजाता शिंदे गृहिणी हैं। आर्थिक परेशानी के बीच क्राउडफंडिंग से इलाज में मदद मिली। परिवार ने डोनर परिवार, डॉ. बिस्वा पांडा और पूरी वाडिया टीम का आभार जताया है।
वाडिया अस्पताल की सीईओ डॉ. मिन्नी बोधनवाला ने इसे अस्पताल की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट के बाद हार्ट ट्रांसप्लांट शुरू होना बच्चों के बेहतर इलाज की दिशा में बड़ा कदम है। अस्पताल के हार्ट फेल्योर क्लिनिक में फिलहाल करीब 300 बच्चों का उपचार चल रहा है। डॉ. पांडा ने बच्चों में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि समय पर मिला डोनर हार्ट किसी बच्चे को नया जीवन दे सकता है।

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