-करोड़ों की नाला सफाई के दावे ध्वस्त
द्रुप्ति झा/ मुंबई
मुंबईकरों को सुकून देनेवाली ऐतिहासिक दादर चौपाटी आज मनपा की घोर लापरवाही और निकम्मेपन का शिकार हो चुकी है। मानसून से पहले नाला सफाई के नाम पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहानेवाले मनपा प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ गई हैं। दादर बीच पर समंदर की लहरें पानी नहीं, बल्कि कचरों का अंबार उगल रही हैं। मानसून के दौरान नालों और माहिम क्रीक (खाड़ी) के जरिए शहर का कचरा दादर बीच पर जमा हो रहा है। पूरी चौपाटी पर जहां नजर दौड़ाओ, वहां सिर्फ और सिर्फ प्लास्टिक, कीचड़ और दुर्गंध का साम्राज्य है। यह स्थिति किसी प्राकृतिक आपदा की वजह से नहीं, बल्कि मनपा की प्रशासनिक नाकामी के कारण पैदा हुई है। मुंबई के बड़े नालों की समय पर और सही तरीके से सफाई नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि पहली कुछ बारिशों में ही नालों का सारा कचरा बहकर समंदर में चला गया और अब वही समंदर उस गंदगी को वापस चौपाटी किनारे फेंक रहा है।
दादर बीच पर सुबह-शाम टहलने आने वाले स्थानीय नागरिकों और सैलानियों में मनपा के खिलाफ भारी आक्रोश है। गंदगी के कारण वहां बैठना तो दूर, सांस लेना भी दूभर हो गया है। इस कचरे और सड़ते हुए मलबे से संक्रामक बीमारियों के पैâलने का खतरा पैदा हो गया है, लेकिन कुंभकर्णी नींद सोए मनपा प्रशासन को मुंबईकरों के स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं है। अब देखना यह है कि इस कचरे के अंबार को देखकर भी मनपा की आंखें खुलती हैं या मुंबईकर इसी तरह प्रशासनिक लापरवाही का दंश झेलते रहेंगे!
