हजारों मुश्किलें होंगी हजारों इम्तिहां होंगे
मुकाबिल इनके रहकर एक दिन हम भी जवां होंगे
बुढ़ापे में जो आंखें ताकती हैं राह बच्चों की
मयस्सर उनको तो आखिर ये सूने ही मकां होंगे
मुहब्बत है अगर मशहूर लैला कैस की लेकिन
वो दिन आएगा अपने ही फसाने भी बयां होंगे
हमारी उम्र गुजरी बस इन्हीं ख्वाबों खयालों में
कि कब आएगा वो दिन आप मुझ पर मेहरबां होंगे
कनक अब ये सफर कैसे कटे तन्हा मुहब्बत का
कभी वो दिन भी आएगा कि हम तुम हमनवां होंगे।
-डॉ. कनक लता तिवारी
