-लेट-लतीफी, एसी लोकल के बोझ और प्रशासनिक लापरवाही से यात्री त्रस्त
-गर्मी-उमस में ठसाठस सफर करने को मजबूर मुंबईकर
जेदवी / मुंबई
मुंबई की लाइफलाइन कही जानेवाली पश्चिम रेलवे अब यात्रियों के लिए मुसीबत का दूसरा नाम बनती जा रही है। एक समय अपनी पंक्चुअलिटी और बेहतर सेवा के लिए पहचानी जानेवाली पश्चिम रेलवे का टाइम टेबल पिछले कुछ महीनों से पूरी तरह पटरी से उतर गया है। रोजाना ट्रेनों का लेट होना, अचानक रद्द होना और ऐसे में भीड़ का बेकाबू होना अब आम बात बन चुकी है।
भीषण गर्मी और उमस के बीच लाखों यात्री रोजाना जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं, लेकिन रेल प्रशासन मानो गहरी नींद में सोया हुआ है। प्लेटफॉर्म से लेकर डिब्बों तक हर जगह यात्रियों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है। यात्रियों का कहना है कि ट्रेनें समय पर नहीं आने के कारण दो-दो और तीन-तीन ट्रेनों की भीड़ एक साथ जमा हो जाती है, जिससे हालात और भयावह हो जाते हैं।
एसी लोकल बढ़ीं, नॉन एसी सेवाएं घटीं
यात्रियों का आरोप है कि पश्चिम रेलवे आम और मध्यम वर्गीय लोगों की जरूरतों को नजरअंदाज कर केवल एसी लोकल ट्रेनों को बढ़ावा देने में जुटी हुई है। १मई, २०२६ से १२ अतिरिक्त एसी सेवाओं की शुरुआत की गई है, जिससे यह संख्या १३३ से बढ़कर १४५ हो गई है। पिक ऑवर में नॉन एसी लोकल सेवाएं घटाकर उनकी जगह एसी ट्रेनें चलाने से सामान्य यात्रियों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं। महंगे किराए के कारण बड़ी संख्या में लोग एसी लोकल का इस्तेमाल नहीं कर पाते, जिसकी वजह से नॉन एसी डिब्बों में भीड़ विस्फोटक स्तर तक पहुंच जाती है।
जवाब देने से बचता रहा रेल प्रशासन
इस पूरे मामले में पश्चिम रेलवे से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मुंबईकर अब सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक यात्रियों को बदहाल व्यवस्था, लेट-लतीफ ट्रेनों और भीड़ के नरक में सफर करने के लिए मजबूर किया जाएगा?
