समयावधि खत्म होने के बाद भी प्रचार की प्रथा कहां से आई?
शिवसैनिकों, मनसैनिकों सतर्क रहें
शिवसेना और मनसे के कार्यकर्ताओं को सतर्क रहना है। अपने-अपने क्षेत्रों और मतदान केंद्रों पर क्या हो रहा है, इस पर बारीकी से नजर रखें। सत्ताधारी दल के उम्मीदवार कहीं पैसे तो नहीं बांट रहे हैं, इस पर भी ध्यान दें। ऐसा आह्वान राज ठाकरे ने किया।
सामना संवाददाता / मुंबई
प्रचार की अवधि समाप्त होने के बाद भी उम्मीदवारों को मतदाताओं से मिलने की अनुमति केवल इसी चुनाव में क्यों दी गई? पहले के चुनावों में यह अनुमति क्यों नहीं थी? और नई ‘पाडू’ (प्रिंटिंग एक्सिलरी डिस्प्ले यूनिट) मशीन के कारण मतदान में कोई गड़बड़ी नहीं होगी, इसकी गारंटी कौन देगा? ऐसे जोरदार सवाल शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने कल चुनाव आयोग से किए।
मतदान से एक दिन पहले उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे सहित पूरे ठाकरे परिवार ने मुंबई की ग्रामदेवी मुंबादेवी माता के दर्शन किए। इसके बाद राज ठाकरे के ‘शिवतीर्थ’ निवास स्थान पर ठाकरे बंधुओं ने मीडिया से संवाद किया। इस अवसर पर शिवसेना नेता और सांसद संजय राऊत भी उपस्थित थे। इस अवसर पर राज ठाकरे ने कहा कि मनपा चुनाव का प्रचार मंगलवार को शाम पांच बजे समाप्त हो गया। अब तक की परंपरा यह रही है कि प्रचार बंद होने के बाद एक दिन का अंतर होता था और उसके अगले दिन मतदान होता था। लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने एक परिपत्र जारी कर मतदान के एक दिन पहले शाम पांच बजे तक उम्मीदवारों को मतदाताओं से मिलने की अनुमति दी। यह नई परंपरा कहां से आई? यह अनुमति लोकसभा और विधानसभा चुनावों में क्यों नहीं थी? यह अनुमति दी गई है या कानून बदला गया है? ऐसे तमाम प्रश्न राज ठाकरे ने आयोग के समक्ष उपस्थित करते हुए उससे जवाब मांगा। चुनाव आयोग द्वारा लाई गई नई ‘पाडू’ मशीन को राजनीतिक दलों को दिखाए बिना इस्तेमाल किए जाने पर भी सवाल उठाए गए।
क्या हारी हुई बाजी जिताने के लिए
चुनाव आयोग कर रहा है
सरकार की मदद?
मनपा चुनाव के एक दिन पहले शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने अपने परिवार समेत मुंबादेवी के दर्शन किए। इसके बाद ठाकरे बंधुओं ने मीडिया से बातचीत की। इस दौरान राज ठाकरे ने कहा कि भाजपा और शिंदे गुट के लोगों द्वारा पर्चे के साथ पांच-पांच हजार रुपए बांटने के वीडियो वायरल हुए हैं, लेकिन लोगों द्वारा उन्हें ठुकराए जाने के दृश्य भी सामने आए हैं। यह खुशी की बात है।
राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि क्या हारी हुई बाजी जिताने के लिए चुनाव आयोग सरकार की मदद कर रहा है? यह हमारा आरोप है। आखिर चुनाव के ठीक पहले सरकार और चुनाव आयोग रोज-रोज नियम क्यों बदल रहे हैं? पत्रकारों और राज्य की जनता को चुनाव आयोग से इसका जवाब मांगना चाहिए, ऐसा भी राज ठाकरे ने कहा।
