– समुद्र और आजीविका को खतरे में डाल रहे हैं
-केंद्र सरकार के ईईजेड नियम…बड़ी नावों को खुली आजादी
– छोटे मछुआरों का भविष्य अंधकार में मछुआरा संगठनों का आरोप
-राष्ट्रव्यापी आंदोलन का इशारा
सुरेश गोलानी / मुंबई
४ नवंबर, २०२५ देश के पारंपरिक मछुआरों के लिए एक ‘काला दिन’ बन गया है। अखिल महाराष्ट्र मछुआरा कार्रवाई समिति ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में घोषित ‘विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में मत्स्य पालन के सतत दोहन नियम, २०२५ ने पूंजीपतियों और बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए भारतीय समुद्र में कानूनी रूप से प्रवेश का रास्ता खोल दिया है। इन नियमों ने गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के दरवाजे अमीरों के लिए खोल दिए हैं, जिससे तट पर रहने वाले पारंपरिक मछुआरों का भविष्य अंधकार में है। समिति के अध्यक्ष देवेंद्र दामोदर तांडेल ने केंद्र पर पारंपरिक मछुआरों द्वारा प्रस्तुत सभी २२ सुझावों को अनदेखा किया जाने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘सरकार ने हमारे अधिकारों, भावनाओं और पीढ़ियों से चली आ रही जीवनशैली से मुंह मोड़ लिया है। यह अधिसूचना एक ऐसा कानून है जो बड़ी नावों को आजादी देता है और छोटे मछुआरों के अस्तित्व को खतरे में डालता है।’
राज्य में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध
समिति के कार्यकारी अध्यक्ष बर्नार्ड डिमेलो ने बताया कि नवंबर २०२५ को केंद्र सरकार को एक ज्ञापन सौंपकर राज्य में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध अवधि का कड़ाई से पालन कराने के लिए परिपत्र जारी करने की मांग की गई है, ताकि पर्स सीन जैसी अवैध फिशिंग पर नियंत्रण किया जा सके। समिति ने यह भी मांग की है कि ४ नवंबर को पारित अधिसूचना में तत्काल संशोधन किया जाए ताकि पारंपरिक मछुआरों के २२ सुझावों को इसमें शामिल किया जा सके और एक नई, निष्पक्ष अधिसूचना जारी की जा सके। समिति ने आगे घोषणा की किदेश के ११ समुद्री राज्यों में पारंपरिक मछुआरा संगठनों से तुरंत संपर्क साधा जाएगा और जल्द ही राष्ट्रव्यापी आंदोलन का एलान होगा। केंद्र सरकार के इस पैâसले को दुर्भाग्यपूर्ण और अन्यायपूर्ण बताते हुए समिति के महासचिव संजय कोली ने कहा, ‘यह सिर्फ एक संघर्ष नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की लड़ाई है।’
