-मुंबई के ३० लाख नामों पर भी तलवार, एसआईआर के आंकड़ों ने मचाई खलबली
-घर पर नहीं मिला मतदाता तो क्या लोकतंत्र से भी होगा बाहर?
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की मतदाता सूची को लेकर चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) ने मतदाता सूची की पारदर्शिता और वोट के अधिकार को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य में करीब १.८ करोड़ मतदाता ‘अनकलेक्टेबल’ श्रेणी में बताए गए हैं। मुंबई में यह संख्या करीब ३० लाख बताई गई है। यानी जिन मतदाताओं तक गणना प्रपत्र नहीं पहुंच पाया या जो अपने दर्ज पते पर नहीं मिले, उनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर होने की आशंका पैदा हो गई है।
महाराष्ट्र में कुल करीब ९.७८ करोड़ मतदाताओं में से लगभग १.८० करोड़ नाम इस श्रेणी में बताए गए हैं। मुंबई में स्थिति और भी गंभीर बताई गई है, जहां करीब ३० लाख मतदाता यानी लगभग २९ प्रतिशत मतदाता ‘अनकलेक्टेबल’ श्रेणी में बताए गए।
घर बदला तो वोट के अधिकार पर भी संकट?
मुंबई जैसे महानगर में नौकरी, कारोबार, किराए के मकान और पुनर्विकास के कारण लाखों लोग लगातार अपना पता बदलते रहते हैं। झोपड़पट्टियों से लेकर ऊंची इमारतों तक यही हकीकत है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या किसी नागरिक का घर बदलना उसके मतदान के अधिकार को खतरे में डाल सकता है? चुनाव आयोग का तर्क है कि ‘अनकलेक्टेबल’ का अर्थ यह नहीं है कि इन सभी लोगों के नाम निश्चित रूप से काट दिए जाएंगे। आयोग के मुताबिक, इस श्रेणी में वे लोग शामिल हैं जो संबंधित पते पर उपलब्ध नहीं मिले। प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ मतदाता सूची में बदलाव संभव है। लेकिन विपक्ष और नागरिक संगठनों की चिंता यह है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होते हैं, तो उन्हें अपना नाम वापस दर्ज कराने के लिए कितनी मशक्कत करनी पड़ेगी। ये आंकड़े सिर्फ प्रशासनिक आंकड़े नहीं हैं। मुंबई जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील शहर में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि प्रत्येक वास्तविक और पात्र मतदाता को अपना नाम सूची में बनाए रखने और किसी गलती की स्थिति में उसे सुधारने का पर्याप्त अवसर मिले।
मुंबई में झटका सबसे बड़ा?
मुंबई की कई विधानसभा सीटों में ‘अनट्रेस्ड’ मतदाताओं का अनुपात काफी अधिक बताया गया था। सायन-कोलीवाड़ा में यह आंकड़ा ४३.२ प्रतिशत, मानखुर्द-शिवाजीनगर में ४२.२ प्रतिशत और वर्ली में ४०.४ प्रतिशत तक बताया गया। मालाबार हिल और मुंबादेवी में भी यह अनुपात करीब ४० प्रतिशत रहा।
