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एयरपोर्ट विस्तार के लिए हटेंगी २७५ एकड़ की झोपड़ियां

-मुंबई एयरपोर्ट का दायरा १५ प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी; इस बार वहीं पुनर्वास का प्रस्ताव
-कुर्ला-सांताक्रुज की बस्तियों पर फिर नजर, करीब १०० एकड़ जमीन एयरपोर्ट को देने की योजना

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई एयरपोर्ट के विस्तार की राह में वर्षों से अटकी झोपड़पट्टी पुनर्विकास योजना को महाराष्ट्र सरकार ने एक बार फिर आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की परिधि से लगी झोपड़पट्टियां हटने पर एयरपोर्ट का परिचालन क्षेत्र करीब १५ प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इस बार सबसे बड़ा बदलाव पुनर्वास की नीति में प्रस्तावित है। पहले की योजनाओं में झोपड़ावासियों को दूसरे इलाकों में भेजे जाने को लेकर भारी विरोध हुआ था, लेकिन अब पात्र निवासियों को उसी क्षेत्र में पुनर्वास, यानी इन-सिटू पुनर्वास देने पर विचार किया जा रहा है। एमएमआरडीए सूत्रों के अनुसार इससे योजना को स्थानीय स्तर पर स्वीकार्यता मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
एयरपोर्ट के आसपास की जमीन भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की है, जिसका कुछ हिस्सा एमएमआरडीए और एयरपोर्ट ऑपरेटर को लीज पर दिया गया है। वर्षों में कुर्ला और सांताक्रुज के हिस्सों में एयरपोर्ट की जमीन पर करीब २७५ एकड़ क्षेत्र में घनी झोपड़पट्टियां विकसित हो गई हैं। कई स्थानों पर बहुमंजिला अनौपचारिक निर्माण एयरपोर्ट की सीमा तक पहुंच गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इससे सुरक्षा के साथ विमान परिचालन से जुड़े जोखिम भी पैदा होते हैं। योजना के तहत पुनर्वास के बाद लगभग १०० एकड़ जमीन एयरपोर्ट को सौंपी जा सकती है, जिसका उपयोग भविष्य में एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए किया जा सकेगा।
इस पूरी कवायद को टर्मिनल-१ के आगामी पुनर्विकास से भी जोड़कर देखा जा रहा है। जनवरी २०२७ से मौजूदा टर्मिनल-१ के एक हिस्से को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इसके कारण वहां से उड़ानों को टर्मिनल-२ और नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर स्थानांतरित किया जा रहा है।
आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने भी इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है। उनका कहना है कि पिछली कोशिशें विवादों और अनियमितताओं में फंस गई थीं, इसलिए इस बार पुनर्वास प्रक्रिया स्पष्ट और पारदर्शी होनी चाहिए तथा निवासियों को शहर के किसी दूर-दराज इलाके में नहीं धकेला जाना चाहिए।
झोपड़ावासी कहां बसेंगे
मुंबई जैसे शहर में १०० एकड़ जमीन एयरपोर्ट विस्तार के लिए मिलना बहुत बड़ा बदलाव हो सकता है। लेकिन इस योजना की सफलता केवल जमीन खाली कराने से तय नहीं होगी। असली परीक्षा यह होगी कि सरकार हजारों परिवारों का पुनर्वास रोजगार, स्कूल, परिवहन और सामाजिक नेटवर्क को तोड़े बिना कैसे करती है। एयरपोर्ट का १५ प्रतिशत विस्तार मुंबई के विमानन बुनियादी ढांचे को मजबूती दे सकता है।
पुनर्वास की राह आसान नहीं
योजना की सबसे बड़ी चुनौती एयरपोर्ट क्षेत्र में इमारतों की ऊंचाई पर लगी पाबंदियां हैं। विमान परिचालन के कारण यहां रामाबाई नगर जैसे अन्य पुनर्विकास क्षेत्रों की तरह ऊंची इमारतें बनाना आसान नहीं होगा। ऐसे में २७५ एकड़ की घनी आबादी का उसी इलाके में पुनर्वास करना अपने आप में बड़ा शहरी नियोजन चुनौती साबित हो सकता है।

 

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