-निजी झेरॉक्स सेंटर में मिले ३,४०४ मतदाता फॉर्म; ५ बीएलओ निलंबित, चुनावी गोपनीयता पर उठे गंभीर सवाल
सामना संवाददाता / मुंबई/पनवेल
महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खारघर के सेक्टर-१९ स्थित एक निजी झेरॉक्स सेंटर में ३,४०४ आधिकारिक फॉर्म मिलने के बाद चुनावी व्यवस्था में मतदाताओं की निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामले में रायगड़ के जिलाधिकारी ने पांच बीएलओ को निलंबित कर दिया है, जबकि पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सवाल सीधा है कि जिस दस्तावेज में मतदाता की पहचान और निजी जानकारी दर्ज है, वह चुनावी तंत्र की सुरक्षित व्यवस्था से निकलकर निजी झेरॉक्स सेंटर तक कैसे पहुंच गया?
एसआईआर की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल
एसआईआर के तहत बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं से गणना प्रपत्र भरवा रहे हैं। इन प्रपत्रों में मतदाता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज होती है। ऐसे में इन दस्तावेजों की गोपनीयता और सुरक्षित रख-रखाव चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।
अधिकारियों के अनुसार, खारघर के सेक्टर-१९ स्थित एक झेरॉक्स सेंटर पर बड़ी संख्या में एसआईआर के फॉर्म पाए गए। जांच के दौरान ३,४०४ प्रपत्र सामने आए। इनमें मतदाताओं की जानकारी, फोटो और बीएलओ से संबंधित विवरण दर्ज होने की बात सामने आई है। दस्तावेजों को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर सील कर दिया है।
मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने पांच बीएलओ को निलंबित कर दिया है। वहीं, एक व्यक्ति के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। हालांकि, सिर्फ निलंबन की कार्रवाई से मामला खत्म नहीं होता।
बीएलओ पर गिरी गाज, मगर असली सवाल कायम
अब सबसे अहम सवाल यह है कि ये फॉर्म निजी झेरॉक्स सेंटर तक पहुंचे वैâसे?
इन फॉर्मों को निजी दुकान तक पहुंचाने वाला कौन था?
किसके आदेश पर दस्तावेज बाहर ले जाए गए?
इनकी कितनी प्रतियां तैयार की गर्इं?
मतदाताओं की निजी जानकारी तक किन लोगों की पहुंच हुई?
क्या किसी मतदाता की जानकारी का दुरुपयोग किया गया?
इन सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे। अधिकारियों ने भी यह पता लगाने की जांच शुरू कर दी है कि दस्तावेज अनधिकृत व्यक्ति के पास वैâसे पहुंचे और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था।
