-गोवंडी के बीएमसी स्कूल पर गंभीर आरोप, नगरसेवकों ने मांगी जांच
-शिक्षा समिति में उठा मामला; प्रशासन से अगली बैठक तक रिपोर्ट तलब
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई महानगरपालिका के स्कूलों की दुर्दशा पर एक और चौंकाने वाला आरोप सामने आया है। गोवंडी के संजय नगर स्थित बीएमसी स्कूल परिसर में कथित तौर पर बकरियां बांधे जाने का मामला महानगरपालिका की शिक्षा समिति की बैठक में उठा। नगरसेवकों ने सवाल किया कि बच्चों की पढ़ाई के लिए बने स्कूल का परिसर पशुओं को बांधने की जगह वैâसे बन गया और इसकी जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को क्यों नहीं थी।
मनोनीत नगरसेवक निखिल व्यास ने बैठक में यह मुद्दा उठाते हुए जांच की मांग की। उनका आरोप था कि स्कूल परिसर का इस्तेमाल बकरियां रखने के लिए किया जा रहा था। उन्होंने पूछा कि यदि यह सच है तो स्कूल प्रशासन, शिक्षा विभाग और स्थानीय अधिकारियों की निगरानी आखिर कहां थी।
शिक्षा के मंदिर में बकरियों का बसेरा!
बीएमसी स्कूल परिसर में कथित तौर पर बकरियां बांधे जाने के मामले को लेकर समिति में नाराजगी दिखाई दी। सदस्यों ने कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करने और पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की।
शिक्षा समिति की अध्यक्ष ने अधिकारियों को मामले की जांच कर अगली बैठक से पहले रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मुंबई महानगरपालिका अपने स्कूलों में सुविधाएं सुधारने और गरीब परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के बड़े-बड़े दावे करती रही है। ऐसे में यदि किसी स्कूल परिसर का इस्तेमाल वास्तव में पशु बांधने के लिए हुआ है, तो यह सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं बल्कि सार्वजनिक संपत्ति और शिक्षा व्यवस्था की निगरानी पर बड़ा सवाल है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले ही सरकारी और महानगरपालिका स्कूलों की स्थिति देखने पहुंची कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की नागरिक ऑडिट मुहिम का कोलाबा के एक बीएमसी स्कूल ने विरोध किया था और उसके सदस्यों के खिलाफ शिकायत तक की गई थी। अब गोवंडी के स्कूल को लेकर सामने आए आरोप इस सवाल को और तीखा करते हैं कि यदि नागरिक स्कूलों की स्थिति देखने जाएं तो उन पर सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन स्कूल परिसर का कथित दुरुपयोग वर्षों तक चलता रहे तो जवाबदेही किसकी है?
बीएमसी स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। उनके लिए सरकारी स्कूल ही बेहतर भविष्य का सबसे बड़ा सहारा है। इसलिए यह मामला केवल कुछ बकरियों का नहीं है; यह इस बात की परीक्षा है कि गरीब बच्चों के स्कूलों को प्रशासन कितनी गंभीरता से लेता है। अगली शिक्षा समिति की बैठक में आने वाली जांच रिपोर्ट अब बताएगी कि आरोप कितना सही है और अगर सही है तो बच्चों के स्कूल को पशुशाला बनाने की छूट आखिर किसने दी?
बीएमसी से पांच सीधे सवाल
स्कूल परिसर में बकरियां बांधने की अनुमति किसने दी?
स्कूल के प्रधानाध्यापक और शिक्षा अधिकारी को इसकी जानकारी थी या नहीं?
परिसर में पशु कब से बांधे जा रहे थे?
बच्चों की सुरक्षा और स्वच्छता पर इसका क्या असर पड़ा?
दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी पर क्या कार्रवाई होगी?
