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राजावाड़ी अस्पताल बना ‘मौत का मैटरनिटी वार्ड’!

-एक ही दिन तीन नवजातों की मौत से हड़कंप; मनपा प्रशासन पर लापरवाही के आरोप, नाकामी छिपाने मरीजों पर दोष मढ़ने का आरोप

द्रुप्ति झा / मुंबई

घाटकोपर स्थित मनपा के राजावाड़ी अस्पताल के प्रसूति वार्ड में बदइंतजामी और कथित लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। एक ही दिन में तीन नवजात शिशुओं की मौत से अस्पताल प्रशासन और मनपा के स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मामला गरमाने के बाद मनपा स्वास्थ्य समिति के चेयरमैन हरीश भंडिरगे ने अस्पताल का दौरा किया। हालांकि, परिजनों और मरीजों की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि ठोस कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने में जुटा है।
दरअसल, अगस्त २०२६ के अंतिम सप्ताह में राजावाड़ी अस्पताल में एक ही दिन तीन नवजात शिशुओं की मौत का गंभीर मामला सामने आया। इन घटनाओं ने अस्पताल के प्रसूति विभाग की कार्यप्रणाली, हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की निगरानी और प्रसव के दौरान आपातकालीन व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक अन्य मामले में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही गर्भवती महिला के बच्चे की भी गर्भ में ही मौत हो गई। मनपा प्रशासन की ओर से कथित तौर पर महिला के १५ दिनों तक फॉलो-अप के लिए नहीं आने को जिम्मेदार ठहराया गया। ऐसे में सवाल यह है कि हाई-रिस्क गर्भवती मरीजों की नियमित निगरानी और फॉलो-अप सुनिश्चित करने की अस्पताल की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
लापरवाही छिपाने के लिए मरीजों पर ही मढ़ा जा रहा दोष?
एक ३७ सप्ताह की गर्भवती महिला जब अस्पताल पहुंची तो डॉक्टरों को बच्चे की धड़कन सुनाई नहीं दी। बाद में सोनोग्राफी में गर्भ में ही बच्चे की मौत होने की पुष्टि हुई। अस्पताल प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए यह तर्क दे रहा है कि अस्पताल में भर्ती होने से पहले ही बच्चे की मौत हो चुकी थी। हालांकि, सवाल यह उठता है कि शुरुआती जांच और आपातकालीन प्रतिक्रिया कितनी तेजी से की गई और हाई-रिस्क गर्भावस्था की निगरानी किस स्तर पर हुई?

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