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और कितने ठेकेदारों की जान लेगी सरकार?

-उलवे में एक ठेकेदार ने की खुदकुशी…सरकार पर ८६,६६२ करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया

सामना संवाददाता / नई मुंबई

महाराष्ट्र के उलवे (नई मुंबई) में एक ३७ साल के सरकारी कॉन्ट्रैक्टर की खुदकुशी का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि सरकार की तरफ से लगभग २ करोड़ रुपए के बकाया बिल पास न होने की वजह से पैदा हुए माली तंगी और दिमागी तनाव के चलते उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया। इस हादसे ने राज्य में पिछले दो-ढाई सालों से गहराते जा रहे सरकारी भुगतानों के संकट को दोबारा सुर्खियों में ला दिया है।
महाराष्ट्र स्टेट कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एमएससीए) के मुताबिक, राज्य सरकार पर अलग-अलग विभागों के ठेकेदारों का करीब ८६,६६२ करोड़ रुपए से ज्यादा का बकाया चढ़ चुका है।
उलवे पुलिस के मुताबिक मृतक की पत्नी की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। ठेकेदार को पनवेल के उप-जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। भले ही घर से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, लेकिन पिछले साल मुंबई सिटी डिविजन के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर को लिखे उनके एक खत से सरकारी दफ्तरों की दुश्वारियों की तस्वीर साफ होती है। उन्होंने लिखा था कि छोटे ठेकेदारों को काम पाने के लिए अफसरों के १० चक्कर काटने पड़ते हैं और काम पूरा होने के बाद अपने ही पैसों के बिल क्लियर कराने के लिए फिर १० बार गिड़गिड़ाना पड़ता है।
एसोसिएशन के सदर मिलिंद भोसले ने इल्जाम लगाया है कि अफसरों के रवैये और पैसों की किल्लत की वजह से छोटे और दरमियाने दर्जे के ठेकेदार भारी तंगी का सामना कर रहे हैं। इससे पहले सांगली (जुलाई २०२५) और नागपुर (सितंबर २०२५) में भी जल जीवन मिशन के बकाये न मिलने पर ठेकेदार खुदकुशी कर चुके हैं।
ठेकेदार तंजीमों का कहना है कि चुनाव से पहले तय बजट से काफी ज्यादा के वर्क ऑर्डर जारी कर दिए गए, जिससे यह संकट गहराया। साथ ही ‘लाडली बहन योजना’ जैसी कई मुफ्त योजनाओं पर ६०,००० करोड़ रुपए का बोझ पड़ने की वजह से विकास कार्यों और बकाये भुगतानों के लिए फंड की सख्त कमी हो गई है।

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