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होर्मुज में फंसे ४१ तेल टैंकर! …ईरान पर अमेरिकी शिकंजे से चीन परेशान

एजेंसी / वॉशिंगटन
ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी ने उसके तेल निर्यात को भारी नुकसान पहुंचाया है। शिपिंग डेटा और विश्लेषकों के मुताबिक, ईरान के स्टोरेज में जगह खत्म होने के कारण कच्चा तेल टैंकरों में फंसा हुआ है और उसका भंडार बढ़ता जा रहा है।
नाकेबंदी के बीच अमेरिकी सेना ईरानी टैंकरों को होर्मुज पार कर दूसरे देशों तक नहीं जाने दे रही। कुछ जहाजों ने इस बीच अपना ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर दिया है। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि ईरान अपने ग्राहकों, खासकर चीन को कितना तेल पहुंचा पा रहा है। चीन प्रतिदिन १३-१४ लाख बैरल ईरानी तेल खरीदता है यानी ईरान के कुल तेल निर्यात का ८०-९० फीसदी तेल चीन को जाता है। अमेरिकी नाकेबंदी के बीच चीन तक यह तेल नहीं पहुंच पा रहा, जिससे उसकी मुश्किलें भी बढ़ रही हैं। ऑयल एनालिटिक्स फर्म वोर्टेक्सा के मुताबिक, १३ से २५ अप्रैल के बीच ओमान की खाड़ी से ईरानी कच्चा तेल ले जाने वाले सिर्फ कुछ ही जहाज बाहर निकले। यह मार्च के समान अवधि की तुलना में ८० फीसदी से अधिक की गिरावट है, जब ईरान ने २.३४ करोड़ बैरल तेल निर्यात किया था। ईरानी बंदरगाहों से निकलने के बाद कई जहाजों को अमेरिका ने रोक लिया। इसके अलावा एशियाई जलक्षेत्र में प्रतिबंधित कंटेनर जहाजों और ईरानी टैंकरों को भी निशाना बनाया गया है। वोर्टेक्सा ने समाचार एजेंसी को बताया, ‘इस समय हमारा अनुमान है कि करीब ४० लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल ओमान की खाड़ी से बाहर निकलने में सफल रहा है। हालांकि, हम यह पुष्टि नहीं कर पा रहे हैं कि इन जहाजों में से किसी को बाद में रोका गया या नहीं।’
तेल की तंगी और बढ़ी
ईरानी सप्लाई में कमी से वैश्विक बाजार में पहले से चल रही तेल की तंगी और बढ़ गई है। ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बंद हो चुका है, जिससे सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक से तेल निर्यात प्रभावित हुआ है और कीमतें बढ़ गई हैं। पिछले महीने अमेरिका ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ईरान को ऊर्जा निर्यात पर अस्थायी छूट भी दी थी।

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