बुलाकी शर्मा राजस्थान
लैला-मजनू, हीर-रांझा, रामू-चनणा, शिरीन-फरहाद, रोमियो-जूलियट, देवदास-पारो आद जगचावा प्रेमी-जोड़ा दूजै लोक में राजी-खुसी है। बठै अे आजाद है। मन करै जियां करै। ना कोई रोक-टोक अर ना कोई बंदिश।
लारला वैâई सालां सूं वेलेंटाइन डे रो ई अे अेंजोय करै। गळबांथ घाल’र मस्ती सूं बाग-बगीचां में घूमै-फिरै। नाचा-कूदी करै। झूला झूलै। पिकनिक मनावै। प्रेम री बिरखा में अठखेलियां करता प्रेम रो सिनान करता रैवै।
अे जद मिलै जणै मिरत्यु लोक री बातां चालै। प्रेम रा दुसमी राज, समाज अर परिवार बां नै, बां रै प्रेम नै जित्ती यातनावां दीवी, जित्ता जुलम करिया, बे किणी फिल्म रै उनमान बां नै दीखण लागै। पण बां नै दुख वैâ पीड़ री ठौड़ गुमैज हुवै वैâ बां साचै प्रेम री आबरू बचाई राखी। प्रेम री धजा फहरायोड़ी राखी। साचा प्रेमी-प्रेमिकावां सारू आज ई बे आईकॉन बणियोड़ा है।
‘पण अबै बठै प्रेम कठै डियर?’ लैला उदास हुयनै बोली, ‘प्रेम रै नांव माथै धोखो हुवै अर आपां जिसी साची प्रेमिकावां बदनाम हुवां।’
‘धोखैबाज तो प्रेमी हुया करै यार लैला, ल्याण प्रेमिकावां नै क्यूं भूंडै।’
रांझा री बात सुणतै ई मजनू, हीर, रामू, देवदास आद सगळा रीस में आयग्या, ‘म्हांरै प्रेम माथै इल्जाम कियां लगायो?’
‘आप सगळा तो प्रेम रा पर्याय हो।’ रांझा बिचाळै ई फुरती सूं खुलासो करियो, ‘साचा प्रेमी आपनै पूजै। प्रेम रो ढोंग कर’र सीधी-सादी छोरियां नै फंसावणिया मिरत्यु लोक रै बिगड़ैल छोरां री बात कर रैई हूं म्हैं।’
‘सॉरी रांझा, थूं सोचै जिकी बात अबै कोनी रैई। छोरियां भोत फॉरवर्ड हुयगी है।’ लैला बोली, ‘बे आपरै प्रेमी साथै मिल’र धोखै सूं आपरै पति नै मार सवैâ। आपरै प्रेमी साथै दगो करण सूं ई कोनी चूवैâ। बदमान आपां जिसी प्रेमिकावां हुवां वैâ नीं, बता?’
‘पण धोखो देवण आळी इसी छोरियां गिणती री ई हुवैला, सगळी थोड़ी है।’ चनणा प्रेमिकावां री पैरवी करी।
‘आपां जिसा प्रेमी-प्रेमिकावां रा जोड़ा ई गिनती रा ई है डियर चनणा।’
‘हम तोमसे अेग्री हैं लैला।’ पारो बोली, ‘इससे हम औरतों का इमेज खराब होता।’
‘पाणी पीवो छाण’र अर प्रेम करो पिछाण’र।’ चनणा बोली, ‘जणै ई धोखै सूं बचाव है।’
लैला हांसी, ‘थनै तो बठै जाय’र ‘लव ट्रेनिंग सेंटर’ सरू कर देवणो चाइजै डियर।’
‘लव रै ओळावै छळ करणियां रो आपांरै खरै प्रेम री नीं, दिखावटी प्रेम री ट्रेनिंग में इंटरेस्ट है भायली।’ चनणा री बात सुण’र सगळा उदास हुयग्या।
