खुशबू सिंह
१९६० के दशक में मुंबई की रातें डरावनी हो गई थीं। एक सीरियल किलर रमन राघव ने शहर को दहशत में डुबो दिया। उसने १९६५ से १९६८ तक ४१ लोगों की हत्या की। उसके शिकार ज्यादातर फुटपाथ पर सोने वाले, झुग्गीवासी, पुरुष, महिलाएं, बच्चे और यहां तक कि नवजात भी थे। रमन रात के अंधेरे में भारी, भोथरे हथियार से सिर पर वार करता था। लोग उसे ‘जैक द रिपर’ कहने लगे। अफवाहें थीं कि वह रात में बिल्ली या तोता बन जाता है।
पुलिस की मुश्किल चुनौती
शहर में हर रात हत्याएं हो रही थीं। लोग डर से पार्क और सड़कों से दूर रहने लगे। २,००० पुलिसकर्मी तैनात किए गए, फिर भी रमन पकड़ से बाहर था। १९६५-६६ में १९ हत्याएं हुईं। उसे एक बार पकड़ा गया, लेकिन सबूत न होने से छूट गया। १९६८ में क्राइम ब्रांच के रमाकांत कुलकर्णी ने केस संभाला। उनकी टीम ने २७ अगस्त १९६८ को सब इंस्पेक्टर की मदद से रमन को धर दबोचा। उसकी तस्वीरों और बचे हुए लोगों के हुलिए से पहचान हुई।
रमन की गिरफ्तारी का ड्रामा
रमाकांत कुलकर्णी की पत्नी लिली ने बताया कि गिरफ्तारी की खबर पैâलते ही पुलिस दफ्तर के बाहर भीड़ जमा हो गई। लोग खुशी से चिल्ला रहे थे। रमन तमिल मूल का था, लंबा-तगड़ा, कम पढ़ा-लिखा और बेघर। पूछताछ में वह दो दिन तक चुप रहा। तीसरे दिन उसने चिकन मांगा। पुलिस ने चिकन और तेल-कंघी दी। उसने नारियल तेल लगाया, बाल संवारे और फिर ४१ हत्याएं कबूल कीं। उसने पुलिस को अपनी झोपड़ी दिखाई, जहां लोहे का हथियार और चाकू छिपे थे।
कोर्ट में सुनवाई और सजा
मजिस्ट्रेट के सामने रमन ने कहा कि उसने ‘भगवान के आदेश’ पर हत्याएं कीं। वकीलों ने उसे मानसिक बीमारी का हवाला देकर बचाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस डॉक्टरों ने कहा कि वह ठीक है। जज सीटी दिघे ने उसे साइकोपैथ और बर्बर बताया। उसे फांसी की सजा सुनाई गई। कोर्ट के बाहर भीड़ ने सीटियां बजाकर उसका मजाक उड़ाया। रमन ने भी भीड़ को जवाब दिया। लेकिन हाई कोर्ट ने मानसिक जांच के बाद उसकी सजा को आजीवन कारावास में बदला। १९८७ में येरवाड़ा जेल में किडनी की बीमारी से उसकी मौत हो गई।
मुंबई की स्मृति में रमन
रमन की कहानी मुंबई के इतिहास का काला पन्ना है। लेखक लिली कुलकर्णी के मुताबिक, लोग रमाकांत को फोन कर फांसी की मांग करते थे। उनकी किताब ‘फुटप्रिंट्स ऑन द सैंड्स ऑफ क्राइम’ में पूरा विवरण है। १९९१ में बनी टीवी फिल्म और २०१६ में बनी अनुराग कश्यप की फिल्म साइको रमन में रमन की खौफनाक कहानी है। आज मुंबई के ज्यादातर लोग रमन को भूल चुके हैं, लेकिन उसका खौफ आज भी कहानियों में जिंदा है।
