-बंजारा विरुद्ध एसटी और मराठा बनाम ओबीसी कोटा पर जंग
– फडणवीस पर किसी भी समुदाय का नहीं रहा विश्वास
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में आरक्षण को लेकर चल रही विभिन्न समुदायों की जंग के चक्रव्यूह में महायुति सरकार बुरी तरह से फंस गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की बातों पर किसी को विश्वास नहीं रह गया है। परिणाम स्वरूप बंजारा विरुद्ध एसटी और मराठा विरुद्ध ओबीसी की लड़ाई दिनों-दिन बढ़ती जा रही है, जिसके कारण फडणवीस की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैंैं।
मराठा विरूद्ध ओबीसी के बीच बढ़ती दरार पर फडणवीस ने कहा कि यह कम नहीं होगी, जब तक कि दोनों समुदायों के नेता लोगों को सही तथ्य नहीं बताते। उन्होंने कहा कि मैं कहना चाहूंगा कि केवल उन्हीं लोगों को प्रमाण-पत्र दिए जाएंगे, जिनके पास कुनबी होने का रिकॉर्ड है।
बता दें कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी जीआर पर राज्य की राजनीति और राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। एक तरफ राज्य के ओबीसी, एससी और एसटी समूहों ने मराठा आरक्षण के लिए हैदराबाद गजट पर सरकारी आदेश जारी करने पर चिंता व्यक्त की है, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि मराठा कोटा से संबंधित सरकारी आदेश ओबीसी के अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिए हैं कि यह लड़ाई इतनी जल्दी खत्म नहीं होने वाली है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मराठा आरक्षण के संवेदनशील मुद्दे पर बढ़ती खाई को भी स्वीकार किया और दोनों समुदायों के नेताओं से इस मुद्दे के बारे में लोगों के सामने सही तथ्य प्रस्तुत करने की अपील की।
जीआर वापसी की मांग
सरकारी आदेश जारी करने के कुछ हफ्ते बाद कई ओबीसी, आदिवासी और बंजारा संगठनों ने सरकार से इस आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। विभिन्न जाति समूहों ने तर्क दिया है कि मराठा समुदाय के सदस्यों को ओबीसी कुनबी जाति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने की अनुमति देने के लिए हैदराबाद राजपत्र के कार्यान्वयन से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।
आदिवासी कर रहे
बंजारा समुदाय की मांग का विरोध
दूसरी तरफ आदिवासी संगठनों ने बंजारा समुदाय की इस मांग का विरोध किया है और दावा किया है कि बंजारा समुदाय को विमुक्त जाति और घुमंतू जनजाति (वीजेएनटी) श्रेणी के तहत पहले से ही ३ फीसदी कोटा का लाभ मिल रहा है। इसलिए अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में पहले से सूचीबद्ध ३७४ जातियों के अधिकारों को खतरा होगा। ओबीसी नेताओं ने १० अक्टूबर को नागपुर में एक विशाल मोर्चा निकालने का संकल्प लिया है।
