सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (देवाभाऊ) वित्त मंत्री अजीत पवार (दादा) और उप मुख्यमत्री एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र को दिवालिया बना दिया है। लाडली बहनों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक, विभिन्न लोकप्रिय नारों की बारिश के कारण सरकार को लगातार कर्ज लेना पड़ रहा है। लाडली बहनों को धन मुहैया कराने के लिए पिछले ९० दिनों में २४ हजार करोड़ का कर्ज लेना पड़ा। अगले कुछ दिनों में वित्तीय स्थिति और बिगड़ेगी और इस वित्तीय वर्ष के अंत तक कर्ज का आंकड़ा ९ हजार करोड़ हो जाएगा। यानी देवाभाऊ, दादा और शिंदे ने मिलकर राज्य का दिवाला निकाल दिया है।
आरटीआई के तहत वित्त विभाग से राज्य की वित्तीय स्थिति के बारे में जानकारी मिली। आंकड़ों के अनुसार, चौंकाने वाली वित्तीय स्थिति सामने आई है। राज्य सरकार ने नए वित्तीय वर्ष २०२५-२६ के अप्रैल महीने में कुल ३४ हजार ५८९ करोड़ ३५ लाख का कर्ज लिया। जबकि इसी महीने में २१ हजार ९५६ करोड़ का कर्ज चुकाया। मई में सरकार ने १९ हजार १७३ करोड़ का कर्ज लिया और १९ हजार २५४ करोड़ का कर्ज चुकाया। जून में सरकार ने २२,७२५ करोड़ रुपए उधार लिए और उसी महीने १२,२६२ करोड़ रुपए उधार चुकाए। तीन महीनों में कर्ज चुकाने की कुल राशि ५२,४७२ करोड़ रुपए है। राज्य सरकार ने खुले बाजार से बॉन्ड के जरिए सात से साढ़े सात फीसदी की ब्याज दर पर कर्ज जुटाया। वित्त विभाग ने बताया है कि राज्य सरकार के बॉन्ड के अलावा नाबार्ड और राष्ट्रीय आवास बैंक से भी साढ़े चार फीसदी की ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध लिया है।
कर्ज का बढ़ता जा रहा है पहाड़
वित्तीय वर्ष २०२२-२३ में शुद्ध कर्ज ६ लाख २९ हजार करोड़, २०२३-२४ में ७ लाख १८ हजार करोड़,
२०२४-२५ में ८ लाख ३९ हजार करोड़, वित्तीय वर्ष २०२५-२६ के अंत तक कर्ज का आंकड़ा ९ लाख ३२ हजार करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है।
ब्याज का बोझ बढ़ा
इस बीच जैसे-जैसे कर्ज की मात्रा बढ़ रही है, सरकार पर ब्याज का बोझ भी बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष २०२२-२३ में सरकार को ब्याज पर ४१,६८९ करोड़ रुपए चुकाने थे। २०२३-२४ में उसे ४५,६५२ करोड़ रुपए और २०२४-२५ में उसे ब्याज पर ५४,६८७ करोड़ रुपए चुकाने थे। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक सरकार को कुल ऋण पर ब्याज के रूप में ६४,६५९ करोड़ रुपए चुकाने होंगे।
