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एलफिंस्टन ब्रिज बंद होने का साइड इफेक्ट…कुछ मिनट की दूरी पर हैं अस्पताल… मीलों का करना पड़ रहा है सफर!

-ट्रैफिक में फंस रही एंबुलेंस…जाम बन रहा मरीजों का काल

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई में एलफिंस्टन ब्रिज बंद हुए अभी पांच दिन ही हुए हैं, लेकिन इस बंद का असर सबसे ज्यादा गंभीर मरीजों की जान पर पड़ रहा है। यहां मनपा समेत तमाम अस्पताल कुछ ही दूरी पर हैं, मगर प्रभादेवी और परेल को जोड़नेवाले इस रेलवे पुल को गिराने के लिए बंद किए जाने की ट्रैफिक जाम और दादर से वैकल्पिक रास्तों में भीड़ होने की वजह से १५ मिनट का फासला तय करने में ४० मिनट से ज्यादा लग रहे हैं। नतीजतन, गंभीर मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ रहे हैं। यह सिर्फ ट्रैफिक नहीं, बल्कि इंसानियत और व्यवस्था की नाकामी का खौफनाक चेहरा है।
एलफिंस्टन ब्रिज बंद होने के पांच दिन बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। मध्य मुंबई और उसके आसपास का ट्रैफिक जाम मरीजों और उनके परिजनों के लिए मौत का सबब बन रहा है। केईएम, टाटा मेमोरियल और ग्लेनीगल्स जैसे बड़े अस्पतालों तक पहुंचने में एंबुलेंस को वैकल्पिक और लंबे रास्ते अपनाने पड़ रहे हैं। बारिश और जलभराव ने समस्या और गंभीर कर दी है। कई एंबुलेंस जाम में घंटों फंसी रहीं, जिससे गंभीर मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ बैठे। ‘शाह एंबुलेंस सेवा’ के संचालक आसिफ शाह ने बताया कि परेल पहुंचने में जहां पहले १५ मिनट लगते थे, अब ४० मिनट से ज्यादा लग रहे हैं। उन्होंने रविवार को एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि सायन से केईएम अस्पताल ले जा रहे मरीज की रास्ते में ही मौत हो गई। वाहन चालकों का आरोप है कि यातायात प्रबंधन की कोई व्यवस्था नहीं है। पुल बंद होने से हमें भीड़भाड़ वाली गलियों से होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, लेकिन आपातकालीन सेवाओं के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई।
इलाज की तलाश में परेशान मरीज
भांडुप से इलाज के लिए आई ६० वर्षीय महिला को केईएम अस्पताल पहुंचने में पूरे तीन घंटे लग गए। गुर्दे की पथरी से पीड़ित महिला की हालत टैक्सी में और बिगड़ गई। परिवार ने आरोप लगाया कि न तो समय पर एंबुलेंस मिली और न ही ट्रैफिक पुलिस ने कोई मदद की। परिजनों का कहना है कि १० दिनों से महिला केवल तरल पदार्थों पर जी रही थी और दर्द से कराह रही थी। रास्ते की देरी ने उसकी हालत और बिगाड़ दी।

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