– मुश्किल है २-३ सालों में कर्ज से प्रदेश को बाहर निकालना
-राज्य पर है १० लाख करोड़ से ज्यादा की देनदारियां
सामना संवाददाता / मुंबई
सत्ताधारी फिर से सत्ता पाने के लिए महाराष्ट्र को बेचेंगे। आज जो कर्ज दिख रहा है वह ९ लाख करोड़ के करीब है। राज्य की देनदारियां देखें तो महाराष्ट्र पर १० लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज हो गया है। अगले २-३ सालों में राज्य को कर्ज से बाहर निकालना मुश्किल है। केंद्र सरकार हर साल कर्ज बढ़ाने की अनुमति देती है। एक तरफ वे कहते हैं कि हम कुल आय का २५ फीसदी कर्ज ले सकते हैं और अब यह लगभग २० फीसदी तक पहुंच गया है। वे कहेंगे कि २५ फीसदी नहीं, आप ५० फीसदी कर्ज ले सकते हैं। क्या हमारी फिर से आर्थिक रूप से खड़े होने की ताकत है? इस तरह का सवाल कांग्रेस के नेता वडेट्टीवार ने किया।
वडेट्टीवार ने कहा है कि आज तक महाराष्ट्र में कोई भी सरकार किसानों के प्रति इतना उदासीन नहीं है। उन्होंने कहा कि इस सरकार को ‘किसानों का दुश्मन’ कहा जा सकता है। सरकार ने कर्जमाफी नहीं दी। सोयाबीन और कपास को सही दाम नहीं मिल रहा है और अब प्राकृतिक आपदा और कीटों के हमले से किसान परेशान हैं इसलिए किसानों को मदद की जरूरत है। विजय वडेट्टीवार ने कहा कि अगर किसानों को अभी मदद नहीं मिली तो किसानों की आत्महत्याएं फिर से बढ़ जाएंगी। पिछली बार सोयाबीन को भाव नहीं मिला था। इस बार सोयाबीन पर रोग लगने से फसल बर्बाद हो गई है। सरकार को पंचनामे करके मदद करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जिला परिषद चुनाव के बाद यह सबकुछ बंद हो जाएगा, फिर ‘आप कौन और हम कौन’। स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव होते ही ‘लाडली बहन योजना’ चली जाएगी। लाडली बहनों को सावधान रहना चाहिए। जिन लाडली बहनों के नाम काटे गए, उन्हें आगामी चुनाव में इसका बदला लेना चाहिए।
महायुति कर रही पिछड़ी जातियों और आदिवासियों के साथ अन्याय
विजय वडेट्टीवार ने कहा कि इन योजनाओं को लागू करते समय सरकार पिछड़ी जातियों और आदिवासियों के साथ अन्याय कर रही है। सरकार उनकी सभी योजनाओं में कटौती कर रही है। उनके फंड को हड़प लिया गया है। वे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं। इस तरह राज्य को बर्बाद करने का काम शुरू हो गया है।
