प्रधानमंत्री मोदी ७५ साल के हो गए हैं। मोदी के ७५ साल पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी के लोग मोदी का जन्मदिन मनाने जा रहे हैं। अपने नेता का जन्मदिन मनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन क्या आज देश में ऐसा स्वच्छ माहौल रह गया है कि जनता मोदी का जन्मदिन मनाए और शुभकामनाएं स्वीकार करे? मोदी ११ साल से देश के प्रधानमंत्री हैं। मोदी और उनके अंधभक्तों को अब तो इस बात पर चिंतन करना चाहिए कि उन्होंने इन ११ सालों में देश को आखिर दिया क्या है। प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी ने देश के ८० करोड़ लोगों को हर महीने १० किलो मुफ्त अनाज दिया है और इस मुफ्त अनाज के लिए वह खुद की ही तारीफ करते रहते हैं। इसका मतलब है कि १४० करोड़ की आबादी वाले देश में ८० करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे हैं। मोदी उन्हें १० किलो अनाज देते हैं इसलिए उनका चूल्हा जल रहा है। भारत जैसे देश के लिए यह गर्व की बात नहीं है। विपक्षी दलों ने सुझाव दिया है कि मोदी के जन्मदिन को ‘बेरोजगारी दिवस’ के रूप में मनाया जाना चाहिए। इसका मतलब है कि ‘आत्मनिर्भर’ भारत का उनका नारा खोखला साबित हुआ है। पिछले १० सालों में बेरोजगारी का महाविस्फोट हुआ है। मोदी जब पहली बार सत्ता में आए थे तो उन्होंने हर साल दो करोड़ रोजगार देने का एलान किया था, लेकिन पिछले १० सालों में १० लाख लोगों को भी रोजगार नहीं मिला तो फिर रोजगार किसे मिला? गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह को एक ही दिन में भारतीय क्रिकेट बोर्ड का अध्यक्ष बना दिया गया और बोर्ड के लाखों-करोड़ों की निधि उनके हाथों में दे दी गई। क्रिकेट कारोबार की बागडोर जय शाह के हाथों सौंपकर उन्हें ‘काम’ दे दिया, लेकिन देश के करोड़ों युवा आज भी बेरोजगार हैं। उनके अपने मित्र गौतम अडानी ने जहां पर उंगली रखी वे सरकारी कंपनियां और जमीन उन्हें मुफ्त में दे दी गई। हवाई अड्डे, सरकारी कंपनियां, सरकारी जमीनें अडानी को दे दी गर्इं। मुंबई जैसे शहरों को अडानी के हवाले छोड़ दिया गया मानो वे ‘पानी’? हो। महाराष्ट्र के तुंगारेश्वर में
साढ़े तीन हजार एकड़ जमीन
अडानी को कौड़ियों के भाव दे दिया गया। ओडिशा का एक पूरा जिला अडानी को खनन के लिए दे दिया गया। यह देखकर भुवनेश्वर हाई कोर्ट को धक्का लगा। बिहार के भागलपुर में अडानी को १,०२० एकड़ जमीन दे दी गई। यह जमीन मात्र एक रुपया प्रति वर्ष की दर से ३० साल के लिए दी गई थी। आज इस जमीन पर १० लाख आम के पेड़, लीची और सागौन के पेड़ हैं। यह सब अब नष्ट हो जाएगा। मोदी के समय में पर्यावरण पूरी तरह से नष्ट हो गया। मोदी ने १० साल में झूठ बोलने और झूठ फैलाने का रिकॉर्ड बनाया। मोदी ने कोरोना काल में देश में अराजकता पैâलाई। मोदी ने नोटबंदी का तुगलकी फैसला सुनाकर भारतीय अर्थव्यवस्था को सड़क पर ला दिया। उन्होंने जीएसटी जैसे अव्यावहारिक फैसले लेकर व्यापारी वर्ग और लोगों की कमर तोड़ दी। मोदी के समय में भ्रष्टाचार को खुली छूट मिली। उन्होंने ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ नारे का बुलबुला खुद ही फोड़ दिया। भाजपा के खाते में देश के सभी भ्रष्ट उद्योगपतियों ने लाखों-करोड़ों जमा किए। इसमें बैंक और टैक्स डुबोनेवालों का योगदान ज्यादा था। जिन लोगों पर ईडी और सीबीआई ने छापे मारे, वे भाजपा के सबसे बड़े चंदा देनेवाले हैं। मोदी और उनकी पार्टी ने इसी पैसे से चुनाव लड़ा। मोदी ने देश के सभी महान भ्रष्टाचारियों को भाजपा में शामिल कर लिया। मोदी ने भ्रष्टाचार को लेकर किसी भी कानूनी रोक का पालन नहीं किया। मोदी और उनके लोगों ने संविधान की सभी संस्थाओं पर कब्जा कर लिया। उन्होंने चुनाव आयोग, अदालतों, राज्यपालों को गुलाम बना लिया। मोदी काल में लोकतंत्र, संसद, विधानसभा का कोई महत्व नहीं बचा है। लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता के लिहाज से इस काल में देश की ‘अवनति’ हुई है। मोदी ने चुनाव जीतने के लिए धार्मिक उन्माद बढ़ाने और उस उन्माद पर सवार होकर चुनाव प्रचार करने का उत्तम काम किया। कश्मीर समस्या के समाधान के लिए अनुच्छेद ३७० हटाया गया, लेकिन पुलवामा से लेकर पहलगाम तक निर्दोष लोगों की हत्याएं नहीं रुकीं। फिर भी
पाकिस्तान के साथ क्रिकेट
खेल करवाने का महापराक्रम अब प्रधानमंत्री मोदी ने दिखाया है। मोदी साढ़े तीन साल बाद मणिपुर गए थे, लेकिन उनके निकलते ही मणिपुर फिर भड़क उठा। इसका मतलब है कि मोदी की कोई सुन नहीं रहा। पिछले ११ वर्षों से प्रधानमंत्री और उनके लोगों ने केंद्रीय जांच एजेंसियों से आतंकित करके जो चाहा वो किया है। एक लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री के रूप में मोदी का प्रदर्शन तानाशाही को लजाने वाला है। देश ने उन्हें मौका दिया। उनके पास इतिहास बनाने का मौका था। इतिहास उस काल के लोगों के सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक विचारों और घटनाओं का प्रतिबिंब होता है। भारत में यह प्रतिबिंब धुंधला हो गया है। मोदी द्वारा गुजरात के प्लेटफॉर्म पर चाय बेचने की कहानी झूठी निकली। मोदी द्वारा बचपन में मगरमच्छ से कुश्ती लड़ने की कहानी झूठी निकली। मोदी ने खुद को ‘अवतारी पुरुष’ घोषित किया, लेकिन वह भी झूठ निकला, क्योंकि यह अवतारी पुरुष विपक्ष की आलोचना के बाद सार्वजनिक सभाओं में रोने लगता है। मोदी पाकिस्तान को तोड़कर अखंड भारत बनानेवाले थे। वह झूठ निकला। मोदी देश को पहले से अधिक सुजलाम, सुफलाम और समृद्ध बनानेवाले थे। इनमें से कुछ भी नहीं हुआ। मोदी ने यह शगूफा छोड़ा कि ‘राजनेताओं को ७५ साल के बाद सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए’ और तदनुसार, आडवाणी सहित कई लोगों को जबरन सेवानिवृत्त कर दिया गया। आज वे स्वयं ७५ वर्ष के हो गए हैं, लेकिन वे स्वयं कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। प्रधानमंत्री मोदी हमारे व्यक्तिगत शत्रु नहीं हैं, लेकिन वे शिवसेना, यानी छत्रपति शिवाजी महाराज के महाराष्ट्र के शत्रु हैं। उन्होंने हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख की शिवसेना को एक द्वेष के चलते तोड़ दिया। महाराष्ट्र इसे याद रखेगा। नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए, हम उन्हें आत्ममुग्धता त्यागकर आत्मचिंतन करने का सुझाव दे रहे हैं। उनके पास इतिहास रचने का अवसर था, लेकिन सारा कालखंड पाखंडपूर्ण राजनीति में बरबाद कर श्रीमान मोदी ने एक महान अवसर गवां दिया है!
