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मुस्लिम वर्ल्ड : पैगंबर के नाम पर दी थी इजरायल को मान्यता!..अब क्या डील तोड़ेंगे अरब देश?

सूफी खान

अरब खित्ते में बसे इजरायल का अरब मुल्क शुरू से विरोध करते हैं, लेकिन उसकी ताकत टेक्नोलॉजी और उसे मिलनेवाले अमेरिकी सपोर्ट की वजह से चुप रहते हैं। हालांकि, इससे पहले १९४८-४९, १९५६, १९६७, १९७३, १९८२, २००६ और २०२३ में अरब इजरायल जंगों की एक लंबी फेहरिस्त है। लेकिन हर बार इजरायल से हारते रहे अरब मुल्कों ने आखिरकार उसके नजदीक जाना ही बेहतर समझा।
२०२० में ऐसा समय आया जब अमेरिका के दबाव में कुछ अरब देशों ने पहली बार खुलकर इजरायल को मान्यता दी और उसके साथ रिश्ते बनाए। इसके लिए एक समझौता किया गया, जिसे अब्राहम अकॉर्ड्स के नाम से जाना जाता है। इस समझौते का नाम ‘अब्राहम’ इसलिए रखा गया क्योंकि यहूदी, ईसाई और मुसलमान तीनों के एक पैगंबर हुए थे, जिन्हें यहूदी और ईरान अब्राहम और मुसलमान हजरत इब्राहिम कहते हैं। अमेरिका का मानना था कि एक पैगंबर के नाम से तीनों अलग-अलग विचार धाराएं एक छाते के नीचे आ सकती हैं। लेकिन कतर की राजधानी दोहा में हमास नेताओं को निशाना बनाकर इजरायल ने हमले किए तो एक बार फिर यह डोर टूटती दिख रही है। अरब देश अब नाटो जैसा मिलिट्री एलायंस बनाने में जुट गए हैं।
अब्राहम समझौते की बात करें तो साल २०२० में डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में ये पहल की गई थी। डॉक्‍यूमेंट में सबसे पहले यूनाइटेड अरब अमीरात यानी यूएई और बहरीन ने साइन किए, इसके बाद मोरक्को और सूडान भी इस समझौते से जुड़ गए। इस पहल में ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर ने अहम भूमिका निभाई थी।
बरसों बाद किसी अरब देश ने इजराइल को मान्यता दी थी, इसलिए इसे बहुत बड़ा कदम माना गया। इजरायल और यूएई के रिश्ते बने क्योंकि वह तेल और कारोबार की दुनिया में बड़ी ताकत है और पूरे खाड़ी क्षेत्र पर उसका असर है। इन रिश्तों से व्यापार, सुरक्षा, रक्षा और टेक्नोलॉजी में नए दरवाजे खुले।
उस वक्त फिलिस्तीनी अथॉरिटी और हमास का कहना था कि अरब देशों ने उन्हें धोखा दिया है। क्योंकि पहले ये तय था कि जब तक फिलिस्तीन को आजाद राज्य का दर्जा नहीं मिलता, तब तक कोई अरब देश इजरायल से रिश्ते सामान्य नहीं करेगा, लेकिन कुछ अरब और अप्रâीकी मुस्लिम देश इस शर्त से मुकर गए। बहरहाल, अक्टूबर २०२३ के बाद से इजरायल का गाजा पर आक्रामक रवैया और गाजा के साथ-साथ वेस्ट बैंक कब्जाने की मुहिम ने अरब देशों और इजरायल के बीच के रिश्तों को कड़वा कर दिया। यहां तक कि पिछले दिनों यूएई ने भी इजरायल को धमकाया था कि वेस्ट बैंक पर कब्जे का कोई भी प्रयास बेहद खतरनाक साबित होगा।
पिछले दिनों जब अमेरिका के प्रेसिडेंट ट्रंप मिडिल ईस्ट के दौरे पर थे तो उन्होंने खुलकर अपने भाषण में कहा था कि सऊदी भी इजरायल के साथ जल्द ही अब्राहम समझौता कर लेगा। लेकिन उसके बाद तेजी से बदलते हालात के बीच सऊदी ने फिर दोहराया है कि जब तक फिलिस्तीन को एक मान्यता प्राप्त राज्य का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक वे इजरायल से रिश्ते सामान्य नहीं करेगा। फिर भी अमेरिका लगातार अरब देशों को इस समझौते में जोड़ने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में चर्चा चल रही है कि अजरबैजान और कुछ सेंट्रल एशियाई मुस्लिम देश भी इसमें शामिल किए जा सकते हैं। लेकिन कतर पर हमले ने ट्रंप की इन कोशिशों पर पानी फेर दिया है। अब अरब देश एक हो रहे हैं। क्या वो इजरायल के साथ अब्राहम समझौता तोड़ेंगे, ये बड़ा सवाल है?

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