•चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में प्राप्त की सर्वोच्च मानी जाने वाली ‘डीएम’ की उपाधि
•शहर के प्रतिष्ठित चिकित्सक दंपती डॉ अखंड प्रताप सिंह-डॉ रेखा की पुत्री हैं डॉ. उमाद्रि
सुल्तानपुर। सिविल लाइन निवासी प्रतिष्ठित चिकित्सक दंपति (बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.अखंड प्रताप सिंह व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रेखा सिंह) की बेटी डॉ.उमाद्रि सिंह ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। जिसने सुल्तानपुर जिलेवासियों को गौरवान्वित कर दिया है। उन्हें संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ ने उन्हें डाक्टरेट ऑफ मेडिसिन (डीएम) की उपाधि प्रदान की है। संस्थान में संप्रति असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत डॉ. उमाद्रि अब संस्थान में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ बन गई हैं। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में यह उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
यह उपलब्धि उनकी लगन, परिश्रम और परिवार के सहयोग की कहानी है।
शुरुआती पढ़ाई स्थानीय स्टेला मॉरिस कान्वेंट स्कूल से करने के बाद डॉ. उमाद्रि ने नैनीताल के ऑल सेंट्स कालेज से हाईस्कूल किया। इसके बाद फिर वापस अपने शहर लौटकर केएनआईसीई से इंटरमीडिएट करते हुए मेडिकल परीक्षा में प्रवेश की तैयारी की। इस दौरान बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में जीवविज्ञान में सर्वाधिक अंक प्राप्त कर सम्मान हासिल किया।सीपीएमटी और एआईपीएमटी में शुरुआती असफलताओं के बावजूद बगैर हार माने वे लक्ष्य के प्रति समर्पित रहीं। कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, मणिपाल विश्वविद्यालय से एमबीबीएस किया। इसके बाद एमडी (एनेस्थीसिया) की स्नातकोत्तर डिग्री भी हासिल की। इस दौरान गंभीर रूप से बीमार मरीजों की देखभाल में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। कोविड-19 की दूसरी लहर के समय गर्भावस्था के अंतिम महीनों में रहते हुए उन्होंने एसजीपीजीआई में रेज़िडेंट डॉक्टर के रूप में सेवा दी। बच्चे के जन्म के केवल तीन महीने बाद उन्होंने नीट-एसएस परीक्षा दी और ऑल इंडिया रैंक 6 हासिल कर एसजीपीजीआई के प्रतिष्ठित डीएम कार्यक्रम में प्रवेश पाया। कठिन प्रशिक्षण और छोटे बच्चे की जिम्मेदारियों के बीच चिकित्सा सेवा को लेकर सजग रहीं। पिछले वर्ष संजयगांधी पीजीआई के क्रिटिकल केयर विभाग में अग्निकांड की घटना में प्रथम प्रतिक्रिया देने वालों में रहीं। अब वे इसी विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में नई जिम्मेदारी संभाल रही हैं और अपने माता-पिता व जीवनसाथी के निरंतर सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करती हैं।
डॉ. उमाद्रि की यह यात्रा बताती है कि शांत परिश्रम, पारिवारिक समर्थन और अपने काम के प्रति सच्चा प्रेम, सुलतानपुर जैसे छोटे शहर के साधारण छात्र को भी असाधारण ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
