कविता श्रीवास्तव
सोमवार को हुई बरसात ने एक बार फिर मुंबई महानगर के सुनियोजित विकास के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। बारिश के पानी ने अंडरग्राउंड कोस्टल रोड को स्विमिंग पूल जैसा बना दिया। उस मार्ग से वाहनों का आना-जाना पूरी तरह रोकना पड़ा। दूसरी ओर क्राफर्ड मार्वेâट से भायखला तक जानेवाले दक्षिण मुंबई के लंबे और ऊंचे जेजे फ्लाईओवर पर भी भारी जलजमाव से यातायात प्रभावित हुआ। मुंबई में बरसात की फुहारें हिंदमाता, गांधी मार्वेâट, किंग्जसर्कल से लेकर कुर्ला तक, अंधेरी सबवे सहित अन्य कई निचले इलाकों में नियमित जलजमाव कर देती हैं। इसीलिए हल्की फुहारें गिरने पर भी टीवी चैनल वाले इन निश्चित ठिकानों पर पहुंच जाते हैं। बारिश तेज होने पर लोकल ट्रेनों की सेवाएं भी विलंबित होती हैं। लेकिन बरसात में ऊंचाई पर बना जेजे फ्लाईओवर भी स्विमिंग पूल जैसा बन जाएगा, यह उम्मीद नहीं थी। तभी तो मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष सांसद वर्षा गायकवाड ने ट्वीट किया कि स्वस्थ और तगड़ी कही जानेवाली ट्रिपल इंजन सरकार के शासन में यह स्विमिंग पूल! हम सब जानते हैं कि अंडरग्राउंड कोस्टल रोड पर करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं। इसके निर्माण के लिए अनेक प्रकार की आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञों का सहयोग लिया गया था। इसके बावजूद वहां स्विमिंग पूल जैसे हालात बने। यह इस प्रोजेक्ट के निर्माण की कमियों को उजागर करता है। सारे उपाय के बावजूद इस भूमिगत मार्ग पर पानी भरने से मुंबईवासियों को परेशानी झेलनी पड़ी। यह पानी क्यों भरा? इसके लिए निश्चित रूप से ठेकेदार के कान पकड़े जाने चाहिए। साथ ही राज्य में ट्रिपल इंजन की सरकार को भी इस पर जवाब देना चाहिए। यदि कोस्टल रोड पर पानी भरने की समस्या बनी रही तो मुंबई में पानी भरने के ठिकानों में यह भी स्थाई रूप से शामिल हो जाएगा और बारिश गिरते ही टीवी चैनल वाले वैâमरे लेकर झट से यहां पहुंच जाएंगे। ऐसी स्थितियां नागरिकों को परेशान करती हैं। इससे मुंबई की प्रतिष्ठा को ठेस लगती है। साथ ही हमारे विकास के दावों और हमारी व्यवस्थाओं पर प्रश्नचिह्न लगता है?
मोनोरेल पर मौन!
मुंबई की मोनोरेल को अस्थाई रूप से बंद कर दिया गया है। ऐसा दूसरी बार हो रहा है। सोमवार को वह फिर रुक गई थी और यात्री उसमें फंस गए। एक महीने में ऐसा चौथी बार हुआ। ऊंचाई पर चलनेवाली मोनोरेल के डिब्बे में लटके यात्रियों को किसी तरह रेस्क्यू किया गया। मोनोरेल के बार-बार खराब होने के मुख्य कारणों में तकनीकी खराबी, पुराने उपकरण, मेंटेनेंस में कमी और ओवरलोडिंग बताया जाता है। मोनोरेल पुरानी टेक्नोलॉजी पर आधारित है। मेट्रो के मुकाबले, मोनोरेल पर यात्रियों की संख्या बहुत कम है। यह घाटे में चल रही है। इसके रखरखाव पर खर्च ज्यादा है। मोनोरेल संचालन की जिम्मेदारी मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण की इकाई महामुंबई मेट्रो ऑपरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड संभाल रहा है। एमएमआरडीए महाराष्ट्र सरकार के अधीन है इसलिए मोनोरेल की जवाबदेही भी राज्य सरकार की है, पर वह मौन है।
