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मुस्लिम वर्ल्ड : दुनिया के सामने ट्रंप की फजीहत! …नेतन्याहू ने साबित कर दिया गलत

सूफी खान

कतर पर हमले के मुद्दे पर ऐसा लग रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच एक मत नहीं बन पा रहा है। यही वजह है कि व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में जब ट्रंप से इजरायल के कतर पर आनेवाले समय में किए जानेवाले हमलों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वो कतर पर अब हमला नहीं करेंगे। लेकिन दूसरी ओर उसी दिन नेतन्याहू ने उनके बयान का खंडन कर दिया। नेतन्याहू ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे दोबारा जरूर करेंगे।
१५ सितंबर, २०२५ को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, ‘इजरायल कतर पर दोबारा हमला नहीं करेगा।’ उन्होंने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से फोन पर बात की थी और आश्वासन दिया था कि ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी। ट्रंप ने कतर को ‘महान सहयोगी’ बताते हुए इस हमले को इजरायल के हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें हमले की पूरी जानकारी पहले नहीं थी और उन्होंने इसे रोकने की कोशिश की थी।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपने बयान में कहा कि ‘यह हमला इजरायल या अमेरिका के हितों को आगे नहीं बढ़ाता। यह नेतन्याहू का फैसला था, मेरा नहीं।’ फिर १५ सितंबर को ही नेतन्याहू ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ एक प्रेस काॅन्फ्रेंस में ट्रंप के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा- ‘हमास को खत्म करना हमारा लक्ष्य है और अगर इसके लिए कतर में कार्रवाई की जरूरत पड़ी, तो हम पीछे नहीं हटेंगे।’
इजरायल के इस एलान के बाद प्रेसिडेंट ट्रंप की बात का कोई वजन नहीं रह गया। ट्रंप के लिए इसे एक झटके के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने गाजा युद्ध को समाप्त करने और हमास के साथ बंधक सौदे को प्राथमिकता दी है, लेकिन नेतन्याहू की संपूर्ण विजय की नीति इससे टकरा रही है। पीएम नेतन्याहू तो ये भी कह चुके हैं जो लोग हमास को शरण देंगे हम उन पर हमला करेंगे। उनके इस बयान को तुर्की से जोड़कर देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि तुर्की इजरायल पर कभी भी अटैक कर सकता है।
अब ऐसा लग रहा है कि इजरायल और अमेरिका की डिप्लोमेसी एक-दूसरे से टकरा रही है। जानकार मानते हैं कि फिलहाल मिडिल ईस्ट में जो कुछ भी चल रहा है उससे इजरायल और कतर के बीच यह तनाव गाजा युद्ध को और जटिल बना सकता है। ट्रंप की शांति की कोशिशें और नेतन्याहू की आक्रामक नीति के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो रहा है। कतर ने सख्त जवाब की धमकी दी है और अगर इजरायल भविष्य में दोबारा हमला करता है, तो यह क्षेत्रीय युद्ध को और भड़का सकता है।

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