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शिवभोजन थाली केंद्र संचालकों के आगे झुकी सरकार! … बकाया २०० करोड़ रुपए का करेगी भुगतान

– कैबिनेट की बैठक में लिया गया फैसला
सामना संवाददाता / मुंबई
महाविकास आघाड़ी सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की दूरदर्शिता से गरीब, मेहनतकश और जरूरतमंद लोगों के लिए शिवभोजन थाली योजना शुरू की गई थी, लेकिन महायुति सरकार के दौरान शिवभोजन थाली योजना ठप हो गई। गत फरवरी महीने से ही १,८०० शिवभोजन केंद्र संचालक सब्सिडी न मिलने के कारण विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। यह विरोध प्रदर्शन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आवास के सामने भी किए गए थे। आखिरकार, केंद्र संचालकों के आंदोलन के आगे झुकते हुए राज्य की महायुति सरकार ने दो सौ करोड़ रुपए का भुगतान करने का पैâसला लिया है। यह फैसला कैबिनेट की बैठक में लिया गया।
बता दें कि राज्यभर में १,८०० शिवभोजन थाली केंद्र हैं। कोरोना काल में १० रुपए में मिलने वाले इन शिवभोजन थाली केंद्रों ने गरीब, जरूरतमंद नागरिकों और निर्माण मजदूरों को बड़ा सहारा दिया। उसके बाद तत्कालीन महाविकास आघाड़ी सरकार ने इस योजना को जारी रखने का पैâसला किया। तदनुसार हर साल बजट में २७० करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया। हालांकि, महायुति सरकार के सत्ता में आने के बाद लाडली बहन योजना के लिए सब्सिडी का मुद्दा उठा और इस योजना को नजरअंदाज कर दिया गया। यह योजना बंद होने के कगार पर है और कुछ केंद्र संचालकों को गत दिसंबर से और कुछ केंद्र संचालकों को गत फरवरी से सब्सिडी नहीं मिली है। केंद्र संचालक आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे, क्योंकि इन शिवभोजन थाली केंद्र संचालकों का लगभग २०० करोड़ रुपए सरकार के पास बकाया था। केंद्र संचालकों ने एक शिवभोजन संगठन बनाया। पिछले सात महीनों के बकाया बिलों का भुगतान करने की मांग करते हुए इन केंद्र संचालकों ने सभी मंत्रियों और विधायकों के घरों के सामने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। राज्यभर में प्रतिदिन २.५ लाख जरूरतमंद लोगों को १० रुपए में थाली उपलब्ध कराई जाती है।

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