-चैट में हत्या का प्लान, फिर भी अदालत ने किया बरी!
न्यूयॉर्क का एक पुलिसवाला, जिसे दुनिया ने ‘आदमखोर पुलिसवाला’ का नाम दिया, एक ऐसी कहानी का हिस्सा बना, जिसने सबको हैरान कर दिया। गिलबर्टो वैले, २८ साल का एक पुलिस अफसर, जिसके पास मनोविज्ञान की डिग्री थी, उस पर इंटरनेट पर डरावनी साजिश रचने का आरोप लगा। उसकी पत्नी कैथलीन ने जब उसके कंप्यूटर की जांच की, तो एक खौफनाक सच सामने आया। लेकिन कोर्ट ने उसे बरी कर दिया। ये कहानी २०१२ में शुरू हुई और आज भी चर्चा में है।
पत्नी ने खोला राज
कैथलीन को शक था कि उनके पति गिलबर्टो का कोई और रिश्ता है। जब उनका कंप्यूटर खराब हुआ, तो उन्होंने गिलबर्टो का लैपटॉप इस्तेमाल किया। वहां उन्हें कुछ ऐसा मिला, जिसने उनके होश उड़ा दिए। गिलबर्टो डार्क वेब पर ‘गर्लमीट हंटर’ नाम से चैट कर रहा था। वहां वो महिलाओं के अपहरण, हत्या और यहां तक कि उन्हें खाने की बातें करता था। इनमें कैथलीन और उनकी कॉलेज की सहेलियां भी शामिल थीं। डरकर कैथलीन ने एफबीआई को सब बता दिया। अक्टूबर २०१२ में गिलबर्टो को गिरफ्तार कर लिया गया।
सनसनीखेज मुकदमा
फरवरी २०१३ में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। वैâथलीन ने कोर्ट में रोते हुए बताया कि गिलबर्टो उसकी हत्या की योजना बना रहा था। उसने चैट में लिखा था कि वो उसका गला काटकर खून का फव्वारा देखना चाहता था। उसने दो महिलाओं को एक-दूसरे के सामने यौन हमला करने और तंदूर में पकाने की बातें भी की थीं। अभियोजन पक्ष ने कहा कि गिलबर्टो ने सरकारी डेटाबेस से कई महिलाओं के पते और फोन नंबर निकाले। सबूत इतने मजबूत थे कि जूरी ने उसे अपहरण की साजिश और डेटाबेस के दुरुपयोग का दोषी पाया।
कोर्ट ने क्यों बरी किया
गिलबर्टो की वकील जूलिया गैटो ने बचाव में कहा कि ये सब सिर्फ उसकी काल्पनिक सोच थी। उन्होंने कहा कि गिलबर्टो को अपनी बात कहने और सोचने का अधिकार है। कोई सबूत नहीं था कि उसने किसी को नुकसान पहुंचाया। २१ महीने बाद, २०१४ में अपील कोर्ट ने पैâसला पलट दिया। जज पॉल गार्डेफ ने कहा कि गिलबर्टो की सोच बीमार थी, लेकिन ये उसे अपराधी साबित करने के लिए काफी नहीं। जज ने ये भी कहा कि एक ही दिन में तीन अलग-अलग देशों में अपहरण की योजना बनाना असंभव था।
‘आदमखोर पुलिसवाला’ की नई जिंदगी
मुकदमा खत्म होने के बाद गिलबर्टो ने २०१६ में ‘रॉ डील’ नाम की किताब लिखी, जिसमें उसने अपनी कहानी बयां की। उसने चार उपन्यास भी लिखे और अब वो अपनी लेखनी से कमाई करता है। इस केस ने सवाल उठाया कि क्या सोच और कल्पनाएं अपराध हो सकती हैं। गिलबर्टो की कहानी आज भी लॉ स्कूलों में पढ़ाई जाती है। ये एक ऐसी कहानी है, जो इंटरनेट की अंधेरी दुनिया और कानून की सीमाओं को उजागर करती है।
