• धनंजय सिंह स्मृति व्याख्यानमाला
सामना संवाददाता / सुल्तानपुर
‘जो शोहरत गजल को हासिल हुई वो शायरी की किसी और विधा को नहीं मिली। गजल ने जिंदगी के हर पहलू को अपने में समेटा है। गजल के कुछ मिसरों में शायर जब इशारों में अपनी बात कहता है तो उसकी खूबसूरती बढ़ जाती है।’
ये बातें राणाप्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के उर्दू विभागाध्यक्ष डाॅ. महमूद आलम ने कहीं। वे महाविद्यालय में बाबू धनंजय सिंह स्मृति व्याख्यान माला के अंतर्गत आयोजित ‘गजल के फन’ विषय पर व्याख्यान दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि उर्दू की पहली गजल अमीर खुसरो ने लिखी। गजल इश्क के हजार रूपों को हमारे सामने रखती है। आत्मा जब मस्ती में आती है तो ग़ज़ल कही जाती है। शायर जब अपने दिल की बात कहता है तो सुनने वाले को लगता है कि यह मेरी बात कह रहा है इस प्रकार गजल आपबीती से जगबीती बन जाती है।
प्राचार्य प्रोफेसर दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि गजल भारत की सांस्कृतिक धरोहर है। हिन्दी फिल्मों से गजल निकाल देने पर वहां वीरानी छा जायेगी।
संचालन व आभार ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ आलोक कुमार पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर उप प्राचार्य प्रोफेसर निशा सिंह व आइक्यूएसी निदेशक प्रोफेसर इन्द्रमणि कुमार समेत महाविद्यालय के शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।
