मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाऋतुचक्र : पचरा...शेरवा पे चढ़िके आवा हे महतरिया

ऋतुचक्र : पचरा…शेरवा पे चढ़िके आवा हे महतरिया

सुरेश मिश्र

संपूर्ण भारत में मां अंबे की धूम है। पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश सहित हर जगह मां दुर्गा की पूजा हो रही है। कहीं गरबा, कहीं कवि सम्मेलन तो कहीं झांकियां। जगह-जगह पंडाल बनाए गए हैं। मां अष्टभुजा की हो रही पूजा के दौरान एक भक्त ने मां का आह्वान किया-
शेरवा पे चढ़िके फिनि से
आवा हे महतरिया
रहिया जोहत बानी न।
लखि-लखि थकि गइ मोर नजरिया
रहिया जोहत बानी न।
भक्तन कइ भिड़िया देखा,
माई चहुंओर हो,
जय अंबे का जयकारा,
पग-पग पे शोर हो,
तोहरे दर आइल बानी,
लइके लाल चुनरिया,
रहिया जोहत बानी न।
जल्दी आवा आजु मयरिया
रहिया जोहत बानी न।
महिषासुर के वंशजवा,
धोखा दें छलि-छलि के,
गरबा मा नाचत हउवें,
भेषवा के बदलि-बदलि के
जब ले कल्कि न आवइं,
भांजा आइ कटरिया,
रहिया जोहत बानी न।
नाही होइ जाई फिनि ररिया
रहिया जोहत बानी न।
धुपवा-दिपवा से महकइ,
तोहरा दरबार हो,
अपने भक्तन के बनिजा,
फिनि तारनहार हो,
हरि लेतू दुनिया भर से,
तू सगरी अन्हियरिया,
रहिया जोहत बानी न।
फइले कब जग में उजियरिया
रहिया जोहत बानी न।
मंदिर मा घंटा बाजइ,
गूंजत हौ आरती,
तोहरा बोलावत हउवें,
माई मां भारती,
षड्यंत्र फाने बाएन,
सगरे भ्रष्टाचरिया,
रहिया जोहत बानी न।
जेकरे काटे नाहिं लहरिया
रहिया जोहत बानी न।
हे अंबे मइया हमरी,
मनसा पुरावा हो,
जल्दी से आवा, नाहीं,
देरिया लगावा हो,
नाहीं कुछु होइ ना जाई,
लागे हमके डरिया,
रहिया जोहत बानी न।
शेरवा कइ अब करा सवरिया
रहिया जोहत बानी न।

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